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कोल्हान विश्वविद्यालय : थर्ड ग्रेड कर्मचारियों की भारी कमी, पठन-पाठन पर असर

ANAND MISHRA Jamshedpur  : कोल्हान विश्वविद्यालय एवं इसके अधिनस्थ अंगीभूत कालेजों में साल-दर-साल छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन शिक्षकेतर कर्मचारियों की संख्या दिनों दिन घटती जा रही है. इससे विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों में कामकाज प्रभावित हो रहा है. साथ ही शिक्षक शिक्षिकाओं को गैर शैक्षणिक कार्य भी करने पड़ रहे हैं. फलस्वरूप कॉलेजों में पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है. ऐसे में नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने को लेकर विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि तृतीय वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. वहीं चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बहाली आउटसोर्सिंग से होनी है, अतः इसके लिए फंड की आवश्यकता है. एजेंसी के लिए आगामी छह जून के बाद निविदा आमंत्रित की जायेगी.

थर्ड ग्रेड कर्मचारियों की संख्या मुट्ठी भर

विश्वविद्यालय में तृतीय वर्गीय कर्मचारियों के स्वीकृत पदों की संख्या सैकड़ों में है. जबकि कार्यरत कर्मचारियों की संख्या महज दो अंकों में सिमट कर रह गई है. पैसे में विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों में गैर शैक्षणिक कार्य भगवान भरोसे ही चल रहे हैं. गिनती भर शिक्षकेतर कर्मचारी यथासंभव कार्यों का निपटारा करते हैं. यहां तक कि शिक्षकों को भी कई गैर शैक्षणिक कार्य निपटाने पड़ते हैं. इसके अलावा कई कॉलेजों में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी तृतीय वर्गीय कर्मचारियों का कामकाज देख रहे हैं. सरकार से बार-बार मांग करने के बावजूद अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सका है. हालांकि विश्वविद्यालय की ओर से स्वीकृत पदों पर तृतीय वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है.

फंड के अभाव में नहीं हो रही फोर्थ ग्रेड में बहाली

तृतीय वर्गीय कर्मचारियों की ही तरह चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के भी स्वीकृत पदों की संख्या सैकड़ों में है, लेकिन कार्यरत कर्मचारियों की संख्या दो अंकों में है. हालांकि चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बहाली अब एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्सिंग के आधार पर की जानी है, इसके लिए निविदा आमंत्रित की जानी है. कर्मचारियों की कमी की वजह से विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भी बहाली नहीं हो पा रही है. इस वजह से चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों का कामकाज भी विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों में जैसे तैसे ही चल रहा है.

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