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1 रुपये में उड़ाया गरीबों का मजाक, अमीरों को फायदा देकर सरकारी खजाने को 1296 करोड़ का नुकसान

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Ranchi : सरकारी योजनाएं गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के हित को देखकर बनाई जाती है, लेकिन कई योजनाएं सरकार आंखों पर पट्टी बांधकर तैयार करती है. ऐसी ही एक योजना झारखंड में साल 2017 में शुरू हुई थी. जिसका फायदा गरीबों ने नहीं बल्कि अमीरों ने उठाया और राज्य के राजस्व को 1296 करोड़ का चूना लग गया. तत्कालीन सीएम रघुवर दास ने एक रुपये में महिलाओं के नाम जमीन रजिस्ट्री की योजना शुरू की थी. 50 लाख रुपये तक की कीमत वाली जमीन की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम सिर्फ एक रुपये में तीन साल तक हुई. इस दौरान 193696 अमीरों ने जमीन की रजिस्ट्री कराकर राजस्व को 1296 करोड़ का चूना लगा दिया. 14 जून 2017 को शुरू हुई इस योजना को 15 मई 2020 को हेमंत सरकार ने बंद कर दिया. इसे भी पढ़ें - सुरजाबासा">https://lagatar.in/villagers-protest-against-construction-of-cold-storage-in-surjabasa-meet-mla/">सुरजाबासा

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योजना बनाते समय कॉमन सेंस भी नहीं किया अप्लाई

सवाल ये उठता है कि योजना लागू करने वाली सरकार और योजना बनाने वाले अफसरों में क्या कॉमन सेंस नहीं था. जो गरीब परिवार दो जून की रोटी बमुश्किल जुगाड़ कर पाते हैं और जो मध्यम वर्गीय परिवार महंगाई के बोझ तले दबा हुआ है वह महंगी होती जमीन को आखिर क्यों और कैसे खरीदेगा. एक मध्यमवर्गीय परिवार लोन या कर्ज लेकर बहुत ज्यादा तो 8-10 लाख रुपये की जमीन खरीद सकता है. अगर सरकार ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के हित में योजना लाई थी, तो फिर इसकी सीमा 50 लाख रुपये रखने की क्या जरूरत थी. इसे भी पढ़ें -सुनील">https://lagatar.in/sunil-tiwari-gets-conditional-bail-jharkhand-will-not-have-to-come-for-6-months-will-not-change-mobile-hc/">सुनील

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जो 50 लाख की जमीन खरीदेंगे क्या वो 3.5 लाख रजिस्ट्री फी नहीं दे पाएंगे

जिन 193696 जमीन की रजिस्ट्री 1 रुपये में हुई है उसमें से 90 फीसदी से ज्यादा 40 से 50 लाख रुपये तक वाली जमीन है. जाहिर है यह जमीन गरीबों की नहीं है. सवाल ये उठता है कि जो महिला 40-50 लाख रुपये की जमीन खरीद रही है क्या वो जमीन की कीमत का 7 प्रतिशत रजिस्ट्री के लिए भी देने में सक्षम नहीं थी. मान लीजिए किसी महिला ने 50 लाख की जमीन खरीदी है तो उसे 3 लाख 50 हजार रुपये की जगह सिर्फ 1 रुपये सरकार को देना पड़ा. इसी तरह किसी ने अगर 40 लाख की जमीन खरीदी तो उसे 2 लाख 80 हजार की जगह सिर्फ 1 रुपये रजिस्ट्री फी देना पड़ा. 30 लाख की जमीन खरीदने वाले को 2 लाख 10 हजार रुपये की जगह सिर्फ 1 रुपये देना पड़ा. इसे भी पढ़ें -RMC">https://lagatar.in/rmc-no-improvement-in-cleanliness-even-after-spending-700-crores/">RMC

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2019-20 में राजस्व को सबसे ज्यादा लगा चूना

आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2017-18 में 53616 जमीनों की रजिस्ट्री हुई. इससे सरकार को वित्तीय वर्ष में 318 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि हुई. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2018-19 में 77034 जमीनों की रजिस्ट्री हुई, जिससे 468 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ. 2019-20 में 63046 जमीनों की रजिस्ट्री हुई. इससे सरकार को 510 करोड़ रुपये के राजस्व का चूना लगा. तीन सालों में अमीरों को फायदा देकर सरकारी खजाने को 1296 करोड़ का नुकसान करा दिया गया. इसे भी पढ़ें -RBI">https://lagatar.in/rbi-hikes-transaction-limit-customers-will-be-able-to-transfer-rs-5-lakh-in-a-day-instead-of-rs-2-lakh/">RBI

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