Ranchi News: White Coat देखकर सबसे पहले इलाज, भरोसा और उम्मीद याद आती है. लेकिन इसी White Coat के अंदर एक डर भी है, जिसकी चर्चा कम होती है. झारखंड में Doctors को मरीजों का इलाज करने के साथ workplace safety, stipend, salary और लंबे duty hours जैसी परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है.
2026 में सामने आए कुछ मामले इस तस्वीर को और साफ करते हैं. अप्रैल 2026 में Jamshedpur के Mahatma Gandhi Memorial Medical College and Hospital यानी MGMMCH के junior doctors stipend बढ़ाने की मांग को लेकर strike पर चले गए. इसका असर OPD और emergency services पर भी पड़ा. Doctors ने कहा कि लंबे समय से stipend में बदलाव नहीं हुआ है और बढ़ती living cost के बीच मौजूदा रकम में काम करना मुश्किल हो रहा है.
यानी young doctors की कहानी सिर्फ hospital duty और patients तक limited नहीं है. उनके लिए payment और working conditions भी बड़ा issue बन चुके हैं.
RIMS में फिर उठा safety का सवाल
सितंबर 2026 में रांची के RIMS में मरीज के परिजनों की ओर से doctors पर कथित हमला हुआ. इसके बाद junior doctors ने काम रोककर security बढ़ाने की मांग की. OPD और emergency services भी प्रभावित हुईं. Doctors ने hospital में बेहतर security और violence के खिलाफ strict action की मांग की.
इसके बाद RIMS में sensitive areas में security मजबूत करने, Quick Response Team और communication व्यवस्था को बेहतर करने जैसे कदमों की बात सामने आई.
यह सिर्फ एक incident नहीं है. Doctors का कहना है कि hospital में outsiders की entry और security को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है. 2026 में RIMS के junior doctors ने security को लेकर quick action force और outsiders पर control जैसी मांगें भी उठाईं.
Medical Protection Act की मांग फिर तेज
Doctors की safety को लेकर Medical Protection Act की मांग भी 2026 में फिर सामने आई. जून 2026 में Jharkhand के doctors ने इस कानून को लागू करने की मांग दोहराई. उनका कहना था कि healthcare workers के खिलाफ violence रोकने के लिए मजबूत legal protection जरूरी है.
यह मांग अचानक नहीं उठी है. पिछले कुछ वर्षों में राज्य के अलग-अलग hospitals में doctors और medical staff के साथ मारपीट के मामले सामने आते रहे हैं.
2023 में Jamshedpur के MGM Hospital में एक बच्ची की मौत के बाद pediatrician Dr Kamlesh Oraon पर हमला हुआ था. इसके विरोध में Jharkhand के doctors ने strike की थी.
यानी pattern काफी familiar है. Patient की हालत बिगड़ी या मौत हुई. परिवार नाराज हुआ. Doctor पर सवाल उठा. कई बार मामला argument से violence तक पहुंच गया. फिर Doctors ने protest किया और security की मांग उठी.
सिर्फ हमला नहीं, stipend भी tension
2026 में stipend को लेकर Jamshedpur का junior doctors protest इस बात का example है कि medical fraternity की परेशानी सिर्फ physical safety तक नहीं है. Compensation और working conditions भी बड़ा issue बन रहे हैं.
देशभर में भी 2026 में medical interns के stipend और working hours को लेकर protests हुए हैं. कई राज्यों में interns ने बताया कि उनसे लंबे hours तक clinical duty ली जाती है, जबकि stipend उनकी जिम्मेदारियों और workload के मुकाबले कम है.
इस national debate का असर Jharkhand पर भी पड़ता है, क्योंकि medical education और training में junior doctors और interns hospital system का बड़ा हिस्सा संभालते हैं.
Endless duty का pressure
Doctor की duty clock देखकर नहीं चलती. Emergency में patient आया तो duty बढ़ सकती है. Critical case आया तो shift खत्म होने के बाद भी hospital छोड़ना आसान नहीं होता.
