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एकलव्य विद्यालय समेत कई मामलों में भी अटका मामला
ऐसी ही स्थिति 10 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत से पतरातू ग्राम में निर्माणाधीन एकलव्य विद्यालय की है. भवन निर्माण का कार्य लगभग 50 फीसदी पूर्ण हो गया तो प्रभावित भूमि दावेदारों ने मामले को अदालत में ले गये. सुनवाई के उपरांत अदालत द्वारा काम को रुकवा दिया गया. बाद में यह मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा. नतीजतन यह निर्माण कार्य अभी भी अधर में है. शहर के बाजारटांड़ में राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बानपुर जमीनी विवाद के कारण डेड एसेट में तब्दील हो गया है. स्कूल की भूमि पर रैयतों ने अपनी दावेदारी पेश की और अदालत में मामला पहुंचा. अदालती कार्रवाई के उपरांत विद्यालय की भूमि विवादास्पद पायी गयी और उस विद्यालय को ही बंद करना पड़ा. योजनाओं के क्रियान्वयन से पहले भूमि चयन में ही प्रक्रियाओं और सरकारी प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया. इससे सरकार पैसे की बर्बादी हो रही है. ऐसा ही एक मामला केंद्रीय विद्यालय रोड स्थित बाजार समिति शेड की है. लगभग दो करोड़ रुपए खर्च करने के उपरांत उस भवन का निर्माण अधर में लटक गया. इन सभी सरकारी योजनाओं में जनता की गाढ़ी कमाई फंसी हुई है. न तो इनका कोई उपयोग हो रहा है और ना तो दोषियों पर कोई कार्रवाई हो रही है. इसे भी पढ़ें–तीन">https://lagatar.in/murder-case-of-three-women-revealed-15-accused-arrested/">तीनमहिलाओं की हत्या मामले का खुलासा,15 आरोपी गिरफ्तार [wpse_comments_template]

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