New Delhi : LIC एक बार फिर चर्चा में हैं.चर्चा में इसलिए कि केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है खबरों के अनुसार सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) प्रोसेस के जरिए पहले स्टेप में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.
जरूरत पड़ी तो ग्रीन शू ऑप्शन के तहत 4 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी सरकार बेच सकती है. कुल मिलाकर 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचे जाने की बात सामने आ रही है. वर्तमान में सरकार की लगभग 96.5 फीसदी हिस्सेदारी LIC में है.
सूत्रों के अनुसार सरकारी ऑफर में सर्वप्रथम नॉन-रिटेल निवेशकों को हिस्सा खरीदने का मौका दिया जायेगा. इसके बाद रिटेल निवेशक बोली लगा सकेंगे. सरकार द्वारा OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है.
अर्थजगत के लोगों के अनुसार सरकार सिर्फ पैसा जुटाने के लिए LIC की हिस्सेदारी नहीं बेच रही है. सेबी का नियम इसके पीछे का एक कारण है.
सेबी का नियम है कि शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी आम निवेशकों के पास होनी चाहिए. वर्तमान में LIC में सरकार की हिस्सेदारी बहुत अधिक है, इसलिए पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाना आवश्यक हो गया है.
जान ले कि LIC की शेयर बाजार में लिस्टिंग 2022 में हुई थी. इसका आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ करार दिया गया था वर्तमान में सरकार सेबी के नियमों को देखते हुए कंपनी में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है.
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