Ranchi : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने RIMS के लिए अधिगृहित जमीन की खरीद बिक्री के मामले में ECIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. ED ने ECIR दर्ज करने के लिए ACB द्वारा दर्ज की गयी प्राथमिकी को आधार बनाया है. ACB ने इस मामले की जांच के दौरान अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है.
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज ECIR (प्राथमिकी) में राजस्व के काम से जुड़े अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद मानी गयी है. इसमें अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारी शामिल है. इसके अलावा RIMS के लिए अधिगृहित जमीन पर फ्लैट बनाने वाले बिल्डर सहित Jharkhand Real Estate Regulatory Authority (JHARERA), Ranchi Municipal Corporation (RMC) के अधिकारियों की भूमिका को संदेहास्पद माना गया है. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ECIR दर्ज करने के बाद संदेहास्पद भूमिका वाले अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है.
उल्लेखनीय है कि ACB ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रिम्स की जमीन की अवैध खरीद बिक्री के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है. इसमें राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश कुमार झा और चेतन कुमार का नाम शामिल है. ACB ने राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक पर जालसाजी कर फर्जी वंशावली (Genealogy) बना कर जमीन को अपना बताने का आरोप लगाया है. इन दोनों ने फर्जी वंशावली बनाने क बाद रिम्स की अधिगृहित जमीन को बेचने के लिए चेतन कुमार को पावर ऑफ ऑटर्नी (Power of Attorney) दिया. राजेश कमार झा ने जमीन बिल्डर से बेचवाया. ACB ने जांच से संबंधित सील बंद रिपोर्ट भी हाईकोर्ट को सौंपी है.
गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान ACB को रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन की खरीद बिक्री के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच का आदेश दिया था. न्यायालय ने सरकार को रिम्स की जमीन की अवैध खरीद बिक्री की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू करने का आदेश दिया था.
न्यायालय द्वारा रिम्स की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया गया था. इसके बाद जिला प्रशासन ने रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन पर बने बहुमंजिली इमारत को ध्वस्त कर दिया था. इससे इस आवासीय भवन में फ्लैट खरीदने वाले बेघर हो गये और उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ. न्यायालय ने घर खरीदने वाले आम लोगों को हुए नुकसान की भरपाई इस पूरे प्रकरण में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों से वसूल कर करने का निर्देश दिया है.
न्यायालय ने JHALSA के सदस्य सचिव रंजना अस्थाना को रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण की जांच का आदेश दिया था. उन्होंने इसकी जांच कर हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें कहा गया था कि रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन मौजा मोरहाबादी, मौजा कोकर, मौजा बरियातु और मौजा तिरिल में है. रिम्स की मोरहाबादी मौजा की जमीन में से आठ एकड़ और कोकर मौजा की जमीन पर 1.65 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है. बरियातु और तिरिल मौजा की जमीन पर अतिक्रमण नहीं है.
रिपोर्ट में रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण कर मंदिर, दुकान, भवन, स्कूल, सरना स्थल, पार्क, आवासीय भवन सहित अन्य प्रकार का निर्माण किये जाने का उल्लेख किया गया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि अतिक्रमण के इस मामले में रिम्स प्रबंधन के प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी ना ही जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के इस मामले को गंभीरता से लिया और कई कार्रवाई की.

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