Ranchi/Hazaribagh : कभी जंगलों में नक्सली गतिविधियों के दौरान साथ रहने वाले सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रम ने अब जीवन की नई शुरुआत की है. मंगलवार को हजारीबाग ओपन जेल में जिला प्रशासन और पुलिस की पहल पर दोनों विवाह के बंधन में बंध गए. खास बात यह रही कि इस शादी में पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी बाराती बने. हालांकि, कानूनी रूप से दोनों मार्च में ही शादी कर चुके हैं.
सुरेश और सोमवारी की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. कभी हथियारों और संघर्ष के साये में साथ रहने वाले इस जोड़े ने नक्सली गतिविधियों का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने का फैसला किया. आत्मसमर्पण के बाद हजारीबाग ओपन जेल में रह रहे दोनों ने जब शादी की इच्छा जाहिर की. तो पुलिस और जिला प्रशासन ने उनके विवाह की व्यवस्था की.
डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर मंगलवार शाम हजारीबाग ओपन जेल में विवाह समारोह आयोजित हुआ. हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने दोनों के विवाह का पंजीकरण कराया. (झारखंड की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
जंगलों में साथ रहते हुए करीब आए थे दोनों
सुरेश सिंह मुंडा रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बारूहातू गांव का निवासी है. जबकि सोमवारी हेम्ब्रम तमाड़ के अराहंगा गांव की रहने वाली है. दोनों का अतीत नक्सली गतिविधियों से जुड़ा रहा है. जंगलों में साथ रहने के दौरान दोनों के बीच प्यार पनपा. कई वर्षों तक रिश्ते में रहने के बाद उन्होंने विवाह कर नई जिंदगी शुरू करने का निर्णय लिया.
10 लाख रुपये का इनाम, 67 मामलों में नाम
सुरेश सिंह मुंडा माओवादी संगठन में जोनल कमांडर के पद पर रह चुका है. उसने एक मार्च 2022 को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. उपलब्ध पुलिस संबंधी जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण के समय उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसका नाम 67 मामलों में दर्ज था.