NewDelhi : प्रधानमंत्री मोदी ने आज बुधवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles. का विमोचन किया. कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी शामिल हुए. कार्यक्रम विज्ञान भवन में आयोजित हुआ.
पीएम मोदी ने श्री कोविंद की आत्मकथा को राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए युवा पीढ़ी (जेन-Z) से इसे पढ़ने का आग्रह किया. प्रधानमंत्री मोदी ने इच्छा जताई कि युवा पीढ़ी पूर्व राष्ट्रपति के अनुभव पढ़े और जाने कि हमारे पूर्वजों ने कैसे सदियों तक संघर्ष किया था.
पीएम मोदी ने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि आज के सोशल मीडिया के जमाने में कई इन्फ्लुएंसर्स युवाओं को आकर्षित करते हैं. लेकिन इस शॉर्टकट के दौर में युवाओं को सावधानी बरतने की जरूरत है,
पीएम मोदी ने रेलवे स्टेशनों पर लिखा एक लाइन का उदाहरण दिया. कहा कि रेलवे स्टेशनों पर भी लोग ब्रिज से जाने की बजाय पटरी पार करने की कोशिश करते हैं. पीएम ने कहा, A shortcut will cut you short. (गलत शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है)
अपनी आत्मकथा में श्री कोविंद ने अपने जीवन के शुरुआती संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियां हासिल करने के साथ-साथ राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की कहानी लिखी है. रामनाथ कोविंद के सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर देश के 14वें राष्ट्रपति बनने तक का सफर इस किताब में दर्ज है.
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद की तारीफ करते हुए कहा, इनकीआत्मकथा के विमोचन का अवसर मुझे मिला है. कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है. मैंने उनके जीवन में जिया है. समझा है. उनकी कार्य क्षमताओं को जाना है.
पीएम मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि रामनाथ कोविंद की ऑटोबायोग्राफी भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी.इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, सार्वजनिक जीवन में एक कार्यकर्ता के रूप में मेरी मुलाकात मोदी जी से हुई.
उस दौरान वे पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. श्री कोविंद ने कहा, उन्हें संगठन के कार्यक्रमों में नरेंद्र मोदी के साथ काम करने का अवसर मिला. वे उनकी दूरदर्शिता, विकास के प्रति प्रतिबद्धता और साधारण कार्यकर्ताओं से सहज जुड़ने की उनकी क्षमता से प्रभावित हुए.
बता दें कि रामनाथ कोविंद 2017 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति रहे. राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे 2015 से 2017 तक बिहार के राज्यपाल रहे. इससे पूर्व उत्तर प्रदेश से लगातार दो बार राज्यसभा सदस्य रहे. 1998 से 2002 के बीच पार्टी के दलित मोर्चा के प्रमुख और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे थे.
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