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कोडरमा : तिल की सोंधी खुशबू से महक उठा बाजार

Koderma : मगर संक्राति में तिलकुट और तिल का काफी महत्व होता है. मकर संक्रांति पर्व को लेकर झुमरीतिलैया बाजार में तिलकुट का बाजार सज गया है. लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक जगहों पर तिलकुट बनाने का काम हो रहा है. प्रतिदिन लगभग 2 क्विंटल के अधिक गुड़ और चीनी के तिलकुट बिक रहे हैं. वहीं गया व अन्य जगहों के तिलकुट भी दुकानों पर बिक रहे हैं. इसके लिए ऑर्डर भी दिए जा रहे हैं. इसके अलावा घेवर की बिक्री भी शुरू हो गई है. इसे भी पढ़ें– आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-shopkeepers-of-gamharia-market-protested-against-fee-hike-shops-kept-closed/">आदित्यपुर

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मकर संक्रांति नजदीक आते ही तिलकुट का व्यवसाय परवान चढ़ा

इस बाबत वंदना स्वीट्स के मालिक कैलाश चौधरी ने बताया कि घी के घेवर 600 रूपये किलो और रिफाइन का घेवर 360 से 400 रूपये में बिक रहा है. वहीं दूध व दही के विक्रेता निर्मल घी भंडार ने बताया कि दूध और दही का आर्डर लिया जा रहा है. इस वर्ष अमूल का 1 किलो का दही 60 रूपये पैकेट में उपलब्ध है. जबकि होटलों में जमा गया, दही 120 रुपये में बिक रहा है. वहीं चूड़ा और गुड़ के विक्रेता प्रदीप अग्रवाल नवाब ने बताया कि उसना चूड़ा 30 से 35 रूपये किलो, अरवा 60 -75 रूपये किलो, तिल का लडउू सादा काला 200 ग्राम का 25 रूपये पैकेट में मिल रहा है. ज्यों-ज्यों मकर संक्रांति नजदीक आ आ रहा है तिलकुट की बिक्री बढ़ती जा रही है बाजार में गुड़ का तिलकुट 250 रुपये ओर चीनी का तिलकुट 200 से 220 रुपये प्रति किलो रुपये बिक रहा है. वहीं खोवा का तिलकुट 300 से 280 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है. इसे भी पढ़ें– धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-baghmara-bjp-mla-dhullu-mahato-surrenders-in-court-sent-to-jail/">धनबाद

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मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य होते हैं उत्तरायण

मकर संक्रांति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पंडित बरुन पांडेय ने बताया कि भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के बाद खरमास का भी समापन होगा और मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएगा. शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात के तौर पर माना जाता है. इस दिन तिल का दान करने का अत्यधिक महत्व है. 14 जनवरी शाम को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. [wpse_comments_template]

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