- अलग से जनता दरबार लगाने की कोई जरूरत नहीं
Shruti Prakash Singh Ranchi : रांची के नवनियुक्त उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा का मानना है कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव में शांति समितियों की भूमिका सबसे अहम
है. शांति समितियों के सदस्यों के साथ बिना गैप बातचीत होती रहनी
चाहिए. शुभम संदेश से बातचीत में रांची के उपायुक्त ने कहा कि अलग से जनता दरबार लगाने की दरअसल कोई जरूरत नहीं, क्योंकि सभी दफ्तर एक ही भवन में
हैं. जो भी चाहे दफ्तर के काम-काज के वक्त में अपनी समस्या का समाधान कराने के लिए आ सकता
है. इसके अलावा नवनियुक्त उपायुक्त ने कई मुद्दों पर बातचीत
की. पेश है बातचीत के अंश.-
सवाल : रांची उपायुक्त पद पर रहते हुए आपका मुख्य जोर किन बातों पर रहेगा ? जवाब : जमीन से
जुड़े लाभुकों की समस्याओं के निपटारे पर मेरा ज्यादा जोर
रहेगा. इसके अलावा विधि व्यवस्था पर भी जोर
रहेगा. केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंदों को मिले, इस पर भी मेरा जोर
रहेगा. सवाल : बाबूलाल मरांडी सरकार में उपायुक्त द्वारा जनता दरबार लगाया जाता है. क्या आपका जोर भी इस पर रहेगा ? जवाब : अभी ऐसा कुछ नहीं
है. हां, जितने भी समय मैं अपने कार्यालय में बैठूंगा, जरूरतमंदों से मिलता
रहूंगा. मेरा कार्यालय सभी के लिए खुला
है. कोई भी जरूरतमंद हो, वे मुझसे अपनी समस्याएं मौखिक या लिखित रूप से कह सकते
हैं. इसके अलावा रांची समाहरणालय (डीसी ऑफिस) में स्थित सभी कार्यालय में अधिकारी बैठते
हैं. जरूरतमंद उनसे भी मिलकर अपनी समस्याओं का निदान करा सकते
हैं. सवाल : अन्य जिलों के विपरीत रांची की समस्याएं ज्यादा होती हैं. अगर आपके समक्ष वैसी समस्या आती है, तो उसे आप कैसे हैंडल करेंगे? जवाब : राज्य के सभी जिलों में स्थित सभी संस्थाओं के कामकाज
कमोवेश एक जैसे होते
हैं. लाभुकों की पेंशन योजना, राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाता
है. कहने का अर्थ हुआ है कि केंद्र की सभी योजनाएं सभी जिलों में चलती
हैं. हालांकि रांची राज्य की राजधानी
है. इस नाते इसका स्थान कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण
है. मुख्य रूप से यहां का नगर निगम क्षेत्र काफी
बड़ा है.आबादी भी अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा
है. ऐसे में विधि व्यवस्था बनाए रखना एक
बड़ी चुनौती तो है
ही. इसके अलावा पूरी सरकार यहीं बैठती
है. कुल मिलाकर मेरा जोर यही रहेगा कि कभी भी ऐसी स्थिति न आए, जिससे शहर या फिर जिले की शांति व्यवस्था भंग
हो. अगर ऐसा होता है तो इसका असर सामान्य जनजीवन पर पड़ेगा, जो उपायुक्त पद पर रहते मैं नहीं होने
दूंगा. सवाल: बीते माह रांची में हुई हिंसक घटना के बाद लॉ एंड ऑर्डर खत्म हुआ था. इस पर क्या कोई शांति समिति बनायी जाएगी? जवाब : जिले में शांति समिति पहले से ही मौजूद है, शांति समिति के सदस्यों के साथ नियमित अंतराल पर मुलाकात होती रहती
है. मेरे पदभार ग्रहण करने के बाद से शांति समिति के सदस्यों से मुलाकात हो चुकी
है. मेरा प्रयास यही होगा कि किसी भी तरह का कम्युनिकेशन गैप ना
हो. शांति समिति में जितने भी प्रबुद्ध लोग होते हैं, उनका अपने अपने क्षेत्र में अपने-अपने समुदाय के बीच काफी
पकड़ रहती
है. ऐसे लोग ही अपने क्षेत्र में अमन चैन बनाकर रखते
हैं. मेरा यही प्रयास रहेगा कि समिति की बैठक नियमित अंतराल पर होती रहे.
सवाल : रांची में ट्रैफिक की समस्या काफी गंभीर है. लेकिन उसका पालन बहुत कम दिखता है. इस पर आपकी क्या सोच है? जवाब : ट्रैफिक इंप्रूवमेंट एक बहुत ही
कंप्रिहेंसिव आइडिया
है. ट्रैफिक सुचारू हो, इसके लिए
सड़कों की संख्या ज्यादा होनी
चाहिए. सड़कों पर अतिक्रमण कम से कम होना
चाहिए. ऐसा नहीं होने पर ही जाम की स्थिति बनती
है. सभी जानते हैं कि राजधानी का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा
है. जरूरी है कि राजधानी में
फ्लाईओवर्स बनें. मुख्य मार्ग को लेफ्ट फ्री किया
जाए. अंडरपास बनाया
जाए. ट्रैफिक सिग्नल को सुचारू किया
जाए. ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाने पर जोर
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