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इंजीनियरिंग कर नौनिहालों के भविष्य के लिए छोड़ दी नौकरी

Amarnath Pathak Hazaribagh : आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर तीन युवाओं ने सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं की, ताकि झारखंड के नौनिहालों का भविष्य संवार सकें. उनके ख्वाबों को पंख लगाने में हजारीबाग विनोबाभावे विश्वविद्यालय पीजी के भी एक विद्यार्थी उनसे जुड़े हुए हैं. चारों अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ हैं और पिछले छह साल से हजारीबाग में शिक्षा की खामोश क्रांति के अग्रदूत बने हैं. पिछले तीन वर्षों में इन युवाओं ने हजारीबाग समेत झारखंड व विभिन्न प्रांतों से 158 प्रतिभागियों को इंजीनियरिंग और 37 को मेडिकल की परीक्षा में कामयाबी दिला चुके हैं. उनका मकसद इन क्षेत्रों में करियर की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के सपनों को पंख लगाना है. इस दिशा में धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बेहतर कदम बढ़ा रहे हैं.

जानिए हजारीबाग को कर्मभूमि बनानेवाले इन युवाओं को

हजारीबाग को कर्मभूमि बनानेवाले ये चार युवा हैं आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग कर चुके रांची के संतोष कुमार, एनआईटी कालीकट केरल के बिहार स्थित गया निवासी मुकेश कुमार सिंह, एनआईटी जमशेदपुर से इंजीनियरिंग करनेवाले चतरा के नीतीश कुमार और विनोबाभावे विश्वविद्यालय पीजी बायोलॉजी हजारीबाग के विद्यार्थी रहे ऋषभ सिन्हा. मुकेश बताते हैं कि ऋषभ को यहां से बुलाया गया. अन्य दो साथी इंजीनियरिंग के दौरान ही एक-दूसरे के संपर्क में आए.

बच्चों की भीड़ देख कोचिंग खोलने का लिया निर्णय

यहां बच्चों की बेहताशा भीड़ देखकर हजारीबाग में कोचिंग खोलने का निर्णय लिया. इसका नाम एलिएंट कोचिंग रखा. इससे पहले बच्चों को उनके करियर के प्रति अभिलाषा से संबंधित सर्वे किया. इसमें अधिकांश बच्चों ने मेडिकल या फिर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने की इच्छा जाहिर की.

टेस्ट में मिले बेहद गंभीर और चौंकानेवाले मामले 

फिर बच्चों का आईक्यू टेस्ट लिया, तो बड़ा ही गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया. दु:खद बात यह है कि स्थानीय बच्चों के अभिभावक या फिर खुद नौनिहाल अपने करियर के प्रति संजीदा नहीं हैं. यहां जो बच्चों की भीड़ दिखाई देती है, वह अपना दो महत्वपूर्ण साल सिर्फ बर्बाद कर रहे हैं. इनमें 95% बच्चे अभिभावकों के पैसे पानी में बहा रहे हैं. चूंकि टेस्ट के दौरान अधिकांश बच्चों में विषयों से संबंधित बेसिक नॉलेज काफी वीक मिले. ऐसे में हजारीबाग से महज पांच फीसदी बच्चों का ही सलेक्शन उनके कोचिंग के लिए हो पाया. नब्बे फीसदी से अधिक बच्चे झारखंड के विभिन्न जिलों या फिर दूसरे प्रांतों से हैं.

करियर के प्रति संजीदा होना बेहद जरूरी : मुकेश

एनआईटी कालीकट केरल से इंजीनियरिंग कर चुके मुकेश कुमार सिंह कहते हैं कि बच्चों को करियर के प्रति संजीदा होना बेहद जरूरी है. यह बात उनके अभिभावकों को भी सोचना होगा. आठवीं कक्षा से ही बच्चे को तैयार करना होगा. अन्यथा दसवीं के बाद दो साल जीवन का सबसे कीमती वक्त गुजर जाने के बाद आज के दौर में जिंदगी बेहद कठिन हो जाएगी. यही वक्त है संभलने का. अगर कुछ कर लिए, तो जीत गए, नहीं तो जीवनभर भटकना होगा.

बच्चों को महानगरों की तरह ही पढ़ाई, संचालकों की भी कमाई, अभिभावकों के पैसे की भी होगी बचत

मुकेश कहते हैं कि महानगरों की तरह ही यहां भी पढ़ाई होती है. दो साल के लिए 1.5 लाख रुपए शुल्क लिया जाता है. साथ में हर तरह की सुविधाएं दी जाती है. यहां नामांकित विद्यार्थियों को स्टडी मटेरियल, लाइब्रेरी, पुस्तकें, ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी समेत कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध है. साथ ही विभिन्न विषयों से संबंधित चुनिंदे 20 फैकल्टीज भी हैं. इनमें अधिकांश बाहर से आईआईटी और मेडिकल से जुड़े शिक्षक ही नौनिहालों को तैयार करते हैं. उनका मकसद शिक्षा को सिर्फ व्यवसाय बनाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना भी है. मुकेश कहते हैं कि यहां के अभिभावक बच्चों पर दोगुना-तीन गुना खर्च कर बाहर पढ़ने के लिए भेज देते हैं, लेकिन यहां नहीं पढ़ाना चाहते. अगर यहां पढ़ाएंगे, तो उनके पैसे की भी बचत होगी और महानगरों की तरह पढ़ाई भी होगी. साथ में कोचिंग संचालकों को भी स्थानीय स्तर पर लाभ मिलेगा. हर कोचिंग एक जैसा नहीं होता. वे लोग नतीजे पर यकीन रखते हैं.

आज खुलेगा एलिएंट का तीसरा ब्रांच

पीटीसी मार्ग स्थित होटल विनायक के पीछे दक्ष कैंपस में एलिएंट एकेडेमी के तीसरे ब्रांच का शुभारंभ रविवार की अपराह्न तीन बजे होगा. इसमें मुख्य अतिथि स्वास्थ्य विभाग के पूर्व डायरेक्टर इन चीफ डॉ. कृष्ण कुमार और विशिष्ट अतिथि आईआईटी मुंबई के आशीष आनंद होंगे. मुख्य ब्रांच मटवारी और कोर्रा में एक ब्रांच संचालित है. [wpse_comments_template]

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