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महाअष्टमी आज, मां महागौरी को चढ़ायें रात रानी का फूल, नारियल माता को प्रिय

LagatarDesk : शारदीय नवरात्रि का आज आठवां दिन है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. पंचांग के अनुसार, अश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 11 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगा. इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी. महागौरी की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और भक्तों के सभी पापों का भी नाश होता है. इस दिन कन्या पूजा का भी विधान है.

ऐसे करें महागौरी की अराधना

देवी महागौरी की पूजा भी नवरात्रि के अन्य दिनों की ही तरह करें. सुबह स्नान करके देवी मां का ध्यान करें. उन्हें फूल चढ़ायें और दीपक जलाएं. मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें क्योंकि मां को सफेद रंग पसंद है. फिर मां को रोली कुमकुम, फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें. मां की आरती करें और मंत्रों का जाप करें. अष्टमी तिथि के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है. नौ कन्या और भैरो की पूजा करें और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद लें.

मां महागौरी को नारियल का लगायें भोग

मां महागौरी का रंग अंत्यत गोरा है. उनके चेहरे पर एक अलग सी तेज है. जो बहुत मनमोहक है. मां की चार भुजाएं हैं. मां के ऊपर दाहिने हाथ अभय मुद्रा और निचले हाथ में त्रिशूल है. महागौरी के ऊपर बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला हाथ शांत मुद्रा में है. मां का वाहन बैल है. मां का प्रिय फूल रात की रानी है. मां महागौरी को सफेद और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. महागौरी को नारियल बहुत प्रिय है. ऐसा करने से देवी महागौरी प्रसन्न होती हैं. अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा करते समय गुलाबी रंग  के वस्त्र पहनने चाहिए. माता को रात रानी का फूल चढ़ाना चाहिए.

महागौरी की पूजा करने से राहु के बुरे प्रभाव होते हैं कम

मान्यता है कि महा अष्टमी में सच्चे मन से मां महागौरी की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. माता महागौरी को ममता की मूरत कहा जाता है. राहु ग्रह पर मां महागौरी का आधिपत्य रहता है. इसलिए इनकी पूजा करने से राहु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं.  शादी-विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए भी मां महागौरी की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि महागौरी की पूजा से दांपत्य जीवन सुखद बना रहता है. साथ ही पारिवारिक कलह कलेश भी खत्म हो जाता है.

मां महागौरी की कथा

पौराणिक कथा के मुताबिक, पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के बाद मां पार्वती ने महादेव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस दौरान माता हजारों वर्षों तक निराहार रहीं. तप के प्रभाव से माता का शरीर काला पड़ गया. जब महादेव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए तो उन्होंने मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और माता के शरीर को गंगा के पवित्र जल से कांतिमय बना दिया. इसके बाद माता का रंग एकदम साफ हो गया. तब से माता को महागौरी के रूप में भी जाना जाने लगा.

महागौरी के मंत्र :

  1. “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..”.
  2. श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
  3. या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
   

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