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एलबीएसएम कॉलेज जमशेदपुर : बुद्धि वह मानसिक शक्ति है जो तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है : डॉ. अशोक कुमार झा

Jamshedpur (Anand Mishra) : जमशेदपुर के करनडीह स्थित एलबीएसएम कॉलेज यूजी मनोविज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. एनईपी 2020 पर आधारित है इस व्याख्यान का विषय था-बुद्धि: स्वरूप और सिद्धान्त`. इसमें सर्वप्रथम मनोविज्ञान विभाग के डॉ प्रशान्त तथा प्रो प्रमिला किस्कू ने मुख्य वक्ता प्रो मुकेश कुमार सिंह तथा प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा को तुलसी का पौधा, अंगवस्त्र और मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया. तदोपरांत विषय प्रवेश कराते हुए व्याख्यान की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा ने कहा कि बुद्धि वह मानसिक शक्ति है, जो वस्तुओं और तथ्यों को समझने, उनमें आपसी संबंध खोजने तथा तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है. उन्होंने कहा कि `बुद्धिस्य बलम तस्य` अर्थात जिसमें बुद्धि होगी वही बलवान होगा और बलवान ही इस पृथ्वी पर राज करेगा अर्थात `वीर भोग्या वसुंधरा`. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-bjp-demanded-to-declare-22nd-as-holiday-in-all-educational-institutions/">जमशेदपुर

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मुख्य वक्ता घाटशिला कॉलेज के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि बुद्धि का प्रयोग प्राय: हम दिन प्रतिदिन के बोलचाल में करते हैं. बुद्धि व्यक्ति को वातावरण के साथ प्रभावकारी ढंग से समायोजन या अनुकूलन करने में मदद करता है. साथ ही व्यक्ति में विवेकशील चिंतन तथा अमूर्त चिंतन करने में मदद मिलती है. बुद्धि का स्वरूप कुछ ऐसा होता है, जिसको एक कारक या क्षमता के आधार पर नहीं समझा जा सकता है. इसमें भिन्न-भिन्न प्रकार की क्षमताएं होती है. थर्स्टन ने सात ऐसी क्षमताओं के बारे में बतलाया तो वही गिलफोर्ड ने बुद्धि के 150 क्षमताओं का अपने अध्ययन में जिक्र किया. पीई वर्नन ने बुद्धि संप्रत्यय के तीन अर्थ बतलाए हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-workers-college-students-of-intermediate-geography-department-visited-dimna/">जमशेदपुर

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उन्होंने आगे बुद्धि के सिद्धांत की चर्चा के क्रम में स्पीयरमैन के द्विकारक सिद्धांत, थर्स्टन का समूह कारक सिद्धांत, आर्थर जेंसन का बुद्धि कारक सिद्धांत, कैटल का संस्कृति मुक्त बुद्धि परीक्षण, गार्डनर का बुद्धि सिद्धांत, स्टर्नबर्ग का त्रितंत्र सिद्धांत की व्याख्या की. मंच संचालन मनोविज्ञान विभाग के छात्र जगरनाथ सरदार तथा धन्यवाद ज्ञापन छात्रा भूमि मित्रा ने किया. इस अवसर पर डॉ प्रशांत , प्रो प्रमिला किस्कू, डॉ डीके मित्रा, प्रो पुरषोत्तम प्रसाद, डॉ दीपांजय श्रीवास्तव, प्रो विनोद कुमार, डॉ विनय कुमार गुप्ता, डॉ संचिता भुई सेन, प्रो विजय प्रकाश, प्रो संतोष राम, डॉ जया कच्छप, सुषमिता धारा तथा छात्र-छात्राएं उपस्‍थित थे. [wpse_comments_template]

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