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स्थापना के दो दशक बीत जाने के बाद भी जिले का स्वरूप नहीं ले सका लातेहार

 
Sunil Kumar Latehar: जिला स्थापना के दो दशक बाद भी लातेहार जिला का स्वरूप नहीं ले पाया है. आज भी जिले में कई मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. जिलेवासी लातेहार अनुमंडल को जिला बनाने के लिए लगभग दो दशकों तक संघर्ष करते रहे. तब 4 अप्रैल 2001 को लातेहार अनुमंडल जिला का दर्जा प्राप्त किया. तत्कालीन एकीकृत बिहार विधानसभा में कई बार लातेहार अनुमंडल को जिला बनाने की मांग विधायकों के द्वारा की जाती रही. लेकिन बिहार सरकार ने लातेहार को जिला नहीं बनाया. झारखंड अलग राज्य बनते ही लातेहार जिला बन सका. लातेहार के वर्तमान विधायक वैद्यनाथ राम जिला निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले वर्षों से चले आ रहे आंदोलन के क्रम में यहां वर्ष 1997 में जारी क्रमिक अनशन के दौरान सर्वाधिक 72 घंटे का उपवास रखा था. जिला निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित जनांदोलन में जिले के सभी प्रखंडों की जनता की सहभागिता थी. इस आंदोलन में बिहार के दर्जनों नामी-गिरामी नेताओं ने भाग लिया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, पूर्व मंत्री पूरन चंद, पूर्व मंत्री सूरज मंडल समेत कई नेताओं ने जिला निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक अधिवक्ता भोला शरण एवं समाजसेवी मुरली प्रसाद के आह्वान पर यहां चलाए जा रहे आंदोलन में भाग लिया था. झारखंड अलग राज्य बनते ही तत्कालीन विधायक वैद्यनाथ राम ने इस अनुमंडल को जिले का दर्जा दिलाने में सफलता हासिल किया. लातेहार वर्ष 1924 में अनुमंडल बना था. लातेहार जिले में जिला स्तरीय सुविधाओं का घोर अभाव है. अभी भी यहां की जनता को संकीर्ण सड़कें और दूषित पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है. जिलावासियों को जिला बनने की खुशी तो है लेकिन विकास नहीं होने की कसक अभी भी है. [wpse_comments_template]
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