Koderma: गांव में लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिले, इसके लिए पेयजल की व्यवस्था की गयी. 2012-13 में एक योजना के तहत जिले के डोमचांच प्रखंड के नीमाडीह गांव में एक जलमीनार बनाया गया. लोगों को पानी मिले इसके लिए गांव में जगह-जगह नल लगाया गया. जलमीनार में लिफ्ट इरिगेशन कंपनी के द्वारा बनाया गया. सबकुछ किया गया, लेकिन लोगों को पानी नहीं मिला. शोभा की वस्तु बनकर रह गयी जलमीनार 35 लाख रुपए की इस योजना का उद्देश्य नीमाडीह गांव के लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाना था. जब गांव में नल लगा तो लोगों को काफी खुशी हुई. उन्हें लगा कि अब उन्हें भी पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. घर के पास लगे नल से पानी मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. गांव की जलमीनार और नल शोभा की वस्तु बनकर रह गयी. ग्रामीणों ने कहा कि हमलोगों ने इसके लिए जनप्रतिनिधियों को सूचित किया. कार्यालय में पदाधिकारियों को सूचित किया. लेकिन इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. अगर इस समस्या का समाधान हो जाता तो पेयजल की समस्या दूर हो जाती. आज गांव में पानी की घोर समस्या है. लोगों को नदी का पानी पीना पड़ता है. इस वजह से गांव के लोग हमेशा बीमार रहते हैं. महिलाओं ने बताया कि बरसात में समस्या बढ़ जाती है. पानी दूषित हो जाता है. हमें नदी से पानी लाना पड़ता है. गांव का जलमीनार किसी काम का नहीं है. आजादी के दशकों बाद भी इस गांव में पेयजल की समस्या है. पूर्व जिला परिषद प्रधान शालिनी गुप्ता का घर गांव से लगभग 6 किलोमीटर दूर है. फिर भी उनका ध्यान इस गांव पर नहीं है. लेकिन लोगों की उम्मीद कायम है. एक न एक दिन गांव में लगे नल से पानी मिलेगा और लोगों को नदी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसे भी पढ़ें- बेरमो">https://lagatar.in/bermo-students-of-pitts-school-registered-splendid-success-in-class-12th-examination-brought-pride-to-the-school/">बेरमो
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कोडरमा: लोगों को अब भी पानी का इंतजार, 35 लाख की लागत से बना जलमीनार बेकार

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