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क्या है मामला
डॉ अशोक कुमार झा 1996 बैच के शिक्षक हैं. तब लेक्चरर के पद पर उनकी नियुक्ति हुई थी. उस समय उनके पास पीएचडी की उपाधि नहीं थी. नियुक्ति और योगदान के बाद एक ओरिएंटेशन कोर्स और एक रिफ्रेशर कोर्स डॉ झा ने किया. इसके आधार पर उन्हें सेवा में आने के छह वर्ष बाद वर्ष 2002 में सीनियर स्केल में प्रोन्नति मिली. यहां तक सबकुछ ठीक था. लेकिन उसके बाद पांच साल के अंतराल पर वर्ष 2007 में उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति मिली, उसे लेकर सवाल खड़े हो गये. क्योंकि उसमें एक ओरिएंटेशन कोर्स के अलावा तीन की जगह दो ही रिफ्रेशर कोर्स दिखाये गये थे. इस पर जेपीएससी की ओर से जांच करवायी गयी थी. डॉ झा और कोल्हान विश्वविद्यालय से प्रोन्नति को लेकर जेपीएससी की ओर से सवाल भी पूछे गये थे. जेपीएससी के सवाल का कोल्हान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से क्या उत्तर दिया गया. विश्वविद्यालय के अधिकारी यह बताने से भी कतरा रहे हैं. इसे भी पढ़ें : 9">https://lagatar.in/hemant-soren-cabinet-meeting-will-be-held-on-february-9/">9फरवरी को होगी हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक
क्या है नियम
जानकार बताते हैं कि आरंभिक सेवा के पांच साल पूरे करने पर सीनियर स्केल में प्रोन्नति मिलती है. इसके लिए एक ओरिएंटेशन और एक रिफ्रेशर कोर्स करना अनिवार्य है. उसके बाद एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति के लिए सीनियर स्केल में प्रोन्नति के पश्चात दो रिफ्रेशर कोर्स होना अनिवार्य है. तभी एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति मिल सकती है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-collision-between-bike-and-scooty-near-rapcha-village-of-gamharia-police-station-injured-scooty-rider-mgm-refer/">आदित्यपुर: गम्हरिया थाना के रापचा गांव के समीप बाइक और स्कूटी में टक्कर, घायल स्कूटी सवार एमजीएम रेफर
क्या कहते हैं विश्वविद्यालय के अधिकारी
- कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गंगाधर पांडा ने कहा कि यह मामला मेरे समय का नहीं है. रांची विश्वविद्यालय के समय का रहा है. इस पर कुछ कागजात मांगे गये थे, जिसे विश्वविद्यालय भेज चुका है.
- विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ जयंत शेखर ने कहा कि इस मामले में शिकायत मिली थी, जिस पर पूछताछ की गयी थी. मामला जेपीएससी में गया था, लेकिन क्या हुआ, यह जानकारी नहीं है.

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