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लातेहार: गांधी पुस्तकालय का डेढ़ साल पहले हुआ जीर्णोद्धार, अब फिर से खोलने की कवायद शुरु

Ashish Tagore Latehar: लातेहार शहर के बीचो बीच मेन रोड स्थित गांधी पुस्तकालय भवन के जीर्णोद्धार का काम डेढ़ साल पहले ही पूरा हो चुका है, बावजूद इसके गांधी पुस्तकालय को यहां स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है. तत्कालीन डीसी अबु इमरान के निर्देश पर ग्रामीण विशेष प्रमंडल ने साल 2021 में गांधी पुस्तकालय भवन के जीर्णोद्धार के लिए निविदा प्रकाशित करायी थी. उसके बाद इस भवन की मरम्मती करायी गयी. बता दें कि गांधी पुस्तकालय का भवन जर्जर होने के कारण इसे धर्मपुर स्थित बहुदेश्यीय भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था. लेकिन यहां भी कई सालों से पुस्तकालय बंद है.

60 के दशक में की गयी थी गांधी पुस्तकालय की स्थापना

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alt="" width="600" height="400" /> बता दें कि, स्थानीय लोगों के सामुहिक प्रयास से 60 के दशक में गांधी पुस्तकालय की स्थापना की गयी थी. दस साल तक यह पुस्तकालय जन सहयोग व चंदा से चलता रहा. 70 के दशक में पलामू शिक्षा विभाग ने इसका अधिग्रहण किया और यहां पुस्तकों की आपूर्ति की जाने लगी. शिवशंकर प्रसाद को पुस्तकालय अधीक्षक बनाया गया था. वो काफी कम पैसे में इस पुस्तकालय का संचालन करते थे. उस समय पुस्तकालय भवन में बिजली नहीं थी. लोगों को शाम में लालटेन की रौशनी में किताबें पढ़नी पड़ती थी. पुस्तकालय में बैठने के लिए तीन टेबल व आठ से दस कुर्सी थी. पुस्तकों को रखने के लिए पर्याप्त रैक व आलमीरा नहीं थे. जब पुस्तकालय अधीक्षक शिवशंकर प्रसाद सेवानिवृत्त हो गये तो गायत्री देवी ने पुस्तकालय में केयर टेकर के रूप अपनी सेवा दी. लेकिन बहुत ही कम व अनियमित मानदेय पर गुजारा करना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने पुस्तकालय चलाने में असमर्थता जाहिर कर दी. उसके बाद पुस्तकालय बंद हो गया.

तत्कालीन डीसी ने पुस्तकालय को किया स्थानांतरित

साल 2011-12 में तत्कालीन डीसी राहुल कुमार पुरवार ने इस पुस्तकालय का निरीक्षण किया. पुरवार के निर्देश पर पुस्तकालय को शहर के धर्मपुर स्थित बहुदेश्यीय भवन की दूसरी मंजिल पर कर दिया गया. जहां पुस्तकालय को फर्नीचर उपलब्ध कराये गये और एक सरकारी शिक्षक को यहां केयर टेकर के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया. लेकिन शहर से दूर वीरान में स्थित होने के कारण यहां पाठकों की तादाद बहुत ही कम थी. बाद में पाठकों की संख्या शून्य हो गयी. यहां प्रतिनियुक्त शिक्षक कई महीनों तक पुस्तकालय खोल कर पाठकों की बाट जोहते रहें. आखिरकार बाद में इसे बंद कर दिया गया. साल 20211 में तत्कालीन डीसी अबु इमरान ने गांधी पुस्तकालय भवन का निरीक्षण किया और इसका जीर्णोद्धार करने के लिए निविदा प्रकाशित किया. विडंबना यह है कि जिर्णोद्धार के बाद भी पुस्तकालय को यहां स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें: चांडिल">https://lagatar.in/chandil-after-all-what-was-feared-happened-a-herd-of-elephants-broke-four-houses/">चांडिल

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