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राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में लटके ताले, वोट बहिष्कार की चेतावनी

 
-अपनी मांगों को लेकर पांच अक्टूबर से सेविका-सहायिकाएं हैं हड़ताल पर -आठ के कैबिनेट की बैठक में मांगों पर विचार नहीं करने से नाराज सेविका-सहायिकाएं आर-पार के मूड में Ranchi: काम अधिक और पैसा सुविधा कम का नारे को लेकर पूरे राज्य भर के आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं हड़ताल पर हैं. राज्य के 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों में विगत पांच अक्टूबर से ताले लटक गए हैं. इन्हें आशा थी कि आठ अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी और कोई निर्णय लेगी. मगर सरकार ने कोई विचार नहीं किया गया. इससे नाराज आंगनबाड़ी केंद्रों के सहायिका और सहायिकाएं आर-पार के मूड में नजर आ रही हैं. झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका संयुक्त मोर्चा के रांची जिला अध्यक्ष सुमन कुमारी ने बताया कि अगर विधानसभा चुनाव की घोषणा के पूर्व सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है तो इसका खमियाजा सरकार को उठाना पड़ेगा. चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा.

16 सितंबर को सीएम के पास अपनी मांगों को रखा था

सुमन ने बताया कि विगत 16 सितंबर को वे लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांग को रखा. इसके बाद से लोग मोरहाबादी मैदान में सभा किया, मशाल जुलूस निकाला. पांच अक्टूबर को राजभवन के समक्ष धरना पर हैं. झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने आश्वासन दिया था कि मांगों पर सरकार विचार करेगी. मगर कोई निर्णय नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी सेविका केंद्र और राज्य की सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम करती हैं. पहले से उनके पास आंगनबाड़ी केंद्र को चलाने, बच्चों को पढ़ाने और उन्हें मिल डे मिल खिलाने की जिम्मेवारी है. स्वास्थ्य विभाग, पोषण, पल्स पोलियो अभियान सहित अन्य सभी सरकारी योजनाओं का जिम्मा उनके कंधे पर है. उपर से चुनाव में बीएलओ की ड्यूटी में भी उन्हें लगा दिया जाता है. काम अधिक मगर पैसा और सुविधा नहीं के बराबर. इसलिए वे लोग अपनी मांगों को लेकर आंदोलन में हैं. इस मौके पर निखत परवीन, किरण कुमारी, शाकिला खातून, सुधा लिंडा, सीता तिग्गा सहित कई उपस्थित थीं. ये हैं मांगे -विभाग द्वारा जारी सेवा शर्त नियमावली की अधिसूचना संख्या 2238एवं 2239 दिनांक 30/09/2022 में आंशिक संसोधन के लिए पूर्व समर्पित आवेदन पर अविलंब विचार हो. -सहायक अध्यापक, पारा शिक्षकों के समान सेविका- सहायिका को मानदेय वेतनमान मिले. वृद्धि की जटिलताओं को दूर किया जाये ताकि समय पर बार्षिक मानदेय वृद्धि में कोई परेशानी नहीं हो. - मानदेय का भुकतान केंद्रांश एवं राज्यांश मद की राशि एक साथ ससमय हो तथा इसके समय पर भुगतान के लिए चक्रिय कोष की व्यवस्था हो. -सेवानिवृत्ति के बाद सेविका को 10 लाख एवं सहायिका को 5 लाख एक मुस्त सेवा निवृति का लाभ भुगतान हो तथा अंतिम मानदेय का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में भुगतान की स्वीकृति दी जाए. - महिला पर्यवेक्षिका के पद पर शत प्रतिशत वरीयता के आधार पर आंगनबाड़ी सेविका को प्रोन्नति दी जाए. -सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार सभी समाज कल्याण के संविदा कर्मियों के बीच व्याप्त मानदेय विसंगति को दूर कर आंगनबाड़ी कर्मियों को भी महंगाई एवं यात्रा भता भुगतान की स्वीकृति दी जाए. सभी को नियमित कर पूर्ण सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए ग्रेच्युटी भुगतान की जाए. - विभागीय कार्य संपादन के लिए बांडेड कंपनी के मोबाइल एवं रीचार्ज की सुविधा प्रदान की जाए. -आंगनबाड़ी केंद्रों का पोषाहर की राशि बाजार दर पर उपलब्ध कराई जाए. इसे भी पढ़ें - मोदी">https://lagatar.in/important-decision-of-modi-government-the-poor-will-continue-to-get-free-food-grains-till-december-2028/">मोदी

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