Indore : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आज शुक्रवार को धार स्थित भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए इसे मंदिर करार दिया है.
ASI की सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए हाईकोर्ट ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना.
इंदौर बेंच ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और ASI की वैज्ञानिक जांच से यह स्थापित होता है कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज के समय का संस्कृत अध्ययन केंद्र था.
Madhya Pradesh High Court declares Bhojshala in Dhar as temple. pic.twitter.com/aV4ow20xYQ
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
बता दें कि पूर्व में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं सहित तीन इंटरवेंशन आवेदनों पर विस्तृत सुनवाई के बाद 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
धार की भोजशाला को हिन्दू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. इसी को लेकर विवाद चल रहा था,
आज फैसला आने से पूर्व धार सहित पूरे इंदौर में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया था. जानकारी के अनुसार संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गयी है.
#WATCH इंदौर, मध्य प्रदेश: एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा, "भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार भी दिया है... कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे अपना एक… pic.twitter.com/r6mYc08Xao
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 15, 2026
अहम खबर यह है कि प्रशासन सोशल मीडिया पर विशेष मॉनिटरिंग कर रहा है, ताकि किसी तरह की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट से माहौल भड़काया न जा सके.
भोजशाला विवाद के बारे में बता दें कि 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की गुहार लगाई गयी थी.
याचिका के संदर्भ में कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने 2024 में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कर इसकी सर्वे रिपोर्ट अदालत में पेश की थी.
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट धार भोजशाला मंदिर करार देते हुए कहा कि भोजशाला में ASI का संरक्षण जारी रहेगा. साथ ही फैसला सुनाया कि मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकता है.
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