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Lagatar exclusive: कानून की पाठशाला का आदेश झारखंड पुलिस ने भुलाया, 6 जिलों को छोड़ किसी ने नहीं भेजी रिपोर्ट

Ranchi News :   अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से 20 अगस्त 2026 को जारी पत्र में पूर्व में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. पूर्व के निर्देश के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में तीन महीने के भीतर कम से कम तीन विद्यालयों का दौरा कर छात्रों को न्याय संहिता से जुड़े प्रावधानों और उसके उद्देश्यों की जानकारी देने को कहा गया था.
 
  • मानवाधिकार शाखा को दोबारा भेजना पड़ा पत्र
  • हर थाना क्षेत्र के तीन स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम कराने का था निर्देश

Ranchi News :  झारखंड पुलिस मुख्यालय के आदेशों के अनुपालन की तस्वीर एक बार फिर सवालों के घेरे में है. नये आपराधिक कानूनों को लेकर स्कूली छात्रों के बीच जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकतर जिलों ने इसका अनुपालन प्रतिवेदन तक नहीं भेजा. रांची, खूंटी, कोडरमा, हजारीबाग, सिमडेगा और जामताड़ा को छोड़कर किसी अन्य जिले से अब तक रिपोर्ट नहीं भेजी गई है. स्थिति यह है कि संबंधित जिलों से रिपोर्ट लेने के लिए मानवाधिकार शाखा को दोबारा पत्र जारी करना पड़ा है.

 

अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से 20 अगस्त 2026 को जारी पत्र में पूर्व में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. पूर्व के निर्देश के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में तीन महीने के भीतर कम से कम तीन विद्यालयों का दौरा कर छात्रों को न्याय संहिता से जुड़े प्रावधानों और उसके उद्देश्यों की जानकारी देने को कहा गया था.

 

इसके तहत स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम के अलावा क्विज, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद और अन्य संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की जानी थीं. इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच नए आपराधिक कानूनों को लेकर जागरूकता बढ़ाना था.

 

छह जिलों ने भेजी रिपोर्ट, बाकी जिलों में आदेश का क्या हुआ?

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बावजूद छह जिलों को छोड़कर किसी अन्य जिले से अनुपालन प्रतिवेदन नहीं मिला है. इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि बाकी जिलों में निर्देश के मुताबिक स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित हुए भी या नहीं. अगर कार्यक्रम हुए तो उनकी रिपोर्ट मुख्यालय तक क्यों नहीं पहुंची और अगर कार्यक्रम नहीं हुए तो तीन महीने तक इसकी निगरानी किस स्तर पर की गई.

 

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस मुख्यालय नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और आम लोगों को इनके प्रावधानों की जानकारी देने पर लगातार जोर देता रहा है. ऐसे में जागरूकता अभियान की प्रगति रिपोर्ट तक नहीं आना पुलिस की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.

 

मानवाधिकार शाखा को दोबारा मांगनी पड़ी रिपोर्ट

पूर्व में निर्देश जारी होने के बावजूद अधिकांश जिलों से अनुपालन प्रतिवेदन नहीं मिलने के बाद मानवाधिकार शाखा की ओर से दोबारा पत्र भेजा गया है. इसमें संबंधित पुलिस अधिकारियों को दो दिनों के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि इसकी जानकारी पुलिस मुख्यालय को दी जा सके.

 

आदेश जारी करने के बाद निगरानी कौन करेगा

हर थाना क्षेत्र में तीन महीने के भीतर कम से कम तीन स्कूलों में कार्यक्रम कराने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया था. इसके बावजूद अधिकांश जिलों से रिपोर्ट नहीं आना बताता है कि आदेशों के अनुपालन की निगरानी कितनी गंभीरता से की जा रही है.

 

सवाल यह भी है कि रांची, खूंटी, कोडरमा, हजारीबाग, सिमडेगा और जामताड़ा को छोड़कर बाकी जिलों ने रिपोर्ट भेजना जरूरी क्यों नहीं समझा. क्या वहां कार्यक्रम नहीं हुए या फिर अधिकारियों ने कार्यक्रम होने के बावजूद अनुपालन रिपोर्ट भेजने की जरूरत नहीं समझी.

 

पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद भी अधिकांश जिलों से रिपोर्ट नहीं आना और फिर मानवाधिकार शाखा को दोबारा पत्र जारी करना पड़ना साफ तौर पर बताता है कि आदेश जारी करने और उसके अनुपालन की निगरानी के बीच बड़ा अंतर है. नए कानूनों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी वाली पुलिस अपने ही अभियान की रिपोर्ट जिलों से नहीं जुटा पा रही है.

 

 

 

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