Ranchi : मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जायेगा. साथ ही मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे. एक माह ब्रेक के बाद सूर्य देव के उत्तरायण होते ही शहनाई गूंजने लगेगी. बन्ना-बन्नी के गीत गुणगुनाएं जायेंगे. सनातनी दही-चूड़ा और खिचड़ी ग्रहण कर विभिन्न संस्कार के साथ नये कार्यों का शुभारंभ भी करेंगे. ज्योतिषों के अनुसार, खरमास में शुभकार्य करने की मनाही होती है, इस कारण मकर संक्रांति का सबको इंतजार रहता है. आचार्य श्रीकृष्ण ने पंचांग की गणना कर बताया कि सोमवार को सूर्य देव तड़के 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. अत: उदया तिथि के अनुसार, मकर संक्रांति का मान सोमवार को होगा. इसका पुण्यकाल - सुबह 07:15 मिनट से शाम 06: 21 मिनट तक और महा पुण्यकाल - प्रातः 07:15 मिनट से पूर्वाह्न 09: 06 मिनट तक रहेगा. आचार्य बताते हैं कि महा पुण्यकाल में गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. इस दिन गंगा स्नान करके भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. जीवन में सुख-सौभाग्य बना रहता है. उन्होंने बताया कि गंगा स्नान न कर पाने की स्थिती में जल में तिल डालकर स्नान करना भी श्रेष्कर होगा. इसे भी पढ़ें -रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-due-to-low-visibility-car-collides-with-truck-parked-on-the-roadside-three-killed/">रामगढ़
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टुसू पर्व की रहेगी धूम
वैसे तो मकर संक्रांति का पर्व देशभर में विभिन्न नामों से मनाया जायेगा. दक्षिण भारत में पोंगल, पंजाब में इसे लोहड़ी और असम में माघ बिहू पर्व के रूप में मनाया जाता है, लेकिन झारखंड में यह त्योहार टुसू पर्व के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन कई ग्रामीण इलाकों में टुसू मेला लगता है. इसमें बड़ी संख्या में लोगबाग इसमें भाग लेकर खुशियां मनाते हैं. फसल काटने के बाद मनाया जाने वाला यह पर्व सब के लिए अलग महत्व रखता है.इसलिए खास है मकर संक्रांति
सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं, पिता-पुत्र का मिलन होता है. श्रीविष्णु ने असुरों का संहार कर पृथ्वी वासी को राहत दी थी. सूर्य देव के उत्तरायण होने पर ही पितामह ने प्राण त्यागे थे. देवी यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था. गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी. ऋतु परिर्वतन का सूचक है मकर संक्रांति का त्योहार.16 से बजेगी शहनाई
खरमास समाप्त होते ही 16 जनवरी से पुन: शहनाई बजने लगेगी. एक माह इंतजार के बाद विवाहित जोड़े एक होंगे. आचार्य श्रीकृष्ण के अनुसार, जनवरी में नौ, फरवरी में 11 और मार्च में दस विवाह के शुभ मुहूर्त हैं. जनवरी - 16,17, 20, 21, 22, 27, 28, 30 और 31 फरवरी - 04, 06,07,08, 12, 13, 17, 24, 25, 26 और 29 मार्च - 01,02,03,04, 05, 06,07, 10, 11, 12 इसे भी पढ़ें -उत्पाद">https://lagatar.in/suspicious-death-case-of-youth-in-utpad-bhawan-angry-people-again-blocked-lalpur-chowk/">उत्पादभवन में युवक का संदिग्ध मौत मामला : आदिवासी संगठनों ने लालपुर चौक किया जाम, चार घंटे यातायात रही बाधित [wpse_comments_template]
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