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Live - आदिवासी महाजुटान, राहुल गांधी का संदेश- परिसीमन सिर्फ सीटों का सवाल नही, हक की लड़ाई

झारखंड उलगुलान की धरती, आदिवासियों के अधिकार से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं : केशव महतो

केशव महतो कमलेश

Ranchi News : कांग्रेस नेता केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड की धरती हमेशा से उलगुलान और संघर्ष की धरती रही है. यहां के आदिवासी समाज ने अपने जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है.

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, जयपाल सिंह मुंडा और देवेन्द्र नाथ समद ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आदिवासी समाज के अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण देने का काम किया गया.

महतो ने आरोप लगाया कि आज भाजपा के नेता आदिवासियों को संविधान से मिले अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं. आदिवासी समाज के हक और अधिकारों पर किसी भी तरह की हकमारी कांग्रेस पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि संविधान में आदिवासी समाज के अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. इन्हीं संवैधानिक अधिकारों की बदौलत आदिवासी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अपने क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान का संरक्षण मिला है. ऐसे में परिसीमन या किसी अन्य प्रक्रिया के नाम पर आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी कम करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती.

केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही आदिवासी समाज के हक, अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी मजबूती से यह लड़ाई जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर आवाज उठाएगी.

परिसीमन में ST आरक्षित सीटों में कमी न हो, आदिवासी प्रतिनिधियों की मांग

आदिवासी महाजुटान

झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई गई है. मांग की गई है कि परिसीमन के दौरान लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जाए.

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि यदि परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ती है, तो ST के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए. इससे आबादी और निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले बदलाव के बावजूद आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा.

मांग में कहा गया है कि झारखंड के परिसीमन को केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. राज्य की विशेष सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों को भी परिसीमन का आधार बनाया जाए. इसके तहत पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र, आदिवासी बहुल इलाके, ऐतिहासिक विस्थापन और पलायन जैसे मुद्दों को भी ध्यान में रखने की जरूरत बताई गई है.

समर्थकों ने कहा कि झारखंड की आदिवासी आबादी का राजनीतिक प्रतिनिधित्व राज्य की सामाजिक संरचना और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है. इसलिए परिसीमन की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सीटों के पुनर्गठन से आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी पर प्रतिकूल असर न पड़े.


इनकी ये मांगें है 

ST के लिए वर्तमान आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कमी न हो.
कुल लोकसभा-विधानसभा सीटें बढ़ने पर ST आरक्षित सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ाई जाएं.
पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों को परिसीमन में विशेष महत्व मिले.
आदिवासी बहुल क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखा जाए.
ऐतिहासिक विस्थापन और पलायन को भी परिसीमन के दौरान उचित आधार बनाया जाए.

भाजपा-RSS झारखंड पर कब्जा करना चाहते है : ग्लैडसन डुंगडुंग

ग्लैडसन डुंगडुंग

सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि भाजपा और आरएसएस झारखंड पर कब्जा करना चाहते हैं. झारखंड में देश की करीब 40 प्रतिशत खनिज संपदा है. भाजपा को देश के बड़े-बड़े उद्योगपति चला रहे हैं. भाजपा को झारखंड में कभी भी घुसने नहीं दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन को कभी स्वीकार नहीं करेंगे. संविधान में सामाजिक और आर्थिक रूप से सम्मानजनक जीवन जीने की गारंटी दी गई है. इसके बावजूद यहां के आदिवासियों को पलायन के लिए मजबूर किया गया है. आदिवासियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी नहीं दी जा रही है.

उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची इसलिए बनाई गई है, क्योंकि आदिवासियों के पूर्वजों ने ब्रिटिश हुकूमत को स्वीकार नहीं किया था. एचईसी और हटिया को जनरल कर दिया गया है. जमशेदपुर में 24 गांवों को विस्थापित कर दिया गया. 2011 की जनगणना में आदिवासियों की आबादी 95 प्रतिशत थी.

आदिवासियों का अधिकार छीन गया तो आंदोलन तेज होगा : बेला प्रसाद

बेला प्रसाद

आदिवासी महाजुटान रैली में हैदराबाद से आए बेला प्रसाद ने कहा कि मोदी सराकर ने अगर आदिवासियों का हक अधिकार छीना तो तेज आंदोलन होगा. देश में लूट का राज नहीं चलेगा.

