- अनुप माजी उर्फ लाला ने ECL के खादानों से की हजारों करोड़ रुपये का का अवैध कोयला खनन.
- 2015 से 2020 के दौरान बंगाल और झारखंड के कोयला कारोबारियों का साम्राज्य तेजी से बढ़ा.
Ranchi: ECL के लीज क्षेत्र में अवैध कोयला खनन करने वाला अनुप माजी उर्फ लाला का कारोबार भी कोयला कंपनियों की तरह चलता था. उसके सिंडिकेट में मशीनों के सहारे अवैध खनन करने वाले कर्मचारी, ढुलाई पर नजर रखने के लिए उड़न दस्ता, हिसाब किताब रखने के लिए चार्रटर्ड आकाउंटेंट और बिक्री के बढ़ावा देने के लिए एजेंट भी नियुक्त थे. लाला जहां पर अवैध खनन खनन करता था, वह क्षेत्र ECL के आसपास ही थी. ED द्वारा की गयी जांच के दौरान इन तथ्यों की पुष्टि हुई है.
लाला के सिंडिकेट का ही असर था कि वर्ष 2015 से 2020 के दौरान पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ कोयला कारोबारियों का साम्राज्य और आर्थिक हैसियत तेजी से बढ़ा. इस दौरान झारखंड में भाजपा की रघुवर दास की सरकार थी.
ईडी जांच के दौरान लाला के कार्यालय से मिले दस्तावेज से इस बात की जानकारी मिली है कि वह ECL के लीज क्षेत्र के अलावा लीज क्षेत्र से बाहर भी अवैध खनन करता था. उसके ठिकानों से मिले दस्तावेज से इस बात की जानकारी मिली है कि उसने एक साल में अवैध खनन कर 52.01 MT कोयला निकाला. लाला द्वारा निकाया गया कोयला ECL के उत्पादन के आस पास ही है. ECL भी सालाना उत्पादन भी इसी के आस पास है.
ECL के तत्कालीन चीफ मैनेजर तनमय दास, सुरक्षा प्रभारी देवाशीष मुखर्जी, सिक्यूरिटी इंचार्ज सुशांत बनर्जी, तत्कालीन जेनरल मैनेजर, जेनरल मैनेजर सुभाष मुखोपाध्याय, सहित ECL के अन्य अधिकारी निजी स्वार्थ के लिए लाला की मदद करते थे और सुरक्षा भी देते थे. लाला को मदद करने और सुरक्षा देने वाले इन अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही चल रही है.
लाला ने अपने कारोबार को सही तरीके से चलाने और व्यापारिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोलकाता में अपने कार्यालय का मुख्यालय खोल रखा था. इसके अलावा आसनसोल, रानीगंज, चिताडांगा, बनसारा, रौनिया, कुल्टी, रघुनाथपुर सहित अन्य स्थानों पर अपना ब्रांच ऑफिस खोल रखा था. हर कार्यालय में लाला के खास आदमी नियुक्त थे. इसमें CA सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे.
लाला ने कोयले के इस अवैध कारोबार में गुरुपद माजी, नरेंद्र खरका को हिस्सेदार बना रखा था. इन हिस्सेदारों को भी अलग-अलग जिम्मेवारी दी गयी थी. पश्चिम बंगाल ईडी ने नवंबर 2025 में लाला के पार्टनर नरेंद्र खरका सहित अन्य के ठिकानों पर बंगाल में छापा मारा था. जबकि लाला से जुड़े होने की आशंका में ईडी झारखंड ने कोयला के कारोबार से जुड़े धनबाद, दुमका के कुछ व्यापारियों के ठिकानों पर छापा मारा था. फिलहाल लाला के झारखंड कनेक्शन की जांच जारी है. क्योंकि लाला ने ECL के झारखंड स्थित लीज क्षेत्रों में भी अवैध खनन किया है.
लाला के कोलकाता स्थित मुख्य कार्यालय में नीर सिंह नामक CA को तैनात किया गया था. इस CA के पास लाला के कोयले के कारोबार और पैसों का हिसाब-किताब रखने की जिम्मेवारी थी. लाला कभी-कभी ECL के बड़े अधिकारियों की तरह ही अपने कोयले के कारोबार का औचक निरीक्षण के लिए निकलता था. ईडी ने जांच में पाया है कि इस दौरान CA भी उसके साथ रहते थे.
लाला ने अपने कोयले की ढुलाई पर नजर रखने के लिए 19 उड़नदस्ता बना रखा था. उड़नदस्ता का काम अवैध कोयले की ढुलाई के दौरान “लाला पैड” की जांच करने था. लाला पैड बनाने के लिए कोयले से लदे ट्रक या दूसरी गाड़ियों के नंबर प्लेट के पास नोट रख कर उसकी तस्वीर ली जाती थी. इसके बाद इस लाला पैड को पुलिस और उड़नदस्ता को वाट्सएप पर भेजा जाता था. लाला पैड पर वाली गाड़ियों को कोई नहीं रोकता था.
लाला ने अपने अवैध कोयले की बिक्री का बढ़ाने के लिए एजेंट नियुक्त कर रखा था. इनका काम विभिन्न तरह के कारखानों को बाजार से कम कीमत पर कोयला उपलब्ध कराना था. बिक्री बढ़ाने के लिए नियुक्त लाला के एजेंटों ने स्टील, स्पंज आयरन सहित अन्य फैक्ट्रियों को कोयला बेचा और नकद भुगतान लिया.
इडी ने जांच में पाया कि लाला के एजेंटों ने मेसर्स आमिया स्टील, मेसर्स गगन फेरोटेक, मेसर्स कॉस्मिक फेरो एलाय, मेसर्स सेन फेरो एलायंस, मेसर्स कॉनकास्ट स्टील पावर लिमिटेड, मेसर्स कुंज बिहारी स्टील, मेसर्स सावित्री इस्पात, मेसर्स साकंभरी इस्पात, मेसर्स इलोक्विंट स्टील आयरन, मेसर्स एसपीएस स्टील रौलिंग मिल सहित अन्य फैक्ट्रियों को कोयला बेचा.


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