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लोकसभा चुनावः आजसू के लिए आसान नहीं है गिरिडीह से हजारीबाग स्वीच करना

हजारीबाग सीट पर आजसू पार्टी दिखा रही दिलचस्पी विशेष राज्य का मुद्दा आजसू के एजेंडे से हुआ गायब Pravin Kumar Ranchi: एनडीए के घटक दल आजसू को लोकसभा चुनाव में उबड़-खाबड़ रास्तों से आगे निकलना होगा. हालांकि आजसू पार्टी कई कार्यक्रमों के साथ मिलन समारोह के बहाने अपने जनाधार को बढ़ाने में जुटी है. राज्य में अगर क्षेत्रीय दलों की बात की जाय तो राज्य में आजसू पार्टी ही एकमात्र पंजीकृत क्षेत्रीय दल है, जो अलग- अलग मुद्दों पर सालोंभर गतिविधियां जारी रखता है. अलग-अलग मुद्दों को लेकर राज्यस्तरीय अभियान भी चलाता है. एक समय आजसू पार्टी राज्य को विशेष राज्य का दर्ज दिलाने के लिए बड़ा अभियान चलाया, लेकिन आज यह मुद्दा पार्टी के एजेंडे में नहीं दिखता. ओबीसी अरक्षण के सवाल पर भी पार्टी मुखर जरूर हुई , लेकिन मामला मुकाम तक नहीं पहुंचा. इस तरह के कई मुद्दे हैं, जो आजसू पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव में पीछा करेगी.

गठबंधन को लेकर आजसू नहीं खोल रही पत्ते

आजसू पार्टी मिलन समारोह सहित पार्टी की विभिन्न गतिविधियों से जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रही है. लेकिन सीट शेयरिंग पर अब तक कोई बड़ा बयान पार्टी की ओर से नहीं आया है. राजनीति गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है कि आजसू गिरिडीह छोड़ हजारीबाग सीट में दिलचस्पी दिखा रही है. साथ ही रांची लोकसभा सीट पर भी पार्टी की नजर है. लोकसभा चुनाव में पार्टी दो सीटों पर दावेदारी कर सकती है. वहीं इस बात की पार्टी को भी इल्म है कि अब अगर अधिक सीटों की मांग करेगी तो वह पूरी नहीं होगी. पार्टी विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें मिल सके, इसलिए लोकसभा में दो या दो से अधिक सीटों पर दावेदारी कर अपना पलड़ा एनडीए में भारी करना चाहती है. बताते चलें कि 2019 में पहली बार भाजपा ने आजसू के साथ लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था. राज्य की 14 में से 11 सीटें भाजपा और एक सीट आजसू ने जीती थी. इस बार भी दोनों पार्टियों के मिल कर चुनाव लड़ने की संभावना है. गिरिडीह संसदीय सीट से आजसू पार्टी प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी भी विजयी रहे. पांच साल के बाद अब आजसू पार्टी और भाजपा नेता सीट की अदला-बदली करने पर विचार कर रहे हैं. दोनों दलों के नेता इस बदलाव में अपने फायदे की तलाश कर रहे हैं.

आजसू का हजारीबाग क्षेत्र में प्रभाव

हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के आने वाले रामगढ़ विधानसभा सीट से अभी आजसू पार्टी की सुनीता देवी विधायक हैं. वहीं रामगढ़ सीट से चंद्रप्रकाश चौधरी भी तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. वहीं हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के बड़कागांव और मांडू विधानसभा चुनाव में भी पिछले चुनाव में आजसू पार्टी ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी. यही कारण है कि चंद्रप्रकाश चौधरी अपने परंपरागत सीट की ओर से लौटना चाहते हैं. वहीं गिरिडीह सीट का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके भाजपा के पूर्व सांसद रवीन्द्र पांडेय भी चाहते हैं कि आजसू पार्टी के हजारीबाग शिफ्ट हो जाने से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें फायदा मिल जाये.

जयंत सिन्हा का पत्ता काटना आसान नहीं

हजारीबाग सीट से भले ही आजसू पार्टी की ओर से अपनी दावेदारी की जा रही है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने जयंत सिन्हा का प्रोफाइल बड़ा है. पार्टी के अंदर उनकी पहचान वित्तीय मामलों के वरिष्ठ नेताओं की है. केंद्रीय नेतृत्व उन्हें वित्तीय मामलों में बड़ी जिम्मेदारी देती रही है. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की टास्क टीम का हिस्सा हैं, जबकि जयंत सिन्हा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के भी करीबी माने जाते हैं. ऐसे में पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जयंत सिन्हा का पत्ता काटना आसान नहीं होगा.

मनीष जायसवाल, जेपी पटेल और मनोज यादव की दावेदारी

हजारीबाग सीट से जयंत सिन्हा जहां लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में हैट्रिक बनाने की रणनीति तैयार में जुटे हैं. वहीं भाजपा के अंदर ही जयंत सिन्हा को बड़ी चुनौती मिल रही है. हजारीबाग सदर के बीजेपी विधायक मनीष जायसवाल, मांडू विधायक जेपी पटेल और पूर्व विधायक मनोज यादव की ओर से भी अपनी दावेदारी पेश की जा रही है. कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता हजारीबाग के अलावा चतरा सीट के लिए भी दावेदारी कर रहे हैं. वहीं पूर्व सांसद यदुनाथ पांडेय भी ताल ठोंक रहे हैं. इसके अलावा आईएएस कोचिंग चलाने वाले एके मिश्रा भी भाग्य आजमाना चाहते हैं. [wpse_comments_template]

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