झारखंड के खनिज संपदा पर आदिवासियों का ही हक - सुबोधकांत सहाय

सुबोधकांत सहाय

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि एमएमआरडी कानून बना दिया गया है. अभी पेसा कानून लागू हुआ है. यह झारखंड के आदिवासियों का अधिकार है. इलाके में खनिज संपदा है, तो उस पर पहला अधिकार आदिवासियों का ही है. झारखंड के अस्तित्व और अधिकारों की यह लड़ाई लंबी लड़नी होगी.

आदिवासियों का हक छीना तो चुप नहीं बैठेंगे- बंधु तिर्की

बंधु तिर्की, कांग्रेस नेता

मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने परिसीमन समेत आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि परिसीमन केवल लोकसभा और विधानसभा की सीटों का सवाल नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है.

सभा के दौरान परिसीमन को लेकर तैयार की गई एक रिपोर्ट भी मंच से प्रस्तुत की गई. बंधु तिर्की ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुशीष सोरेन से यह रिपोर्ट मंच पर सौंपने को कहा.  उन्होंने बताया कि रिपोर्ट को झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू के माध्यम से कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि आदिवासी समाज की चिंताओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सके.

बंधु तिर्की ने कहा कि यदि जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन में झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने का प्रयास किया गया तो इसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने राजनीतिक अधिकारों और संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने को तैयार है.

सभा में उन्होंने कहा, “यह लड़ाई केवल लोकसभा और विधानसभा को बचाने की नहीं है. इस राज्य में बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है.” उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर झारखंड की पहचान बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड भगवान बिरसा मुंडा, वीर बुधु भगत, सिदो-कान्हू और फूलो-झानो की धरती है.

बंधु तिर्की ने धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि झारखंड के गांवों में अलग-अलग जाति और समुदाय के लोग वर्षों से मिल-जुलकर रहते आए हैं और सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे भ्रामक एवं आपत्तिजनक संदेशों से लोगों को सावधान रहना होगा.

उन्होंने आदिवासी आबादी में गिरावट और पलायन को गंभीर चिंता का विषय बताया. खासकर पहाड़िया समुदाय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आबादी में कमी और बड़े पैमाने पर पलायन के पीछे रोजगार, विस्थापन और विकास की नीतियों से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार करना होगा.

बंधु तिर्की ने खन-खनिज संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कानूनों से झारखंड के खनिज संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार कमजोर होंगे.

न्होंने रॉयल्टी और राज्य के बकाये का मुद्दा उठाते हुए कहा कि झारखंड की 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार पर बकाया है. .

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार आदिवासी और झारखंड के हितों के खिलाफ फैसले वापस नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि “जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक लड़ाई जारी रहेगी.”

सभा में उन्होंने कहा कि मोरहाबादी मैदान में उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रहा है. उन्होंने दावा किया कि झारखंड के कोने-कोने से लोग अपनी जमीन, पहचान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यहां पहुंचे हैं.

बंधु तिर्की ने अंत में कहा कि झारखंड की अस्मिता और आदिवासियों के हक-अधिकार की रक्षा के लिए इस संघर्ष को गांव-गांव तक ले जाना होगा. 

परिसीमन को लेकर अधिवक्ता सुशीष सोरेन ने तैयार की रिपोर्ट, राहुल गांधी को सौंपी जाएगी

परिसीमन को लेकर रिपोर्ट तैयार

परिसीमन के मुद्दे को लेकर आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. सभा में बताया गया कि परिसीमन को लेकर गठित कमेटी ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें आदिवासी समाज के राजनीतिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी चिंताओं को शामिल किया गया है.

बंधु तिर्की ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुशीष सोरेन को बुलाकर रिपोर्ट प्रस्तुत कराई गई. और उन्हें सम्मानित किया गया. इस दौरान आयोजकों ने अधिवक्ता सुशीष सोरेन के प्रयासों के लिए सभा में मौजूद लोगों से तालियां बजाकर उनका स्वागत करने की अपील की.

सभा में बताया गया कि यह रिपोर्ट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक पहुंचाई जाएगी. झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू के माध्यम से रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपने की बात कही गई.

