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कुरमी समाज का रेल रोको आंदोलन असरदार, विधायक लंबोदर महतो गिरफ्तार

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  • -झारखंड के चार रेलवे स्टेशन दिन भर रही बाधित, सरायकेला में पुलिस पर पथराव
  • -मुख्य सचिव से वार्ता के आश्वासन के बाद कुड़मी मोर्चा ने आंदोलन वापस लिया
  • 25 सितंबर को मुख्यसचिव और 2 अक्टूबर को गृह सचिव, भारत सरकार से मिलेगा कुड़मी समाज
Ranchi: एसटी सूची में शामिल करने और कुरमाली भाषा को आंठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर कुरमी/कुड़मी समाज का रेल रोको आंदोलन के दूसरे चरण का पहला दिन झारखंड और उड़ीसा में व्यापक असर देखने को मिला. झारखंड के चार रेलवे स्टेशन सुबह से ही पूरी तरह से बाधित रहे. आंदोलन को साथ दे रहे गोमिया विधायक लंबोदर महतो को सिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है. पुलिस ने उन्हें मुरी जंक्शन से हिरासत में लिया, उन्हें सिल्ली थाना में रखा गया है. [caption id="attachment_763430" align="alignnone" width="1080"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/09/2-64.jpg"

alt="" width="1080" height="474" /> रेलवे ट्रैक जाम कर विरोध जताते कुरमी समाज के लोग[/caption] वहीं सरायकेला-खरसावां जिले में कुड़मी आंदोलनकारी नीमडीह स्टेशन के अंदर जाने की जिद पर अड़ गए. तभी अचानक आंदोलनकारी उग्र हो गए और वे पुलिस का घेरा तोड़ कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे. पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंदोलनकारी पर लाठी चार्ज कर दिया. इससे वहां भगदड़ मच गई. पुलिस की लाठी चार्ज करने के बाद आंदोलनकारियों ने भी पुलिस पर जमकर पथराव शुरू कर दिया. इससे माहौल गर्म हो गया है, लाठीचार्ज और पथराव में पुलिस और आंदोलनकारी दोनों तरफ से कई लोग घायल हो गए. बाद में घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया. जानकारी के अनुसार, रेल रोको आंदोलन का असर उड़ीसा में भी देखने को मिला. उड़ीसा में कुरमी बहुल क्षेत्रों में आंदोलनकारी रेल मार्ग के साथ-साथ सड़क मार्ग को भी प्रभावित किया. करीब 10 घंटे से अधिक ये दोनों मार्ग आंदोलनकारियों के कब्जे में रहा.

झारखंड के चार रेलवे स्टेशन देर शाम तक रहे बाधित

जानकारी के अनुसार, झारखंड के चार रेलवे स्टेशन जिनमें मुरी, गोमो, नीमडीह और पश्चिम सिंहभूम के घाघरा-मनोहरपुर रेलवे स्टेशन सुबह से लेकर देर शाम तक बाधित रहा. कुरमी मोर्चा के हजारों कार्यकर्ता रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गए. कुरमी समाज के लोग हजारों की संख्या में अपने पारंपरिक वेशभूषा, छऊ नाच, पाता नाच, नटुवा नाच, घोड़ा नाच एवं झूमर नाच, ढोल-नगाड़ों एवं गाजे-बाजे के साथ शामिल हुए. जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से जल्द से जल्द कुरमी को एसटी सूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे.

मुख्य सचिव से वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित करने का निर्णय

मुख्य सचिव से वार्ता के आश्वसान के बाद कुरमी समाज ने अपने आंदोलन को स्थगित करने का एलान किया है. कुरमी विकास मोर्चा के प्रवक्ता ओम प्रकाश महतो ने बताया कि समाज के लोगों को आश्वासन मिला है कि 25 सितंबर को झारखंड के मुख्य सचिव के साथ वार्ता होगी. इस अश्वासन के बाद मोर्चा की ओर से और धनबाद इकाई की ओर से आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है.

लोस चुनाव के पहले एसटी सूची में शामिल नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम

झारखंड कुरमी/कुड़मी मोर्चा केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार यह समझे कि हम झूक गए हैं, टूट गए हैं. केंद्र सरकार को हर हाल में कुरमी को एसटी सूची में शामिल करना ही होगा. नहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. 2004 में ही राज्य के तत्कालीन सीएम रहे और वर्तमान में केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था. मगर बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. केंद्रीय मंत्री होने के नाते अर्जुन मुंडा को इसमें पहल करने की जरूरत थी. मगर वह चुप्पी साध गए हैं. इसलिए अगर लोकसभा चुनाव के पहले एसटी सूची में शामिल नहीं किया गया तो इसका खमियाजा राजनीतिक दलों खासकर भाजपा को भुगतना पड़ेगा. [wpse_comments_template]

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