: किसानों को 30 प्रतिशत अनुदान पर सरकार देगी मोटरसाइकिल
कुंभकर्णी नींद में जिला प्रशासन
वहीं जिला प्रशासन की ओर से नदी की कभी नापी नहीं की जाती है और ना इसे संरक्षित करने की दिशा में कोई प्रयास किया जाता है. लगभग तीन किलोमीटर तक शहर के बीच से गुजरने वाली इस नदी को आकर्षक रूप देने की योजना नगर पंचायत विभाग के द्वारा वर्षों पूर्व बनायी गयी थी. लेकिन कोई प्रशासनिक पहल नहीं होने की वजह से यह योजना सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है.देवनदी कहलाने वाली जायत्री नदी में पहाड़ों से आता है पानी
बता दें कि देवनदी कहलाने वाली जायत्री नदी का एक अपना इतिहास रहा है. जानकारों का कहना है कि नदी में आने वाला पानी पहाड़ों से निकला हुआ है. तापा पहाड़ की गर्भ से निकला इस नदी का पानी इतना निर्मल है कि जब शहर में जलस्रोत काफी कम था तो लोग खाने-पीने से लेकर अपने तमाम जरूरतों को इसी नदी के जल से पूरा करते थे. लेकिन आज स्थिति इतनी खराब हो गई है कि शहर का अधिकांश कचरा और घरों का उत्सर्जित जल इसी नदी में समाहित हो जाता है. पहाड़ की तलहटी से निकला यह जलस्रोत बानपुर मुहल्ला से जुबली रोड़ तक आते-आते दुर्गंध से भर उठता है. बनवारी साहु कॉलेज से गांधी कॉलेज तक इस नदी में सिर्फ और सिर्फ घरों का उत्सर्जित जल ही बहती है.alt="" width="600" height="400" /> इसे भी पढ़ें– चिकित्सीय">https://lagatar.in/journalists-of-jharkhand-should-apply-till-january-25-for-the-benefit-of-medical-and-personal-accident-insurance-scheme/">चिकित्सीय
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