17 अप्रैल को पहला समन जारी किया गया था
सबसे पहले ईडी ने उन्हें 17 अप्रैल को समन जारी कर 21 अप्रैल को ईडी जोनल ऑफिस पहुंचने को कहा था, पर वे नहीं पहुंचे. उन्होंने अपने वकील के माध्यम से दो हफ्ते का समय मांगा. इस पर ईडी ने उसी दिन दोबारा समन जारी कर शाम चार बजे तक ऑफिस आने को कहा था. इसके बाद भी वे हाजिर नहीं हुए. नहीं पहुंचने पर ईडी ने तीसरा समन जारी किया और 24 अप्रैल को दफ्तर पहुंचने को कहा था. 21 अप्रैल को ईडी के समक्ष हाजिर नहीं होने की वजह पितृत्व अवकाश बताया गया था. इसे पढ़ें- CM">https://lagatar.in/cms-press-advisor-pps-udayashankar-brought-to-ed-office/">CMके प्रेस सलाहकार के पीपीएस उदयशंकर को लाया गया ईडी ऑफिस सूत्रों की मानें तो ईडी की नोटिस से पहले वे सरकार से पितृत्व अवकाश का आवेदन दिया था. सरकार से उन्हें पहले ही 17 अप्रैल से लेकर 1 मई तक ‘पितृत्व अवकाश’ की छुट्टी मिल चुकी थी. इसलिए उन्होंने आवेदन देकर मई के पहले हफ्ते के बाद का वक्त देने का निवेदन किया था. हालांकि ईडी के अधिकारियों ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया.
13 अप्रैल को ईडी ने मारा था छापा
ईडी ने 13 अप्रैल को सरकारी जमीन की हेराफेरी के मामले में आईएएस अधिकारी छवि रंजन, अंचल अधिकारी मनोज कुमार सहित जमीन के कारोबार से जुड़े 18 लोगों के कुल 21 ठिकानों पर छापा मारा था. छापेमारी के दायरे में झारखंड के 18, बिहार के एक और पश्चिम बंगाल के दो ठिकानों को शामिल किया गया है. छवि रंजन फिलहाल समाज कल्याण निदेशक के पद हैं.फर्जीवाड़े का खुलासा आयुक्त की जांच रिपोर्ट में पहले ही हो चुका है
जहां तक बात सेना के कब्जे वाली जमीन की खरीद-बिक्री की है तो इसमें फर्जीवाड़ा का खुलासा आयुक्त की जांच रिपोर्ट में पहले ही हो चुका है. उक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है कि प्रदीप बागची नाम के व्यक्ति ने फर्जी रैयत बनकर जगत बंधु टी इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलीप कुमार घोष को उक्त जमीन बेच डाली थी. जमीन की खरीद-बिक्री के लिए रजिस्ट्री में प्रदीप बागची ने जिस होल्डिंग नंबर से संबंधित दो अलग-अलग कागजातों को लगाया था, वह जांच में फर्जी मिले थे. इसे भी पढ़ें- धनबाद:टेंडर">https://lagatar.in/dhanbad-the-dominance-of-bullies-in-the-tender-officers-remained-missing/">धनबाद:टेंडरमें दबंगों का दिखा दबदबा, अधिकारी रहे गायब इसके बाद रांची नगर निगम की ओर से भी बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. रांची नगर निगम के कर संग्रहकर्ता दिलीप शर्मा ने नगर आयुक्त के आदेश पर जून में प्रदीप बागची के विरुद्ध जालसाजी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदीप बागची ने फर्जी आधार कार्ड, फर्जी बिजली बिल, फर्जी पोजेशन लेटर दिखाकर दो-दो होल्डिंग ले लिया था. आयुक्त की जांच में सेना के कब्जे वाली जमीन का असली रैयत जयंत करनाड मिला था. ईडी इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही है. [wpse_comments_template]

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