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आदिवासी बनने के लिए कुरमी समाज बड़ी कुर्बानी देने को तैयार !

Ranchi: झारखंड गोत्रधारी कुड़मी/कुरमी ने एसटी सूची में शामिल होने के लिए बड़ी कुर्बानी देने का एलान कर दिया है. घोषणा किया है कि वे मूर्ति पूजा से तौबा कर लेंगे, क्योंकि यह कुरमी समाज का हिस्सा नहीं है. यह घोषणा मंगलवार को जमशेदपुर में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में की गई.  इस मौके पर मंच के दिलीप कुमार महतो, राजकिशोर महतो, नरेश महतो, शरत महतो, अनिल महतो सहित कई मौजूद थे. इसे भी पढ़ें-धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-ecl-produces-23-8-million-tonnes-of-coal-by-december-2022/">धनबाद

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इन्होंने कहा कि कला मंच टुसू पर्व में मूर्ति पूजा नहीं करेगा. कुरमी समाज से टुसू पर्व में मूर्ति नहीं लगाने की अपील की है. इन्होंने कहा कि टुसू का नाम आते ही हमारे जहन में मूर्ति पूजा आती है. लेकिन आदिवासी समाज में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है. टुसू में मूर्ति पूजा अन्य संस्कृति के संपर्क में आने से हुआ है.

क्या कहते हैं अन्य कुरमी जानकार

कुरमाली भाषा परिषद के अध्यक्ष राजाराम महतो ने कहा कि पता नहीं किसने यह घोषणा और अपील की है. मगर टुसू में मूर्ति पूजा या मूर्ति का इस्तेमाल तो होता ही नहीं है. कुरमी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि जिन लोगों ने यह अपील की है, उन्हें पता नहीं है. टुसू में चौड़न का इस्तेमाल होता है. महिलाएं चौड़न लेकर माथे पर निकलती हैं. इसलिए इस अपील या घोषणा का कोई औचित्य नहीं है. इसे भी पढ़ें-झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-cabinets-decision-jharkhand-combined-entrance-competitive-board-is-responsible-for-determining-entrance-and-fees-in-b-ed-colleges/">झारखंड

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