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हजारीबाग के कुमार रविश बता रहे हैं कैसे ठीक हुए कोरोना से

Kumar Ravish

कोरोना पॉजिटिव से निगेटिव होने तक की आप बीती अनुभव साझा कर रहा हूं. दिनांक 3 अप्रैल को गले में समस्या उत्पन्न हुआ. मैंने स्वयं को आइसोलेट किया. 4 अप्रैल को समस्या ज्यादा बढ़ गई. बुखार नहीं आया मगर बुखार जैसा अनुभव हुआ. तब मैंने RT-PCR टेस्ट सैंपल दिया. रिपोर्ट आने में देरी के कारण मैंने रैपिड एंटीजेन टेस्ट करवाया. जिसमें मैं पॉजिटिव पाया गया. तब मैंने कोरोना हेतु दिया जाने वाला दवा चिकित्सक के सलाह पर शुरू किया.

 मैं ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का मरीज हूं और मेरा ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर 10 अप्रैल तक काफी बढ़ गया. जिस कारण मुझे आरोग्यम हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा. जहां से मैं 16 अप्रैल को डिस्चार्ज हुआ. 14 दिनों का दवा दिया गया और 14 दिन आइसोलेट रहने का सलाह दिया गया.

इस दौरान मैं शुरू के 5 दिन, जिसमें दो दिन घर पर और तीन दिन हॉस्पिटल में बुखार, गला सुखना और खांसी से परेशान रहा. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को हॉस्पिटल में कंट्रोल किया गया.

बुखार, गला सुखना और खांसी के दौरान बहुत ज्यादा बेचैनी का अनुभव होता था. ऐसा पांच दिनों तक रहा. छठे दिन से ये समस्या दूर हुआ. 16 अप्रैल को डिस्चार्ज होने के बाद मैंने 20 अप्रैल को रैपिड टेस्ट करवाया. जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आयी. साथ ही मैंने RT-PCR टेस्ट सैंपल दिया. इसकी रिपोर्ट भी नेगेटिव आयी. साथ ही 28 अप्रैल को मैंने रेपिड टेस्ट करवाया. जिसमें मैं निगेटिव आया.

29 अप्रैल को मैंने डॉक्टर रजत चक्रवर्ती, डॉक्टर इंद्रजीत सिन्हा एवं डॉक्टर सुजोय सामंता से उनके हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सलाह लिया और उनके मुताबिक मैं अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ रह सकता हूं. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का अभी घर पर ही नियमित मॉनिटर करते रहने का सलाह दिया गया है. घर से बाहर जाने की सलाह अभी नहीं है.

डिस्क्लेमरः कुमार रविश जन शिक्षण संस्थान, हजारीबाग के डाइरेक्टर हैं. यह लेख उनके फेसबुक वॉल पर प्रकाशित हो चुका हैं

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