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शराब घोटालाः IAS विनय चौबे और गजेंद्र सिंह सस्पेंड

राज्य सरकार ने आइएएस विनय चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है. दोनों अधिकारियों पर लगभग 38 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है.
 

Ranchi: राज्य सरकार ने आइएएस विनय चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है. दोनों अधिकारियों पर लगभग 38 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. कार्मिक ने इसका आदेश जारी कर दिया. दोनों अधिकारियों को 20 मई से निलंबित किया गया है.


क्या है मामला?

एसीबी ने 20 मई को दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया था और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. इस मामले में दोनों अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग करने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है.

 

सस्पेंशन की फैक्ट फाइल

निलंबन की तिथि: दोनों अधिकारियों को 20 मई से निलंबित किया गया है.

आरोप: लगभग 38 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने का आरोप है.

कार्रवाई: एसीबी ने दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

नियम: सरकारी कर्मी को 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने पर निलंबित करने का प्रावधान है.

क्या है पूरा मामला 

वर्ष 2021 के अंतिम दिनों में राज्य के शराब व्यापारियों के बीच यह चर्चा शुरू हुई कि 2022-23 से नयी शराब नीति आने वाली है. इसमें छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट का दबदबा रहेगा. इन्हीं चर्चाओं के बीच उत्पाद विभाग ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग लिमिटेड (सीएसएमएल) को झारखंड में शराब के राजस्व बढ़ाने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया. उत्पाद नीति बनाने में सलाह देने के लिए सरकार ने अरूणपति त्रिपाठी की फीस 1.25 करोड़ रुपये निर्धारित किया. नयी उत्पाद नीति बनाने के बाद उसे राजस्व पर्षद सदस्य के पास सहमति के लिए भेजी गयी. उस वक्त अमरेंद्र प्रसाद सिंह राजस्व पर्षद सदस्य थे.

उन्होंने उत्पाद नीति पर अपनी असहमति जताते हुए कई मामलों में बदलाव लाने का सुझाव दिया. साथ ही यह टिप्पणी भी कि जिस कंपनी को राजस्व बढ़ाने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया, वह अपने राज्य में शराब का राजस्व नहीं बढ़ा पा रही है. झारखंड में शराब के राजस्व का ग्रोथ, छत्तीसगढ़ से ज्यादा है. ऐसे में वह कंपनी झारखंड में राजस्व बढ़ाने के लिए क्या सलाह देगी, ये समझ से परे है. राजस्व पर्षद सदस्य द्वारा दिये गये सुझाव को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने नयी उत्पाद नीति की घोषणा की. नयी नीति के घोषणा के साथ ही छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट का झारखंड में शराब के व्यापार पर कब्जा हो गया. टेंडर में लगायी गयी शर्तों के मद्देनजर थोक व्यापार इशिता और ओमसाई नाम की कंपनियों के हाथों चला गया.

शराब के राजस्व पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए बोतलों को लगाया जाने वाले होलोग्राम बनाने का काम भी छत्तीसगढ़ सिंडिकेट में शामिल प्रिज्म नाम की कंपनी को दे दिया गया. सरकार द्वारा चलायी जाने वाली खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई का काम भी छत्तीसगढ़ की कंपनियों को मिला. नयी उत्पाद नीति की वजह से सबसे पहले देशी शराब बनाने वाली कंपनियां प्रभावित हुईं. 2022-23 से पहले झारखंड में देशी शराब प्लास्टिक के बोतल में बेचने का नियम था.

लेकिन छत्तीसगढ़ सिंडिकेट ने प्लास्टिक के बदले शीशे की बोतल में देसी शराब बेचने का नियम लागू करवा दिया. इससे झारखंड में देसी शराब के बॉलिंग प्लांट बंद हो गये. इसके बाद छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ में पड़े देसी शराब के स्टॉक को झारखंड में बेचा. इसके बाद झारखंड के देसी शराब बनाने वाली कंपनियों से मिल कर पार्टनशिप करने की कोशिश की. लेकिन झारखंड की ज्यादातर कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं हुई. इन कंपनियों को उत्पाद विभाग के अधिकारियों से मिल कर किसी ना किसी तरह परेशान किया जाता है. इस बीच छत्तीसगढ़ ईडी द्वारा छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में अरूण पति त्रिपाठी व अन्य को अभियुक्त बनाये जाने के बाद शराब सिंडिकेट के कुछ लोग झारखंड से चले गये. जबकि सिंडिकेट की कुछ कंपनियों के साथ किये गये एकरारनामे को सरकार ने रद्द कर दिया.

 

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