संथाल से जुड़ा है राज्य का शराब सिंडिकेट, थोक कारोबार पर है पूरा कब्जा
Amit Singh Ranchi: झारखंड में शराब सिंडिकेट हावी है. यह सिंडिकेट संथाल से जुड़ा हुआ है. ईडी की छापेमारी के बाद अब सच्चाई सामने आने लगी है. सरकार ने जब पहली बार शराब नीति बनायी थी, तभी से विवाद चल रहा है. शराब नीति को लेकर ईडी की दबिश बढती जा रही है. योगेंद्र तिवारी के ठिकानों पर छापेमारी के बाद स्पष्ट हो गया है कि शराब सिंडिकेट संथाल से जुड़ा हुआ है. 24 में से 19 जिले में शराब का थोक करोबार दुमका, जामताड़ा और गोड्डा से संचालित किया जाता रहा है. ईडी की जांच में साफ हो गया है कि योगेंद्र तिवारी सहित सिंडिकेट के अन्यसदस्यों को फायदा पहुंचाने के लिए नई पॉलिसी बनी थी. शराब के थोक कारोबार पर कब्जा करने के लिए पॉलिसी में विशेष क्लॉज जोड़े गए थे, जिसका फायदा उठाकर संथाल सिडिंकेट ने शराब के थोक करोबार पर कब्जा कर लिया. इस सिंडिकेट की वजह से प्रदेश को 450 करोड़ से अधिक का उत्पाद राजस्व घाटा हो चुका है. छ्त्तीसगढ़ शराब कंसलटेंट, सप्लायरों और झारखंड के उत्पाद विभाग के जिम्मेवारों की वजह से झारखंड सरकार को यह नुकसान हुआ है. झारखंड में नई शराब नीति का सलाहकार अरुणपति त्रिपाठी ही छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का सरगना बताया जाता है. उस पर आरोप है कि वह केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य की सहमति के बिना ही झारखंड में सलाहकार बना था. नियमानुसार झारखंड में सलाहकार बनने के लिए उसे अपने मूल विभाग व छत्तीसगढ़ सरकार से अनुमति लेना जरूरी था. उस पर छत्तीसगढ़ में कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें एक फर्जी कंपनी बनाकर छत्तीसगढ़ में होलोग्राम छापने का आरोप भी है. तीन कंपनियों का नाम छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में नाम सामने आ रहा है. झारखंड की शराब नीति में भी उनका सीधा हस्तक्षेप है.
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