आदिवासी संगठनों ने पिछले 75 वर्षों में हुए विस्थापन, भूमि हस्तांतरण और सांस्कृतिक नुकसान का आकलन कराने की मांग किए जायेंगे.इसके साथ प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी देने की बात कही गई है.
आदिवासी संगठनों ने पिछले 75 वर्षों में हुए विस्थापन, भूमि हस्तांतरण और सांस्कृतिक नुकसान का आकलन कराने की मांग किए जायेंगे.इसके साथ प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी देने की बात कही गई है.
पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर होने वाली बाहरी बसावट पर नियंत्रण की मांगहोगी.आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आबादी के स्वरूप में बदलाव का असर भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है.
CNT एक्ट और SPT एक्ट का सख्ती से पालन कराने की मांग की जाएगी. इसमें आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामलों की जांच कर ऐसे हस्तांतरण तत्काल रद्द किए जाएं और जमीन मूल आदिवासी मालिकों को वापस दिलाई जाए.
परिसीमन में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या कम नहीं की जाए. पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की मांग की गई है.
Ranchi : झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज आज (30 अगस्त) को रांची के मोरहाबादी मैदान में "महाजुटान" आयोजित किया है. राज्य के सभी 24 जिलों से आदिवासी समाज के लोग रैली में शामिल होंगे. मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया समेत कई जनजातियों की भागीदारी होगी.
Ranchi : झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज आज (30 अगस्त) को रांची के मोरहाबादी मैदान में "महाजुटान" आयोजित किया है. राज्य के सभी 24 जिलों से आदिवासी समाज के लोग रैली में शामिल होंगे. मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया समेत कई जनजातियों की भागीदारी होगी.
जानकारी के मुताबिक सुबह के 10.00 बजे से राजधानी के विभिन्न जगहों पर लोग जुटेंगे, फिर वहां से जुलूस की शक्ल में मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे. महाजुटान में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी न्योता दिया है. वहीं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू के भी रैली में शामिल हो सकते हैं.
आयोजकों ने साफ किया है कि महाजुटान किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है. इसका मुख्य फोकस आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकार, पहचान और सामाजिक हितों पर है.
रैली और महाजुटान को लेकर प्रशासन ने भी तैयारी पूरी कर ली है. मोरहाबादी और उसके आसपास की सड़कों पर बड़ी वाहनों को परिचालन को बंद कर दिया गया है. इसके साथ ही शहर भर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. शहर में जाम की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जायेगा. इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को निर्देश जारी किये गये हैं.