वज्रपात से चार बच्चों की मौत, आम चुनने गए थे सभी
फिल्म बनाने की क्षमता अब पहले से ज्यादा है - कॉर्डिनेटर
स्टेट कॉर्डिनेटर नन्द कुमार सिंह ने बताया कि आज मोबाइल में देखी जाने वाली फिल्म भी आसानी से बन जा रही. इतनी क्षमता लोगों में आ गयी है. बावजूद इसके हम रोजगार के इस महत्वपूर्ण अवसर से काफी दूर खड़े हैं. जिन सांस्कृतिक मूल्यों के विषयों को लेकर भारतीय सिनेमा की शुरुआत हुई थी, आज उसमें काफी बिखराव दिखने लगा है. झारखंड में जनजातीय समाज की बहुलता है. इस राज्य की भाषा, संस्कृति और इतिहास भी समृद्ध रहा है. इस वर्ष इसी विषय को केंद्र में रखकर 23 से 25 जून तक रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय परिसर में फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. राज्य के फिल्मकार मात्र 250 और 100 रुपये का शुल्क भरकर प्रतिभागी बन सकते हैं. झारखंड के फिल्मकारों के लिए कुल मिलाकर दो लाख के पुरस्कार भी रखे गये हैं. इससे पहले चित्रपट झारखंड के पलामू प्रभारी राकेश रमण ने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आधार बनाकर राज्य में सिनेमा का वातावरण बनाने के लिए चित्रपट झारखंड का गठन किया गया है.ये लोग रहे मौजूद
मौके पर चेतलाल रामदास, लालू यादव, शिक्षक सुरेश ठाकुर के अलावा विजय, अभिनन्दन राम, रविकांत भगत, जितेन्द्र भगत, लवकेश उरांव, रिंकू उरांव, सुजीत उरांव, पंकज कुमार, शुकुल उरांव, कुन्दन गुप्ता व प्रशांत कुमार आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें - जमीन">https://lagatar.in/ed-will-continue-questioning-in-the-land-scam-case-from-monday/">जमीनघोटाला मामले में सोमवार से ED लगातार पूछताछ करेगी [wpse_comments_template]

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