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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर करार दिया, ASI संरक्षण जारी रहेगा, मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक जमीन  मांग सकता है

Indore :  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आज शुक्रवार को धार स्थित  भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए इसे मंदिर करार दिया है. 

 

ASI की सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए हाईकोर्ट ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना.

 

इंदौर बेंच ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और ASI की वैज्ञानिक जांच से  यह स्थापित होता है कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज के समय का संस्कृत अध्ययन केंद्र था.

 

 

बता दें कि पूर्व में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं सहित तीन इंटरवेंशन आवेदनों पर विस्तृत सुनवाई के बाद 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

 

धार की भोजशाला को हिन्दू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. इसी को लेकर विवाद चल रहा था,

 

 आज फैसला आने से पूर्व  धार सहित पूरे इंदौर में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया था. जानकारी के अनुसार संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गयी है.

 

अहम खबर यह है कि प्रशासन सोशल मीडिया पर विशेष मॉनिटरिंग कर रहा है, ताकि किसी तरह की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट से माहौल भड़काया न जा सके. 

 

भोजशाला विवाद के बारे में बता दें कि 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की गुहार लगाई गयी थी.

 

याचिका के संदर्भ में कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने 2024 में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कर इसकी सर्वे रिपोर्ट अदालत में पेश की थी.

 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट धार भोजशाला मंदिर करार देते हुए कहा कि  भोजशाला में ASI का संरक्षण जारी रहेगा. साथ ही फैसला सुनाया कि मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकता है.

 

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