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गढ़वा जिले की लाइफलाइन पंडा, डोमनी और ढांढरा नदियां सूख गयीं, जल संकट गहराया

Garhwa : खरौंधी प्रखंड होकर बहनेवाली पंडा नदी, डोमनी नदी तथा ढाढरा नदी में जनवरी माह में ही पानी सूख गया. तीनों नदियां पूरे क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाती हैं. तीनों नदियां सूख जाने के कारण इलाके में जल संकट गहरा गया है. वहीं सोनटतीय क्षेत्रों में सदा बहने वाली सोननदी का पानी भी काफी कम हो गया है. नदी का पानी सूखने की वजह से प्रखंड के गांवों में जलस्तर नीचे चला गया है. खरौंधी, चंदनी, करीवाडीह, राजी, मझिगावां, सिसरी आदि पंचायतं के तालाब, आहर सहित कई कुएं पहले ही सूख गये हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/05/chapakal.gif"

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चापाकल भी सूख गये हैं,जलमीनार भी बेकार हो गयी है

नदियां सूख  जाने की वजह से प्रखंड के कई चापाकल भी सूख गये हैं. जलमीनारें भी बेकार हो गयी हैं. प्रखंड के लोगों को इधर-उधर से किसी तरह  पीने का पानी लाना पड़ रहा है. इस संबंध में 20 सूत्री अध्यक्ष राजेश कुमार रजक ने बताया कि प्रखंड की तीनों नदियां सूख जाने से प्रखंड का जल स्तर एकदम नीचे चला गया है. जिस कारण प्रखंड के तालाब, बांध, कुंआ तथा चापाकल भी सूख गये हैं. इसके अलावा कई जलमीनार तथा चापाकल बेकार हो गये हैं. कहा कि प्रखंड में पानी की गंभीर समस्या को देखते हुए पीएचडी विभाग तत्काल खराब जलमीनार तथा चापानल की मरम्मती करवाये. ताकि लोगों को पीने का पानी मिल सके.

विद्यालय के बच्चों के सामने पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है

कई सरकारी विद्यालयों के चापाकल सूखने से विद्यालय के बच्चों के सामने पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है. विद्यालय में एमडीएम के रूप में मिलने वाला निवाला भी पानी के अभाव में संकट में आ गया है. एमडीएम बनाने वाली रसोइया को अगल-बगल से पानी का जुगाड़ कर बच्चों का एमडीएम बनाना पड़ रहा है. जिन चापकलों से थोड़ा बहुत पानी निकलता है, वहां लोगों की भीड़ लगी रहती है.

नल-जल योजना हाथी के दांत साबित हो रही है

जानकारी के अनुसार खरौंधी प्रखंड की आबादी लगभग 80 हजार के आसपास है. अधिकांश लोग खेती पर ही आश्रित हैं. प्रखंड के किसान नदी के पानी से ही अपने खेतों का पटवन करते हैं. लेकिन जनवरी माह में प्रखंड की तीनों नदियों के सूख जाने से किसानों की रबी की खेती बुरी तरह से प्रभावित हो गयी है. जिससे भारी संख्या में किसान प्रतिदिन शहरों की ओर रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर रहे हैं. लोगों को बड़े मुश्किल से पीने का पानी मिल पा रहा है. माल- मवेशियों के लिए भी पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. सरकार की बहुचर्चित महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी हाथी का दांत साबित हो रही है.

बरसात के पानी को रोकने का उपाय करना चाहिए

खरौंधी पंचायत निवासी बुधनाथ गुप्ता ने बताया कि खरौंधी बाजार के आसपास के अधिकांश चापाकल एक माह पूर्व ही सूख गये हैं. पानी सूखने क कारण आम लोगों के साथ साथ मवेशियों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है. सरकार को नदी में बरसात के पानी को रोकने का उपाय करना चाहिए. ताकि लोगों को पूरे साल पानी मिल सके.

 प्रखंड के किसानों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है

खरौंधी के भृगुण बैठा ने बताया कि प्रखंड की तीनों नदी सूखने से मवेशियों  को पानी नहीं मिल रहा है. किसानों को जनवरी माह से ही रबी फसलों के पटवन के लिए पानी नहीं मिल रहा है. जबकि प्रखंड की अधिकांश आबादी खेती पर आश्रित है. प्रखंड के किसानो के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. सरकार अगर नदी के पानी को जगह जगह स्टोर कर रोकने का काम करती, तो लोगों को इस समस्या से निजात मिल जाती. [wpse_comments_template]  

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