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कोडरमा : विश्व शांति महायज्ञ में राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन

Koderma : विश्व शांति महायज्ञ समोसारण कल्पद्रुम महायज्ञ विधान में जैन संत गुरुदेव विशल्य सागर महाराज के सानिध्य में राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का विषय संत साहित्य में मौक्तिकम  था. इस कार्यक्रम में भारतवर्ष के कई विद्वान साहित्यकार पहुंचे. दिल्ली से आई जैन धर्म की महान विद्वान साहित्यकार प्रोफेसर नीलम जैन की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम किया गया. राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जैन संत गुरुदेव विशल्य सागर  ने कहा कि ज्ञान वही है जिससे चारित्र की शुद्धि होती है और चित की विशुद्धि होती है, मनुष्य जन्म का सार यदि कोई है तो ज्ञान है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/10/1-14-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> ज्ञान के  तत्व बोध से चित का निरोध एवं आत्मा की विशुद्धि होती है, उसे जैन दर्शन में ज्ञान कहते हैं. जो भौतिकता से हटाकर अध्यात्म से जोड़ दें, वही वास्तविक ज्ञान है. इस संगोष्ठी को प्रोफेसर विश्वजीत कुमार, नालंदा, प्रोफेसर के नलिन शास्त्री, योगेंद्र नाथ शर्मा अरुण, प्रोफ़ेसर हरि कृष्ण तिवारी, प्रोफेसर रूबी कुमारी, अलका दीदी, भारती दीदी सहित मंच संचालन कर रही प्रोफेसर नीलम जैन ने संबोधित किया. झुमरी तिलैया में चतुर्मास कर रहे जैन संत 108 विशल्य सागर जी गुरुदेव को आए हुए सभी विद्वानों ने मिलकर प्रशस्ति पत्र भेंट किया और उन्हें "श्रमण संस्कृति उदगाता" की उपाधि से अलंकृत किया. मौके पर  जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन, राजकुमार अजमेरा मौजूद थे. इसे भी पढ़ें–प्रतिमाओं">https://lagatar.in/dirt-spread-in-the-ponds-due-to-the-remains-of-idols-and-worship-material-emphasis-on-cleanliness/">प्रतिमाओं

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