मंच से कहा गया कि परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के बीच कई तरह की चिंताएं हैं. तैयार की गई रिपोर्ट के माध्यम से इन चिंताओं और संभावित प्रभावों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया जाएगा.

आयोजकों ने उम्मीद जताई कि रिपोर्ट राहुल गांधी तक पहुंचने के बाद आने वाले दिनों में परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर आदिवासी समाज की चिंताओं को मजबूती से उठाया जा सकेगा.

विकास मुंडा का आरोप : परिसीमन के जरिए आदिवासी सीट घटाने की हो रही साजिश

विधायक विकास मुंडा

तमाड़ विधायक विकास मुंडा ने कहा कि 2007 में विरोध के बीच सीट बच पायी थीं. आज वही ताकत देश की सत्ता में बैठा है. इस राज्य में पॉलिसी लागू कर टूल बनाकर आदिवासी सीट कम कर सकते हैं. केंद्र सरकार ने वन अधिकार लागू किया. इसके बाद हसदेव जंगल काटे गए.

असम में भी परिसीमन लागू किया गया. इस परिसीमन से आदिवासियों को नुक्सान हुआ. वहां बहुसंख्यक थे. सीटों का परिसीमन किए गए और अब असम में अल्पसंख्यक हो गया है.

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया आदिवासियों को वनवासी बोलने पर भड़के

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष

मध्य प्रदेश से आए आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हैं. ये हमारी एकता का है. ये बताता है कि हम कितने ताकतवर हैं. मगर ताकत हो और हम उसका उपयोग नहीं करें तो उसका कोई मतलब नहीं है. यहां पर हम सब लोग आदिवासी हैं. आप में से कितने लोग आदिवासी हैं? जरा हाथ उठाओ. कितने लोग आदिवासी हैं? अरे एक हाथ से नहीं दोनों हाथ वाले असली हैं.


बीजेपी पे निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी वाले आपको आदिवासी नहीं मानते हैं. बीजेपी वाले वनवासी बोलते हैं. वनवासी मतलब जो जंगलों में ही रहता है.

आज अगर हमारे लोग पढ़ लिख कर आगे बढ़ रहे हैं वो सबसे बड़ी ताकत क्या है? आरक्षण. है कि नहीं है? अगर आरक्षण नहीं होता तो हमारे लोग डॉक्टर नहीं बनते. सर्जन नहीं बनते, अधिकारी नहीं बनते. हमको राजनेता के रूप में आगे नहीं आने मिलता. आप जितने लोग मंच पर बैठे लोगों को देख रहे हो, यह आरक्षण के कारण है. जिस दिन ये हमारा अधिकार छीन गया, तो कोई मतलब का नहीं रहेगा.

आपके बच्चे लोग धक्के खाते रहेंगे. पर आपको आपका अधिकार नहीं मिलेगा. आज जो रैली आई है, यह रैली क्यों कर रहे हैं? यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारे जो अधिकार है, जितनी सीटें हमें मिलना चाहिए, जो डिलिमिटेशन में कम करने का काम भाजपा के लोग कर रहे हैं, उसके विरोध में आए हैं. पहले भी ये जब सीटें बंटवारा हो रहा था, हमें जितनी सीटें मिलनी थी, वो सीटें ये भाजपा वाले नहीं दे रहे थे.

केंद्र सरकार नहीं दे रही थी. पर हमें वो छीन कर लेना पड़ेगी. पहले कांग्रेस की सरकार ने हमें ये आजादी दी थी. और इसलिए आगे भी पूरी ताकत से खड़गे जी ने बोल दिया है कि हम आखिरी तक लड़ने के लिए तैयार हैं. और उनका कहना है कि ये जो सीटों का बंटवारा हो रहा है ये 25 साल आगे बढ़ा दो ताकि जितना हमारा आरक्षण होगा जितनी हमारी जनसंख्या होगी उतनी सीटें हमें मिलनी चाहिए. जितनी हमारी सीटें होंगी उतनी ही हमारी ताकत बनेगी. और एक बात याद रखो अभी आपको समझ में नहीं आ रहा होगा कि यह क्या करने जा रहे हैं.

