Mahuadand (Latehar) : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) सदैव बिजली बिल वसूलने में सक्रिय नजर आता है. बिजली बिल नहीं देने पर बिजली काट दी जाती है. एफआईआर तक दर्ज कराई जाती है. लेकिन बिजली उपभोक्ता को सुविधा देने के नाम पर बहाना बनाया जाता है. ऐसा ही एक मामला महुआडांड़ प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर रिगड़ी टांड़ (अम्बवाटोली 3) बस्ती का है. यहां के घरों में बिजली कनेक्शन दिया तो गया है, लेकिन पोल नहीं गड़ा है. जबकि बिजली का बिल भी उनसे बाकायदा वसूला जाता है. इस बस्ती में 70 से 80 घर हैं. बिजली के खम्भे नहीं लगने से लोगों को परेशानी तो होती ही है, आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-hemant-sarkar-engrossed-in-looting-the-states-mineral-wealth-laxman-swarnakar/">गिरिडीह
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बरसात के दिनों में होती है ज्यादा परेशानी
ग्रामीण परदेसी मुंडा, संजय बड़ाईक, मंटू बिरिजया, बुधनी देवी मीनू बड़ाईक व जैस्मिन केरकेट्टा ने बताया कि एक किलोमीटर दूर वन विभाग कार्यालय के पास लगे बिजली के खंभे से बांस के सहारे तार लाकर बिजली का उपयोग किया जा रहा है. तीन से चार घर मिलकर बांस के सहारे तार बस्ती तक लाते हैं. फिर अपने-अपने घरों में बिजली का उपयोग करते हैं. इसके लिए प्रत्येक घर से 2 से 3 हजार रुपए अतिरिक्त ख़र्च करना पड़ता है. तार पर अधिक लोड पड़ने के कारण यह तार 6 से 7 महीने भी नहीं चल पाता है. चिंतामणि देवी, सुनीता देवी, संगीता देवी, सीमा देवी, सुमित्रा देवी समेत अन्य स्थानीय महिलाएं बताती है कि अधिक संख्या में तार एक जगह जमा होने के बाद बरसात में विशेष परेशानी उठानी पड़ती है. बारिश के दौरान बिजली कड़कने से तारों में चिंगारियां सी निकलती है. जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल भी रहता है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-man-commits-suicide-by-being-run-over-by-train-in-family-dispute/">जमशेदपुर: पारिवारिक विवाद में शख्स ने ट्रेन से कटकर की आत्महत्या
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