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लातेहार: धूमधाम से मना करमा पर्व, लोकगीत और सामूहिक नृत्य में दिखी संस्कृति की झलक

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Latehar: जिला मुख्यालय समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में करमा का पर्व पांरपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस मौके पर करम पेड़ की डाल की पूजा अर्चना करते हुए विश्व शांति की कामना की गयी. सरना व पड़हा समिति ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई. ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक रुप से पारंपरिक लोक गीत व नृत्य का आयोजन किया गया. वहीं शहरी क्षेत्र में सामूहिक रुप से महिलाओं एवं कुंवारी कन्याओं को पूजा अर्चना की. इसे भी पढ़ें-मानसून">https://lagatar.in/20-days-left-for-monsoon-to-return-jharkhand-still-receives-26-percent-less-rain-than-normal/">मानसून

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करम देव की पूजा अर्चना

शहर के श्री वैष्णव दुर्गा मंदिर, प्राचीन देवी मंडप, ब्रजांग देव संस्थान समेत कई मंदिरों में बहनों ने सामूहिक रूप से पूजा अर्चना कर अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना की. शहर से सटे जलता, डुमरदोहर, बेंदी, परसाही, नावागढ़, तरवाडीह, तूपू, हेसला, मननचोटाग, डुड़ंगी व पोचरा समेंत ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामूहिक रुप से पूजा अर्चना की गयी. मान्यता के अनुसार आदिवासी समुदाय के लोग खेती बारी करने के बाद अच्छी फसल की कामना को लेकर करम देव की पूजा अर्चना करते हैं. इस कारण इसे कृषि पर्व भी कहा जाता है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/kkkk-2-2.jpg"

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चंदवा में उल्लास के साथ मना पर्व

वहीं चंदवा में संपन्नता का पर्व करम पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया. प्रखंड के लगभग सभी गांव टोले में इसका आयोजन हुआ. करम पर्व को लेकर युवक युवतियों में खासा उत्साह दिखा. युवतियां अपने भाइयों की सुख समृद्धि के लिए उपवास व्रत रखकर करम देव से मन्नत मांगी. लोग ढोल, मांदर और नगाड़े की थाप पर थिरकते गाते जंगल से करम डाल ला कर पूरे विधि विधान से पूजा किया. इसे भी पढ़ें-कार्यशील">https://lagatar.in/work-orders-worth-rs-1200-crore-affected-in-hec-due-to-lack-of-working-capital/">कार्यशील

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करमा पर्व देता है प्रकृति की रक्षा का संदेश: विनोद उरांव

वहीं जिला परषिद सदस्य विनोद उरांव ने कहा कि करमा का पर्व हमें प्रकृति की रक्षा करने का संदेश देता है. उन्होने कहा कि हमें अपनी पारंपरिक रीति रिवाज एवं पर्वों को सहेज कर रखने की दरकार है. विनोद उरांव सदर प्रखंड के पोचरा पंचायत के मधुवाखाड़ अखड़ा में आयोजित करमा पर्व के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होने कहा कि आज युवाओं को अपने पूर्वजों के द्वारा स्थापित किये गये पर्व व त्यौहारों एवं मूल्यों को समझने की जरूरत है. पाश्चात्य संस्कृति की अंधाधुंध अनुकरण में हम अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों को खोते जा रहे हैं. उन्होने आदिवासी संस्कृति व सभ्यता को बचाने की अपील की. उन्होने कहा कि करमा का पर्व भाई व बहन के अटूट प्रेम का पर्व तो है ही इसे खेती एवं फसल की उत्पादन की कामना को लेकर भी मनाया जाता है. इससे पहले अखड़ा मे करम डाली की स्थापना कर पूजा अर्चना की गयी. मौके पर लक्ष्मण उरांव, मुकेश उरांव, गंगा उरांव व सहोदर उरांव समेंत कई ग्रामीण उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
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