2026 में medical interns के protests के दौरान कई राज्यों से 36 घंटे तक लगातार duty की शिकायतें सामने आईं.
Jharkhand में भी doctors लंबे working hours और workload को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. जब staff कम हो और patient load ज्यादा हो, तो existing doctors पर pressure और बढ़ जाता है.
यहीं से दूसरा सवाल आता है - क्या exhausted doctor से भी हम हमेशा 100 percent performance की उम्मीद कर सकते हैं?
महिला doctors की safety भी concern
Doctors की safety में women doctors की security भी शामिल है. मई 2025 में RIMS परिसर में एक junior female doctor से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया था. मामले में जांच committee बनाई गई थी और FIR भी दर्ज हुई थी.
Hospital वह जगह है जहां doctor को अपने काम पर focus करना चाहिए. अगर वहीं safety को लेकर चिंता हो, तो workplace का पूरा environment सवालों के घेरे में आता है.
हर बार घटना के बाद action क्यों?
Jharkhand में Doctors की safety की कहानी में सबसे बड़ा सवाल शायद यही है.
क्या system को हर बार किसी Doctor के घायल होने के बाद ही जागना होगा?
क्या security पहले से ऐसी नहीं हो सकती कि attack होने की नौबत ही न आए?
क्या stipend और salary के लिए Doctors को protest करना जरूरी होना चाहिए?
और क्या लंबे duty hours को लेकर कोई practical system नहीं बनाया जा सकता?
Hospital security का मतलब सिर्फ कुछ guards खड़े कर देना नहीं है. CCTV, controlled entry, trained security staff, emergency response team, quick police response और violence के खिलाफ clear protocol भी जरूरी है.
White Coat के पीछे भी इंसान है
Doctor के लिए patient सबसे पहले होता है. लेकिन Doctor भी इंसान है. उसे भी safety चाहिए. उसे भी rest चाहिए. उसे भी समय पर payment चाहिए. और सबसे जरूरी, उसे यह भरोसा चाहिए कि duty के दौरान कोई उस पर हाथ उठाएगा तो system उसके साथ खड़ा होगा.
2026 के cases एक clear picture देते हैं. एक तरफ doctors से ज्यादा काम करने की उम्मीद है, दूसरी तरफ security को लेकर डर है और तीसरी तरफ stipend और working conditions को लेकर dissatisfaction.
Healthcare system सिर्फ hospital building, machines और beds से नहीं बनता. उसके center में doctors, nurses और बाकी health workers होते हैं.
White Coat सिर्फ uniform नहीं है. इसके पीछे सालों की पढ़ाई, रातों की duty, stress और किसी की जिंदगी बचाने की responsibility है.
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि Jharkhand में patients को बेहतर healthcare कब मिलेगा.
सवाल यह भी है -
जो लोग हर दिन दूसरों की जिंदगी बचाने निकलते हैं, उनकी जिंदगी और dignity की safety कौन सुनिश्चित करेगा?
क्योंकि जो हाथ किसी की जान बचाने के लिए उठता है, उसे अपने बचाव के लिए नहीं उठना चाहिए.
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉ. राजेश, डायरेक्टर बालपन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों पर हो रहे हमले, लंबे ड्यूटी घंटे और समय पर स्टाइपेंड नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है. खासकर युवा और रेजिडेंट डॉक्टर लगातार दबाव में काम कर रहे हैं. 24 से 36 घंटे की लगातार ड्यूटी के बाद भी अगर सुरक्षा और सम्मान की गारंटी नहीं होगी, तो इसका असर डॉक्टरों के स्वास्थ्य के साथ मरीजों की सेवा पर भी पड़ेगा. सरकार और अस्पताल प्रशासन को डॉक्टरों की सुरक्षा, पर्याप्त स्टाफ, बेहतर वर्किंग कंडीशन और समय पर स्टाइपेंड सुनिश्चित करना चाहिए. डॉक्टर मरीजों की जान बचाने के लिए काम करते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित माहौल देना व्यवस्था की जिम्मेदारी है.
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