यह हमारे चुनाव लड़ने की ताकत को कम करने जा रहे हैं. अगर हमारे विधायक ज्यादा होंगे तो हमारी सुनवाई होगी कि नहीं होगी? अगर हमारे विधायक कम हो गए तो कोई हमारी सुनवाई करेगा क्या? तो इसलिए ये सीटें कम ज्यादा करने का है. झारखंड जो बना था आप लोगों की ताकत से बना था. आपने लड़ाई लड़ी थी कि नहीं लड़ी थी? सबने लड़ाई लड़ी थी और तब जाकर झारखंड बना था. ये एक चीज याद रखना बिरसा मुंडा जी ने उल गुलान का नारा दिया था. एक तब का दिन था और एक आज का दिन है. आज भी हम लड़ाई लड़ रहे हैं.

ये उल गुलान की दूसरी लड़ाई है. और आपको बता दूं ये लोग आपको बांटने की कोशिश करेंगे. बोलेंगे कि आपको बांट देते हैं. और बांटते कैसे हैं? बोलेंगे अरे तुम तो संथाल हो. अरे तुम तो मुंडा हो. अरे तुम तो हो पर हमें बंटना नहीं है. हमारी जो सबसे बड़ी ताकत है वो आदिवासी की है. ये लोग बांटने की कोशिश करेंगे और हम बोलेंगे हम आदिवासी तैयार हैं. 

परिसीमन के आधार पर आदिवासियों की सीट घटाने की हो रही कोशिश : राजेश कच्छप

विधायक राजेश कच्छप

खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि आदिवासी समाज उसी का जिंदाबाद करेगा जो आदिवासियों की बात करेगा. देश का पहला नागरिक आदिवासी हैं. परिसीमन के बारे में आदिवासियों को लड़ने के लिए राजनीतिक सीट दिए गए.

परिसीमन के आधार पर आदिवासियों की सीट जनसंख्या के आधार पर कम करने का प्रयास किया जा रहा है. खनिज संपदा में बसे आदिवासियों को हर प्रकार का कानून लाकर भगाया जाएगा. और गुलगुलिया बनाया जाएगा.

यह अंतिम लड़ाई नहीं है. जबतक परिसीमन कि बंटवारे नहीं हो जाते तबतक लड़ाई जारी रहेगी. अगर अन्य की बात करते हैं तो आदिवासी और एससी के लिए भी राजनीतिक सीटों को बढ़ाना होगा. इस लड़ाई को सफल कराना ही आदिवासियत के नाम पर लड़ना होगा.

पूर्वजों ने देश के लिए लड़ाई लड़ी, अब हमें लड़ना होगा : कालीचरण मुंडा

कालीचरण मुंडा

खूंटी लोकसभा सांसद कालीचरण मुंडा ने परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज को एकजुट होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने देश और राज्य के लिए संघर्ष किया था और अब नई परिस्थितियों में समाज को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़नी होगी. 

कालीचरण मुंडा ने कहा कि यह देश आदिवासियों का भी है और हमारे पूर्वजों ने देश के लिए लड़ाई लड़ी है. हमें भी अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़नी होगी.

उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के माध्यम से आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और विधानसभा-लोकसभा क्षेत्रों पर असर डालने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जो सीटें और क्षेत्र वर्तमान में हैं, उनमें कमी नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़नी चाहिए.

सांसद ने कहा कि परिसीमन के विरोध में जहां-जहां बैठकें और कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, वहां समाज के लोगों को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए. उन्होंने झारखंड के सभी आदिवासी भाई-बहनों से इस मुद्दे पर एकजुट होने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की.

कालीचरण मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी कम करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक क्षेत्र या समुदाय की नहीं, बल्कि झारखंड में आदिवासी अधिकार और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है.

जनसंख्या के आधार पर डीलिमिटेशन हुआ तो आदिवासियों का राजनीतिक आरक्षण घट जाएगा : प्रदीप बालमुचू

प्रदीप बालमुचू

प्रदीप बालमुचू ने कहा कि आदिवासियों की सीट लोकसभा और विधानसभा की सीट घटाई जा रही है. जनसंख्या के आधार पर डेलीमिनेशन होता गया तो, धीरे-धीरे रिजर्वेशन कम हो जाएगा. एक दिन ऐसा आएगा कि आदिवासियों की जनसंख्या कम हो जाएगी. 25 साल की झारखंड में सत्ता और राज कायम करने के लिए रैली करना पड़ रहा है. आज रैली के माध्यम से बीजेपी और दिल्ली को बताने का काम करेंगे. आदिवासियों की 81 में 28 सीट आरक्षित है. 22 प्रतिशत होगी तभी राजनीतिक में भागीदारी हो सकती है.

