Lagatar Desk: चुनाव आयोग के एक फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक तक शीर्ष पर रही ममता बनर्जी की पहचान ही छिन गई है. ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का पहचान चिन्ह फूल और घास'अब किसी का नहीं रहा. ना इस सिंबल का इस्तेमाल ममता बनर्जी कर सकती हैं औऱ ना ही तृणमूल के बागी गुट. आयोग ने इस सिंबल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.
पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पूर्व चुनाव आयोग द्वारा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किये जाने को लेकर देश की राजनीति में भूचाल आ गया है.
दरअसल चुनाव आयोग ने AITC के नाम और चुनाव चिह्न के मामले में अंतरिम आदेश जारी कर कहा है कि अरूप रॉय (याचिकाकर्ता) और ममता बनर्जी (प्रतिवादी) के नेतृत्व वाले किसी भी गुट को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है. कोई भी गुट ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के लिए आरक्षित फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकता.
आयोग के अनुसार दोनों गुट अपने-अपने गुट के लिए नये नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं, वे चाहें तो अपनी मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का ज़िक्र भी उसमें कर सकते हैं; दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न मिलेंगे, जिन्हें वे मौजूदा उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी फ्री सिंबल (free symbols) की सूची में से चुन सकते हैं.
आयोग के अंतरिम आदेश की कांग्रेस ने आलोचना की है, जिसमें AITC के प्रतिद्वंद्वी गुटों को उपचुनाव के दौरान पार्टी के नाम और फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया है. कांग्रेस ने इसे आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटना करार दिया है.
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा के अनुसार AITC के चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का चुनाव आयोग का फैसला न्याय नहीं है. पार्टी ने आरोप लगाया कि AITC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है.
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