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लातेहार : अस्तित्व खोती जा रही है जायत्री नदी, अतिक्रमणकारियों का कब्जा

Sunil Kumar Latehar : शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाली जायत्री नदी अतिक्रमणकारियों के कारण अपना अस्तित्व खोती जा रही है. लातेहार-हेरंज पथ के बीच से गुजरने वाली यह नदी शहर का आकर्षण है. शहर के बनवारी कॉलेज से गांधी कॉलेज तक करीब तीन किलोमीटर इस नदी का प्रवाह है. इसके दोनों किनारों पर शहर बसा हुआ है, लेकिन उचित रखरखाव नही होने की वजह से ये सिमटती जा रही है. ज्यादातर जमीन अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ गयी है. अधिकांश घरों का शौचालय की टंकी इसी नदी में बना चुके हैं. कई जगहों पर तो अतिक्रमणकारियों ने बकायदा नदी की धारा को कुंद कर घर भी बना लिया है. इसे भी पढ़ें– लातेहार">https://lagatar.in/latehar-government-will-give-motorcycle-to-farmers-on-30-percent-subsidy/">लातेहार

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कुंभकर्णी नींद में जिला प्रशासन

वहीं जिला प्रशासन की ओर से नदी की कभी नापी नहीं की जाती है और ना इसे संरक्षित करने की दिशा में कोई प्रयास किया जाता है. लगभग तीन किलोमीटर तक शहर के बीच से गुजरने वाली इस नदी को आकर्षक रूप देने की योजना नगर पंचायत विभाग के द्वारा वर्षों पूर्व बनायी गयी थी. लेकिन कोई प्रशासनिक पहल नहीं होने की वजह से यह योजना सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है.

देवनदी कहलाने वाली जायत्री नदी में पहाड़ों से आता है पानी 

बता दें कि देवनदी कहलाने वाली जायत्री नदी का एक अपना इतिहास रहा है. जानकारों का कहना है कि नदी में आने वाला पानी पहाड़ों से निकला हुआ है. तापा पहाड़ की गर्भ से निकला इस नदी का पानी इतना निर्मल है कि जब शहर में जलस्रोत काफी कम था तो लोग खाने-पीने से लेकर अपने तमाम जरूरतों को इसी नदी के जल से पूरा करते थे. लेकिन आज स्थिति इतनी खराब हो गई है कि शहर का अधिकांश कचरा और घरों का उत्सर्जित जल इसी नदी में समाहित हो जाता है. पहाड़ की तलहटी से निकला यह जलस्रोत बानपुर मुहल्ला से जुबली रोड़ तक आते-आते दुर्गंध से भर उठता है. बनवारी साहु कॉलेज से गांधी कॉलेज तक इस नदी में सिर्फ और सिर्फ घरों का उत्सर्जित जल ही बहती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/jjjjj-1.jpg"

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चुनाव के समय इसे संरक्षित करने के किए जाते हैं वादे 

लोगों का कहना है कि प्रशासनिक पहल नहीं होने से इस नदी की स्थिति बदतर होती जा रही है. मालूम हो कि इसके संरक्षण नहीं होने से पूरी नदी में झाड़ियां उग आई है. यहां तक कि जल का प्रवाह भी दिखाई नहीं पड़ता है. कतिपय लोगों द्वारा जल की धारा कुंद कर देने से कई जगह तो यह नाली के रूप में तब्दील हो चुकी है. नगर पंचायत प्रशासन और उनके जनप्रतिनिधियों का कोई इस ओर झुकाव नहीं देखा जा रहा है. वहीं नगर निकाय के चुनाव के समय इसे संरक्षित करने की वायदें तो की जाती है लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि इस नदी की ओर झांकने तक नहीं आते हैं. [wpse_comments_template]

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