शिल्पी नेहा तिर्की ने बीजेपी पर साधा निशाना, परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज को किया एकजुट

शिल्पी नेहा तिर्की

मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने परिसीमन के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि परिसीमन सिर्फ विधानसभा और लोकसभा की सीटों का मामला नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में आदिवासी समाज की राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उसकी आवाज को तय करेगा.

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आज की इस सभा को दिल्ली से भी लोग देख रहे हैं. उन्होंने बारिश के बीच सभा में पहुंचे लोगों का अभिवादन करते हुए कहा कि दूर-दराज से झारखंड के सभी 24 जिलों से आए माता-पिता, भाई-बहनों और गणमान्य अतिथियों को उनकी ओर से जोहार है.

उन्होंने कहा कि ये परिसीमन केवल कोई चुनावी मुद्दा नहीं है. ये सिर्फ विधानसभा और लोकसभा की सीटों की बात नहीं है. परिसीमन तय करेगा कि आने वाले नए भारत में आदिवासी समाज कितना मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की ताकत का हिसाब दिल्ली में बैठे लोगों को तय नहीं करने देगा. समाज खुद तय करेगा कि उसका प्रतिनिधित्व कितना होना चाहिए.

2007 के परिसीमन का जिक्र कर बीजेपी पर हमला

शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने संबोधन में 2007 के परिसीमन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस समय आदिवासी समाज की सीटें घटने की बात सामने आई थी और कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में बैठकर परिसीमन को रोकने का काम किया था.

उन्होंने लोगों से अपील की कि गांव-घर लौटने के बाद वे इस बात को लोगों तक पहुंचाएं और बीजेपी के उन सवालों का जवाब दें, जिसमें कांग्रेस से आदिवासियों के लिए किए गए काम का हिसाब पूछा जाता है.

आदिवासियों की संख्या कम होने की जिम्मेदारी आदिवासियों की नहीं

उन्होंने कहा कि झारखंड में आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए सीएनटी कानून, एसपीटी कानून और पांचवीं अनुसूची जैसे कई प्रावधान हैं. इसके बावजूद अगर आदिवासियों की जमीन लूटी गई, परिवारों का विस्थापन हुआ, लोगों को पलायन करना पड़ा और आदिवासी आबादी कम हुई तो इसके लिए आदिवासी समाज को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

अगर आदिवासियों का विस्थापन हुआ है, आदिवासियों की जनसंख्या कम हुई है तो इसके लिए आदिवासी जिम्मेवार नहीं हैं. इसलिए आदिवासियों से इसका हिसाब नहीं लिया जाना चाहिए.

जयपाल सिंह मुंडा के विचारों का किया उल्लेख

अपने संबोधन में शिल्पी नेहा तिर्की ने संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा द्वारा आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जिस समाज को इतिहास में कभी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, आज उसी की संख्या के आधार पर उसकी राजनीतिक आवाज और प्रतिनिधित्व तय करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी.

उन्होंने कहा कि झारखंड बनने के बाद दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग नौकरी और रोजगार के लिए यहां आए. समय के साथ कई लोग परिवार के साथ यहां बस गए और जमीन लेकर घर भी बनाए. उन्होंने कहा कि आज गांवों और शहरों में जाकर यह देखना होगा कि स्थानीय लोगों के बीच किस तरह जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है.

सड़क से सदन और सदन से दिल्ली तक लड़ेंगे

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आज के महाजुटान से जिस विरोध का आगाज हुआ है, उसे आगे सड़क से सदन और सदन से दिल्ली तक ले जाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी-मूलवासी समाज की लड़ाई होनी चाहिए.

उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के अधिकार और प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की बात कहते हुए लोगों से एकजुट रहने की अपील की.

