- लोहरदगा के ग्रामीणों ने डीएमओ के खिलाफ सरकार को लिखा पत्र
Ranchi : रांची में रातों-रात करीब 90 हजार घनफीट बालू गायब कराने के आरोपों में घिरे डीएमओ अबू हुसैन को विभाग ने लोहरदगा का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है. अब लोहरदगा में भी डीएमओ की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
स्थानीय लोगों, ट्रक मालिकों और बॉक्साइट कारोबार से जुड़े लोगों का आरोप है कि डीएमओ की मनमानी के कारण पूरा सिस्टम प्रभावित हो गया है.

सूत्रों के अनुसार जिस बालू को लेकर रांची में विवाद उठा, उसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है. मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर शो-कॉज भी जारी हुआ,
लेकिन इसके बावजूद आबू हुसैन को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर लोहरदगा डीएमओ का प्रभार सौंप दिया गया. अब इस फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं.
लोहरदगा में हेसल साइडिंग बंद रहने से हालात और गंभीर हो गए हैं. बताया जा रहा है कि बॉक्साइट ढुलाई पूरी तरह प्रभावित है, जिससे करीब 50 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है.
वहीं 1000 से अधिक ट्रक कई दिनों से खड़े हैं. ट्रक मालिक, चालक, मजदूर और स्थानीय कारोबारी लगातार नुकसान झेल रहे हैं.
मामले को लेकर एसोसिएशन और स्थानीय लोगों ने सरकार, राज्यपाल और उपायुक्त को पत्र लिखकर डीएमओ की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.
लोगों का कहना है कि जब तक डीएमओ स्तर से अप्रूवल नहीं मिलता, तब तक काम शुरू नहीं हो पा रहा है. इधर हिंडाल्को से जुड़े अधिकारियों का भी कहना है कि डीएमओ की अनुमति के बिना साइडिंग चालू नहीं की जा सकती.
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर बार-बार विवादों में आने वाले अधिकारी को ही अतिरिक्त प्रभार क्यों दिया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि लोहरदगा में भी कई कार्य प्रभावित हैं और विभागीय स्तर पर मनमानी का माहौल बना हुआ है.
अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस अधिकारी पर पहले से गंभीर आरोप लगे हों, क्या उसे दो-दो जिलों की जिम्मेदारी देना उचित है? पूरे मामले को लेकर विभाग और सरकार की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं.
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