: असमान एवं अल्पवृष्टि से सशंकित हैं जिले के किसान
जल मीनार को देखने वाला कोई नहीं
एक बार जल मीनार बन जाने के बाद कोई इसे देखने नहीं आता. बहुत से जल मीनार आज केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. ये शासन तंत्र को मुंह चिढ़ाते हुए दिख रहे हैं. खराब पड़े सोलर जल मीनारों को ना तो लगाने वाला एजेंसी देख रहा है और ना ही शासन तंत्र में बैठे लोग.मिलीभगत का आरोप
जल मीनारों को देखने से ऐसा लगता है कि यह योजना जनहित में नहीं बल्कि व्यवसायियों बिचौलियों और निवर्तमान समय के मुख्य अधिकारी, कर्मचारियों और मुखिया ने पैसे की बंदरबांट के लिए लगाया. अगर ऐसा नहीं था तो पंचायत में जितने भी जल मीनार खराब पड़े हैं, उसको दुरुस्त कर ग्रामीणों को शुद्ध जल मुहैया करवाया जा सकता था. पर ऐसा करना ना मुखिया ने मुनासिब समझा ना ही पदाधिकारी ने. ये केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. इसे भी पढ़ें-पश्चिमी">https://lagatar.in/western-europe-is-burning-in-the-furnace-of-fire-the-fire-in-the-forests-is-spreading-like-a-demon/">पश्चिमीयूरोप आग की भट्ठी में झुलस रहा, जंगलों में लगी आग दावनल की तरह फैलती जा रही है, ब्रिटेनवासी लू और गर्मी से परेशान

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