पूर्वजों के संघर्ष से मिली आदिवासी समाज को पहचान : विल्सन कोनगाड़ी

विल्सन कोनगाड़ी

कोलेबिरा विधायक विल्सन कोनगाड़ी ने आदिवासी महाजुटान को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज शुरू से ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता आ रहा है. संघर्ष और गुलामी के दौर में भी आदिवासी समाज ने सामूहिक एकता और ताकत के बल पर अपने अधिकारों की रक्षा की.

उन्होंने कहा कि पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही आदिवासी समाज को संविधान में विशेष अधिकार और कानून मिले हैं. इन्हीं अधिकारों के कारण आज आदिवासी समाज ने देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. 

एमएमडीआर एक्ट में संशोधन और वन संरक्षण कानून जैसे प्रावधानों के माध्यम से आदिवासियों के अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी समाज को परेशान करने और उसके अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया.

परिसीमन महाजुटान में पहुंचे भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी, अलग पहनावे ने खींचा ध्यान

भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी

परिसीमन को लेकर रांची में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में पश्चिमी सिंहभूम से भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी भी पहुंचे. बिरसाइयत परिवार और समाज से जुड़े लोगों ने महाजुटान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए परिसीमन के मुद्दे पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया.

बिरसा मुंडा के अनुयायी खुद को बिरसाइयत बताते हैं और भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं. महाजुटान में पहुंचे इन लोगों का पहनावा, रहन-सहन और धार्मिक-सामाजिक परंपराएं भी अलग नजर आईं.

जानकारी के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम के देवगांव, बंदगांव, बड़की और बिरबा क्षेत्र से बिरसाइयत समाज के लोग महाजुटान में शामिल होने पहुंचे. इनमें कई लोग जंगल और पहाड़ी इलाकों में बसे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहते हैं, जहां सामान्य बस्तियों की तरह पहुंचना भी आसान नहीं है.


महाजुटान में बिरसाइयत समाज के लोगों की पारंपरिक वेशभूषा और जीवनशैली लोगों के आकर्षण का केंद्र रही. उनके मुताबिक, भगवान बिरसा मुंडा के विचारों और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहना उनके समाज की प्राथमिकता है.

परिसीमन के मुद्दे पर आयोजित इस महाजुटान में उनकी मौजूदगी को आदिवासी समाज की व्यापक भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है. बिरसाइयत समाज के लोगों ने भी अपने अधिकार, पहचान और अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर आवाज बुलंद करने की बात कही.

आदिवासी एकता महाजुटान: सांसद सुखदेव भगत ने पढ़ा राहुल गांधी का संदेश

सुखदेव भगत ने राहुल गांधी का संदेश पढ़ा

आदिवासी एकता महाजुटान कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया. राहुल गांधी ने कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर खेद जताते हुए आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई में साथ खड़े रहने की बात कही.

राहुल गांधी के संदेश में कहा गया कि मुझे खेद है कि मैं रांची में हो रहे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया, मगर अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए मैं आप सभी के साथ मजबूती से खड़ा हूं.

संदेश में झारखंड के इतिहास और आदिवासी समाज के संघर्ष का उल्लेख करते हुए जयपाल सिंह मुंडा को याद किया गया. राहुल गांधी ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा में आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की और उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष किया.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए आदिवासी अधिकार सर्वोपरि हैं. संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वन अधिकार कानून इसी सोच पर आधारित हैं कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले समुदायों को अपने संसाधनों पर सबसे मजबूत आवाज मिले. राहुल गांधी ने विकास को लेकर भी संदेश दिया कि विकास का मतलब विस्थापन नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ प्रगति होना चाहिए. झारखंड के संसाधनों पर यहां के लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है.

संदेश के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई केवल संसाधनों की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, अस्मिता और अधिकार की लड़ाई है. उन्होंने अपने संदेश का समापन “जय जोहार” के साथ किया.

