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कोल्हान जंगल : जनमिलिशिया टीम के कंधे पर है आइईडी विस्फोट की जिम्मेदारी, ग्रामीणों को ऐसे गुमराह करते हैं नक्सली

Kiriburu (Shailesh Singh) : पश्चिम सिंहभूम जिला के नक्सल प्रभावित कोल्हान जंगल में पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों को आइईडी विस्फोट कर नुकसान पहुंचाने का कार्य भाकपा माओवादी के जनमिलिशिया दल के सदस्य कर रहे हैं. जबकि पुलिस पर घात लगाकर हमला करने की जिम्मेदारी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के हथियारबंद नक्सलियों ने संभाल रखी है. उल्लेखनीय है कि भाकपा माओवादी संगठन में अनेक विंग हैं- जैसे पीएलजीए, एसआरजीएस (सीनियर रेगुलर गुरिल्ला स्क्वाड ), एलआरजीएस (लोकल रेगुलर गुरिल्ला स्क्वाड ), जनमिलिशिया, नारी मुक्ति संघ (एनएमएस), क्रांतिकारी किसान कमिटी (केकेसी) आदि. सभी का कार्य अलग-अलग है. पीएलजीए का इस्तेमाल पुलिस पर या अन्य बडे़ हमला व घटना को अंजाम देने हेतु किया जाता है. जबकि छोटे स्तर के हमलों के लिये एसआरजीएस अथवा एलआरजीएस का इस्तेमाल किया जाता है. भाकपा माओवादी के बडे़ नक्सली अथवा पीएलजीए के हथियारबंद नक्सली जहां रहते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एसआरजीएसएलआरजीएस नक्सलियों के पास होती है. यह भी हथियारबंद नक्सली दस्ता होता है, जो छोटे ग्रुप में होकर पीएलजीए का बाहरी सुरक्षा घेरा बनाकर रहता है.

आइईडी विस्फोट कर घने जंगलों में छिप जाते हैं

जनमिलिशिया दस्ते में शामिल नक्सलियों का मुख्य काम जंगल में पुलिस के आने-जाने वाले मार्गों व संभावित रास्ते में आइईडी लगाना, पुलिस को नुकसान पहुंचाने हेतु लगाये गये आइईडी को विस्फोट करना शामिल है. जनमिलिशिया के लोगों को लैंड माइन अथवा आइईडी तैयार करने से लेकर विस्फोट की पूरा प्रशिक्षण दिया गया होता है. यह एक-दो की संख्या में सादे ड्रेस में और बिना हथियार के आम ग्रामीण की वेष में घूमते रहते हैं. पुलिस को अपने सुरक्षित जोन में आते देख कर वह अकेले या कुछ साथियों की मदद से आइईडी विस्फोट कर घने जंगलों में छिप जाते हैं. भाकपा माओवादी की इकाई केकेसी, ग्रामीणों की खेती-बाड़ी से लेकर किसानों की आर्थिक व शारीरिक जरूरी मदद करता है. जबकि एनएमएस भी ग्रामीण महिलाओं की मदद व सहयोग हर प्रकार से करती है. दोनों इसलिये सहयोग करते हैं कि वह ग्रामीणों व किसानों का समर्थन व विश्वास अपनी पार्टी संगठन के प्रति बढ़ा सके.

आज सारंडा शांत व पड़ोसी जंगल कोल्हान पूरी तरह से अशांत

वर्ष 2001 में नक्सलियों को सारंडा के एनक्रोचमेंट गांवों (अवैध तरीके से जंगल काट कर बसाये गांव) के लोगों ने वन विभाग की कार्यवाही से मुक्ति हेतु बुलाया था. लेकिन सारंडा में आने के बाद एक तरफ नक्सली क्षेत्र की खदानों, क्रशरों, बीड़ी पत्ता, लकड़ी तस्करी, विकास योजनाओं से जुड़े कार्यों से निरंतर भारी लेवी उठाकर शक्तिशाली होते रहे. दूसरी तरफ सारंडा के लोगों को यह कहकर गुमराह करते रहे कि केंद्र व राज्य सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं कॉरपोरेट घरानों के साथ कई एमओयू पर हस्ताक्षर किये हैं. वह सारंडा की खनिज संपदा को कॉरपोरेट घरानों को देकर सारंडा को स्पेशल इकोनोमी जोन (सेज) बना देगी. इससे आपका जल, जंगल, जमीन सब कुछ छीन लिया जायेगा. इसका विरोध हम माओवादियों के साथ आप करें. हम मिलकर इस स्पेशल इकोनोमी अर्थात विशेष आर्थिक जोन (सेज) के बदले विशेष जन विकास जोन या कृषि जोन की स्थापना करेंगे. जिसमें से यहां की सारी संपदा का मालिक जनता और केवल यहां की जनता होगी. सारंडा के लोगों को जब यह समझ में आया कि वह ऐसे नक्सल आंदोलन का साथ देकर न तो सारंडा की संपदाओं का मालिक बन रहे हैं, न सारंडा में विकास की किरण पहुंच रही है, न आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि पुलिस व सरकार के दुश्मन बनकर भागे-भागे फिर रहे हैं. घर-परिवार भी छूट गया. अनेक मामले दर्ज होते जा रहे हैं. इसके बाद सारंडा के लोगों ने नक्सलियों का साथ छोड़ना प्रारंभ किया. आज सारंडा शांत एवं पड़ोसी जंगल कोल्हान पूरी तरह से अशांत है. इसे भी पढ़ें – शुभम">https://lagatar.in/shubham-sandesh-impact-bbmku-vice-chancellor-dr-shukdev-bhoi-dismissed/">शुभम

संदेश इंपैक्ट : बीबीएमकेयू के कुलपति डॉ. शुकदेव भोई बर्खास्त
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