गीत-संगीत पर झूमते रहे आदिवासी
सुनील हेंब्रम, ओबी हेंब्रम ,वकील टू डू, मंगल हंसदा, बाबू जान हेंब्रम, जगन्नाथ सोरेन, किरण टुडू, पार्वती किस्कु सहित दर्जनों महिला, पुरुष शामिल थे, वहीं दूसरी ओर निरसा में मांझी परगना महल द्वारा बुधवार को संथाली भाषा दिवस धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर मदनडीह फुटबॉल ग्राउंड में आदिवासी समुदाय के लोगों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. [caption id="attachment_207071" align="alignnone" width="300"]alt="" width="300" height="169" /> मांदर की थाप पर नाचती बालाएं[/caption]
स्कूल-कॉलेज में हो संताली की पढ़ाई
वक्ताओं ने कहा कि संथाली भाषा को केंद्र सरकार द्वारा आज ही के दिन आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था. संथाली भाषा की पढ़ाई विश्वविद्यालय स्तर पर तो हो रही है, परंतु प्राथमिक, माध्यमिक एवं कॉलेज स्तर पर इसकी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था राज्य सरकार करें. आदिवासी समुदाय के लोगों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया लोगों का कहना है कि आदिवासी समाज सभी कार्यक्रम सामूहिकता के आधार पर मनाता है. प्रकृति के हम लोग अनन्य उपासक हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में मांझी परगना महाल के सभी सदस्यों की भूमिका रही. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-anger-in-brahmin-society-burning-of-manjhis-effigy/">धनबाद: ब्राह्मण समाज में आक्रोश, मांझी का पुतला दहन [wpse_comments_template]
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