आदिवासियों को बचाने के लिए आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी जाएगी : दयामनी बारला

संबोधित करती दयामनी बारला

सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि आज आदिवासियत को बचाने रैली में पहुंचे है. उन्होंने कहा कि आज हमलोग अपनी ताकत को याद करने आए है. झारखंड की लड़ाई में एक-एक आदिवासी हिस्सेदारी लिए थे. मोदी सरकार द्वारा सीट घटाई गई तो आर-पार की लड़ाई होगी. अभी परिसीमन होगा, झारखंड के 28 सीट आदिवासियों की है. यहां के आदिवासियों के लिए दो गुना सीट बढ़ाएंगे, तभी परिसीमन स्वीकार किया जाएगा. परिसीमन के नाम पर आदिवासियों को खत्म करने का प्रयास किया गया तो आंदोलन कर के आदिवासियों को बचाने का प्रयास किया जाएगा. आदिवासियों के हक अधिकार के लिए आखिरी दम तक लडाई लड़ी जाएगी. मोदी सरकार संशोधन बिल लाई है. एक भी खनिज संपदा से जाने नही देंगे. झारखंड में एक भी इंच जमीन लूटने नही देंगे.

आदिवासी एकता महाजुटान : के. राजू, केशव महतो समेत कई नेता मंच पर पहुंचे

महाजुटान में जुटे कांग्रेसी

झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, बंधु तिर्की, शिल्पी नेहा तिर्की, प्रदीप यादव, पूर्व लोकसभा सांसद सुबोध कांत सहाय और कई कांग्रेस के कोई नेता आदिवासी एकता महाजुटान रैली में शामिल हुए. सभी नेता मंच पर पहुंच चुके है. मंच का संचालन रमा खलखो कर रही है.

आदिवासियों के खिलाफ केंद्र सरकार साजिश रच रही : लक्ष्मी नारायण मुंडा

फाइल फोटो

आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि महाजुटान महारैली के माध्यम से परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध हो रहा है. आदिवासियों की बड़ी आबादी का डैम के माध्यम से विस्थापन किया गया. उन्होंने कहा कि इस रैली में सभी आदिवासी विधायकों को बताया जाएगा कि आदिवासियों के खिलाफ केद्र द्वारा साजिश रची जा रही है.

झारखंड प्रभारी के. राजू रांची पहुंचे, आदिवासी एकता महाजुटान में होंगे शामिल

आदिवासी महाजुटान को लेकर के. राजू रांची पहुंचे

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य और झारखंड प्रभारी के. राजू एक दिवसीय झारखंड दौरे पर रविवार को रांची पहुंचे. भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया.

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बंधु तिर्की समेत कई नेता मोरहाबादी मैदान पहुंचे 

के. राजू के स्वागत में आदिवासी परंपरा और स्थानीय सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का खास ध्यान रखा गया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक तरीके से उनका आत्मीय स्वागत किया. इसके बाद सभी मोरहाबादी मैदान की ओर रवाना हुए.

इस दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, शहजादा अनवर, सुरेंद्र सिंह और अजय शर्मा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

आदिवासी महाजुटान को लेकर कांग्रेस विधायक मोरहाबादी मैदान पहुंचे

फाइल फोटो

आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर कांग्रेस से कोलेबिरा विधायक नमन विल्सन कोनगाड़ी, शशि पन्ना, दयामनी बारला 12.40 बजे मोरहाबादी मैदान पहुंच गए है. 

आदिवासी एकता महाजुटान को लेकर मोरहाबादी में मंच पर जुटे नेता

आदिवासी महाजुटान को लेकर मंच पर जुटे नेता

मोरहाबादी मैदान में मंच संचालन से पहले झारखंड के वीर शहीदों के चित्र माल्यार्पण किया जाएगा. इसके लिए प्रवेश द्वार के सामने 22 कट आउट लगाए गए हैं. इसमें भगवान बिरसा मुंडा, गंगा नारायण सिंह, नीलांबर-पीतांबर, फूलो झानो, रामदयाल मुंडा समेत अन्य वीर क्रांतिकारी शामिल है. महाजुटान को लेकर संगठनों के नेता जुटने लगे है.

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वीर शहीदों के चित्र पर होगा माल्यार्पण

आदिवासी एकता महाजुटान को लेकर भीड़ जुटनी शुरू

आदिवासी महाजुटान के लिए जाते लोग

बसों में भरकर लोग आदिवासी महाजुटान में शामिल होने के लिए रांची पहुंच रहे हैं. हरमू मैदान में बसें एकत्रित हो रही हैं. इसके बाद सभी लोग हरमू मैदान से पैदल मोरहाबादी मैदान की ओर जा रहे हैं. जैसे-जैसे लोग पहुंच रहे हैं, महाजुटान में शामिल होने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

पांचवीं मांग-75 साल के विस्थापन और भूमि नुकसान की भरपाई हो

आदिवासी संगठनों ने पिछले 75 वर्षों में हुए विस्थापन, भूमि हस्तांतरण और सांस्कृतिक नुकसान का आकलन कराने की मांग किए जायेंगे.इसके साथ प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी देने की बात कही गई है.

