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जातिगत कसौटी पर कोयलांचल का तपना तय, 17 में 13 बार रहा है सवर्ण जाति का कब्जा

  • - धनबाद में ढुल्लू की राह आसान नहीं, विवादित होने के कारण किसी बड़े जंग से कम नहीं है ढुल्लू यह चुनाव
  • -धनबाद की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर है भाजपा का कब्जा, यह सीट पार्टी और ढुल्लू के लिए है प्रतिष्ठा प्रश्न
  • -कांग्रेस सवर्ण प्रत्याशी उतारने की तैयारी में, एसा हुआ तो होगी जबरदस्त जातिगत गोलबंदी
  • -जातिगत गोलबंदी हुई, तो मोदी मैजिक के सहारे ही ढुल्लू पार कर सकेंगे चुनावी वैतरणी
Kaushal Anand  Ranchi  :   भाजपा ने सवर्ण जाति के पशुपतिनाथ सिंह का टिकट काटकर ओबीसी कोटे से बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो को चुनावी मैदान में उतारा है. लेकिन धनबाद में अब तक हुए चुनाव और उसके परिणाम पर नजर डालें, तो इस सीट के लिए किसी गैर सवर्ण के लिए राह उतनी आसान नहीं नजर आती है. धनबाद में अब तक 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से 13 बार सवर्ण जाति के प्रत्याशी ही विजयी रहे हैं. ऊपर से ढुल्लू महतो पर लगे दाग, लगभग 50 मुकदमे उनके खिलाफ जाते दिख रहे हैं. ढुल्लू महतो को जब से टिकट मिला है, उन्हें चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है. खुद संगठन के ही लोगों का उनको खुले मन से साथ मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में उनके लिए लोकसभा का चुनावी सफर उतना आसान नजर नहीं आता, जितना आसान ढुल्लू समझ रहे हैं. कुल मिलाकर उनके लिए मोदी मैजिक ही सहारा बचता दिख रहा है. हालांकि अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है. लेकिन कांग्रेस खेमे से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार उसका प्रत्याशी कोई सवर्ण ही होगा. वैसे जब तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं हो जाती, तबतक कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी.

सात बार भाजपा और छह बार रहा है कांग्रेस का कब्जा

तीन बार मासस और एक बार निर्दलीय ने मारी है बाजी धनबाद में आजादी के बाद 1952 से चुनाव होना शुरू हुआ. 2019 तक 17 बार लोकसभा चुनाव हुए. जिसमें सात बार भाजपा, 6 बार कांग्रेस, तीन बार मार्क्सवादी समन्वय समिति और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे हैं. कुल 17 चुनाव में 15 बार अपर कास्ट के ही प्रत्याशी विजयी रहे हैं. जबकि चार बार ओबीसी को जीत मिली है.

धनबाद में कुल छह विधानसभा में पांच पर भाजपा का कब्जा

धनबाद लोकसभा सीट में कुल छह विधानसभा सीटें धनबाद, बोकारो, सिंदरी, झरिया, चंदनक्यारी और निरसा हैं. छह विधानसभा में झरिया को छोड़कर बाकी शेष सीटों पर भाजपा का कब्जा है. धनबाद से राज सिन्हा, बोकारो से बिरंची नारायण, सिंदरी से इंद्रजीत महतो, निरसा से अपर्णा सेनगुप्ता, चंदनक्यारी से अमर कुमार बाउरी भाजपा विधायक हैं. केवल एक सीट झरिया से कांग्रेस की पूर्णिमा नीरज सिंह विधायक हैं. ऐसे में यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है.

1952 से लेकर अब तक कौन रहा विजयी

  • - 1952 : पीसी बोस : कांग्रेस
  • - 1957 : पीसी बोस: कांग्रेस
  • - 1962 : पीआर चक्रवर्ती : कांग्रेस
  • - 1967 : रानी ललिता राज्यलक्ष्मी : निर्दलीय
  • - 1971 : राम नारायण शर्मा:कांग्रेस
  • - 1977 : एके रॉय: मार्क्सवादी समन्वय समिति
  • - 1980 : एके रॉय: मार्क्सवादी समन्वय समिति
  • - 1984 : शंकर दयाल सिंह :कांग्रेस
  • - 1989 : एके रॉय:भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
  • - 1991 : रीता वर्मा:भाजपा
  • - 1996 : रीता वर्मा: भाजपा
  • - 1998 : रीता वर्मा : भाजपा
  • - 1999 : रीता वर्मा : भाजपा
  • - 2004 : चंद्रशेखर दुबे : कांग्रेस
  • - 2009 : पशुपति नाथ सिंह: भाजपा
  • - 2014 : पशुपति नाथ सिंह: भाजपा
  • - 2019 : पशुपति नाथ सिंह : भाजपा

2014 में कौन रहा विजेता और उपविजेता

विजेता : पशुपतिनाथ सिंह (भाजपा) वोट मिले : 5,43,491 वोट प्रतिशत : 47.51 उपविजेता : अजय कुमार दुबे (कांग्रेस) वोट मिले : 2,50,537 वोट प्रतिशत : 21.90 अंतर : 2,92,954

2019 में कौन रहा विजेता औ रउपविजेता, कितने वोट मिले

विजेता : पशुपति नाथ सिंह (भाजपा) वोट मिले : 8,27,234 वोट प्रतिशत : 66.03 उपविजेता : कीर्ति आजाद (कांग्रेस) वोट मिले : 3,41,040 वोट प्रतिशत : 27.22 अंतर : 4,86,194

धनबाद में किस जाति के कितने मतदाता

गत लोकसभा चुनाव की एनडीआर रिपोर्ट के अनुसार,  धनबाद में कुल मतदाताओं की संख्या : करीब 22 लाख पुरुष : 12,32,038 महिला : 9,57,981 एसटी : तीन लाख करीब एससी : दो लाख करीब मुस्लिम : तीन लाख करीब ओबीसी-वैश्य : 5 लाख करीब ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ : 5 लाख करीब राजपूत : 2 लाख के करीब कुरमी एवं अन्य जाति : करीब 2 लाख नोट : यह गत लोकसभा चुनाव 2019 के वोटरों की संख्या के आधार पर अनुमानित है. इस चुनाव में नये मतदाता पुनरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार 5-10 प्रतिशत अनुमानित इजाफे की उम्मीद है. [wpse_comments_template]

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