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लोकसभा अध्यक्ष ने आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा, सदन में दो मिनट का मौन रखवाया,कांग्रेस ने जोरदार हंगामा किया

 NewDelhi :  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज बुधवार को सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सभी सदस्यों को संसदीय परंपराओं के अनुरूप सामूहिक रूप से राष्ट्रहित के लिए काम करना चाहिए तथा सड़क और संसद में विरोध के अंतर को समझते हुए सहमति-असहमति व्यक्त करनी चाहिए. इससे पहले आज श्री बिरला को ध्वनिमत से लोकसभा अध्यक्ष चुन लिया गया. उन्होंने कहा, मुझे पुन: इस महान सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में दायित्व निर्वहन करने का अवसर प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय मंत्रिपरिषद, सभी दलों के नेताओं और सभी सदस्यों का हार्दिक आभार.               नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/#google_vignette">नेशनल

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अखिलेश ने कहा, सदस्यों के निष्कासन से सदन की गरिमा को ठेस न पहुंचे

  हालांकि शुरुआत में ओम बिरला के फिर से लोकसभा स्पीकर बनने पर विपक्ष ने जहां स्वागत किया, वहीं  निष्कासन के मामलों को लेकर ताने भी कसे.  सपा सांसद अखिलेश यादव ने ओम बिरला को दोबारा स्पीकर चुने जाने पर बधाई देते हुए ताना कसा. कहा कि  उनका अंकुश सिर्फ विपक्ष नहीं सत्ता पक्ष पर भी हो.  संसद के पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि सदस्यों के निष्कासन से सदन की गरिमा को ठेस न पहुंचे. अखिलेश ने कहा कि अध्यक्ष महोदय आपके इशारे पर सदन चले, इसका उल्टा न हो.

चुनाव ने दिखाया है कि भारत के लोग चाहते हैं कि संविधान की रक्षा हो : राहुल गांधी 

रायबरेली सांसद और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने बधाई  देते हुए कहा कि सरकार के पास राजनीतिक ताकत है, लेकिन विपक्ष भी भारत की ही आवाज रखता है.  इस बार विपक्ष की ताकत बीते चुनावों के मुकाबले ज्यादा मजबूत है.  विपक्ष चाहेगा कि हम आपके साथ सदन को चलने में सहयोग करें. राहुल गांधी ने कहा कि अहम यह नहीं है कि सदन कैसे चल रहा है.  कहा कि इस चुनाव ने दिखाया है कि भारत के लोग चाहते हैं कि संविधान की रक्षा हो.

इमरजेंसी को लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय करार दिया बिरला ने 

   स्पीकर ओम बिरला की बारी आयी तो उन्होंने संसद में अपने पहले ही भाषण में अपने कड़े रुख से सदन को खास कर विपक्ष को संदेशा दे दिया.  विपक्ष उनके रुख से भौचक्का रह गया,  जब ओम बिरला ने 1975 में इंदिरा सरकार  द्वारा लगाई गयी इमरजेंसी की बरसी का जिक्र करते हुए विपक्ष खास कर कांग्रेस को जम कर सुनाया.  इमरजेंसी को लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय करार देते हुए  कांग्रेस को  घेरा. साथ ही सदन में दो मिनट का मौन रखवाया.
इस दौरान सदन में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया और नारेबाजी की. आपातकाल पर प्रस्ताव पढ़ते हुए बिरला ने कहा, ‘‘अब हम सभी आपातकाल के दौरान कांग्रेस की तानाशाही सरकार के हाथों अपनी जान गंवाने वाले नागरिकों की स्मृति में मौन रखते हैं. इसके बाद सत्तापक्ष के सदस्यों ने कुछ देर मौन रखा, हालांकि इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी और टोकाटाकी जारी रखी.

सदन 1975 में आपातकाल लगाने के फैसले की कड़ी निंदा करता है  :  लोकसभा स्पीकर  

ओम बिरला ने कहा कि 25 जून 1975 को भारत के इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा. इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया और बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान पर हमला किया.   कहा कि  भारत पर इंदिरा गांधी द्वारा तानाशाही थोपी गयी.  भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचला गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटा गया.

सभी तरह के विचार आने चाहिए,  सहमति-असहमति लोकतंत्र की ताकत है 

   स्पीकर ने  कहा, सदन में सभी तरह के विचार आने चाहिए. सहमति-असहमति लोकतंत्र की ताकत है. सभी सदस्यों की विचारधारा अलग है लेकिन देश सर्वोपरि है. मेरी अपेक्षा है कि सभी की सहमति से सदन चलाऊं और एक सदस्य वाले दल को भी पर्याप्त मौका मिले.  बिरला ने कहा, मैं कभी किसी सदस्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहता लेकिन आप भी संसदीय परंपराओं का ध्यान रखें. संसद के विरोध में और सड़क के विरोध में अंतर होना चाहिए.  उन्होंने कहा कि व्यवधान लोकसभा की परंपरा का हिस्सा नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में उन्हें कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी.

राजगसांसदों ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए संसद परिसर में प्रदर्शन किया

केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा के सांसदों ने 1975 में आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और संविधान की अवहेलना करने के लिए मुख्य विपक्षी पार्टी से माफी की मांग की. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जैसे ही सदन की कार्यवाही स्थगित की, बड़ी संख्या में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसद हाथों में तख्तियां लेकर संसद भवन परिसर में नारे लगाने लगे. इस दौरान उन्होंने आपातकाल के लिए कांग्रेस शर्म करो और आपातकाल के लिए माफी मांगो के नारे लगाये. प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी, किरेन रीजीजू और जनता दल (यूनाइटेड) के ललन सिंह सहित अन्य सांसद शामिल हुए.
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