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आमने सामने हुई थी पूछताछ
ईडी ने बीते 24 अप्रैल को छवि रंजन से पूछताछ की थी. इस दौरान उनसे सबसे पहले उनसे सेना के कब्जेवाली जमीन की खरीद बिक्री में उनकी भूमिका से संबंधित सवाल किये गए थे. इसके बाद उनके खिलाफ बड़गाईं के अंचल अधिकारी मनोज कुमार द्वारा लगाये गये आरोपों के बारे में पूछा गया था. सीओ मनोज कुमार ने पूछताछ में ईडी को बताया था कि उसे प्रदीप बागची द्वारा अंचल कार्यालय में जमा किये गये दस्तावेज पर संदेह था. लेकिन छवि रंजन द्वारा भारी दबाव व दंडित करने की धमकी देने के बाद प्रदीप बागची के पक्ष में रिपोर्ट भेजी गयी. इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री हुई. छवि रंजन ने इन आरोपों का खंडन किया और सेना की जमीन की खरीद-बिक्री के मामले में सीओ सहित वहां के कर्मचारियों को दोषी बताया. हालांकि वह दस्तावेज में जालसाजी कर सेना के कब्जेवाली जमीन की खरीद बिक्री के सिलसिले में गिरफ्तार किये गये अभियुक्तों से आमने-सामने पूछताछ के दौरान ईडी के सवालों में उलझ गये. कुछ सवालों के जवाब में टाल मटोल और कुछ में चुप्पी साध कर उन्होंने इस पूरे प्रकरण में अपनी संदेहास्पद भूमिका को यकीन में बदल दिया. इसे भी पढ़ें-वीरेंद्र">https://lagatar.in/virendra-ram-gave-22-tenders-to-m-s-rajesh-construction-got-4-crore-50-lakh/">वीरेंद्रराम ने मेसर्स राजेश कंस्ट्रक्शन को दिलाए 22 टेंडर, 4.50 करोड़ मिले

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