चौथी मांग-राज्यपाल अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करें

 रैली में पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को प्राप्त संवैधानिक शक्तियों के प्रभावी इस्तेमाल की मांग भी उठाई जाएगी.अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी हितों और संवैधानिक प्रावधानों की रक्षा के लिए इन शक्तियों का इस्तेमाल पूरी तरह किया जाना चाहिए.

तीसरी मा़ंग : पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में बाहरी बसावट नियंत्रित हो

पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर होने वाली बाहरी बसावट पर नियंत्रण की मांगहोगी.आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आबादी के स्वरूप में बदलाव का असर भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है.

दूसरी मांग : अवैध जमीन हस्तांतरण रद्द हो, जमीन वापस मिले

CNT एक्ट और SPT एक्ट का सख्ती से पालन कराने की मांग की जाएगी. इसमें आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामलों की जांच कर ऐसे हस्तांतरण तत्काल रद्द किए जाएं और जमीन मूल आदिवासी मालिकों को वापस दिलाई जाए.

पहली मांग: आरक्षित सीटें किसी भी हालत में न घटें

परिसीमन में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या कम नहीं की जाए. पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की मांग की गई है.

महाजुटान के लिए मोरहाबादी मैदान में तैयार मंच.

Ranchi : झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज आज (30 अगस्त) को रांची के मोरहाबादी मैदान में "महाजुटान" आयोजित किया है. राज्य के सभी 24 जिलों से आदिवासी समाज के लोग रैली में शामिल होंगे. मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया समेत कई जनजातियों की भागीदारी होगी.

Lagatar Desk

Ranchi : आदिवासी एकता महाजुटान कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संदेश पढ़कर सुनाया. राहुल गांधी ने कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने पर खेद जताते हुए आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई में साथ खड़े रहने की बात कही. परिसीमन सिर्फ सीटों का सवाल नहीं है, आदिवासियों के लिए हक की लड़ाई है.

राहुल गांधी के संदेश में कहा गया कि मुझे खेद है कि मैं रांची में हो रहे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाया, मगर अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए मैं आप सभी के साथ मजबूती से खड़ा हूं.

संदेश में झारखंड के इतिहास और आदिवासी समाज के संघर्ष का उल्लेख करते हुए जयपाल सिंह मुंडा को याद किया गया. राहुल गांधी ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा में आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की और उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष किया.

 

उल्लेखनीय है कि झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज आज (30 अगस्त) को रांची के मोरहाबादी मैदान में "महाजुटान" आयोजित किया है. राज्य के सभी 24 जिलों से आदिवासी समाज के लोग रैली में शामिल होंगे. मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया समेत कई जनजातियों की भागीदारी हुई है.

 

मुद्दा क्या है

  • -आदिवासी नेताओं के मुताबिक विरोध परिसीमन की नहीं है, बल्कि विरोध उसकी प्रक्रिया से है.
  • -चिंता है कि नई व्यवस्था में ST के लिए आरक्षित सीटों का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा.
  • -मांग है कि यदि परिसीमन के बाद कुल सीटों की संख्या बढ़ती है, तो ST के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी आबादी और सीटों के अनुपात के अनुसार बढ़ाई जाए. 

 

आयोजकों ने साफ किया है कि महाजुटान किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है. इसका मुख्य फोकस आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकार, पहचान और सामाजिक हितों पर है. 

 

रैली और महाजुटान को लेकर प्रशासन ने भी तैयारी पूरी कर ली है. मोरहाबादी और उसके आसपास की सड़कों पर बड़ी वाहनों को परिचालन को बंद कर दिया गया है. इसके साथ ही शहर भर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. शहर में जाम की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जायेगा. इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को निर्देश जारी किये गये हैं.

 

रैली, जुलूस व महाजुटान की पल-पल की जानकारी के लिए जुड़े रहें...

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