50 सालों से साप्रंदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं
दोनो समुदाय के एक दूसरे के धर्म व मजहब का सम्मान करते हुए पिछले 50 वर्षों से सांप्रदायिक सदभावना की मिसाल की पेश कर रहे हैं. शारदीय नवरात्र के मौके पर जब भी किसी शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाज का वक्त होता है, महायज्ञ समिति के द्वारा मानस पाठ की लाउडस्पीकर की आवाज को या तो धीमी कर दी जाती है या फिर उसे बंद कर दी जाती है, ताकि मुस्लिम धर्मावलंबियों को नमाज पढ़ने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो.आज तक यहां कोई तनाव नहीं हुआः बैद्यनाथ राम
महायज्ञ समिति के मुख्य संरक्षक सह स्थानीय विधायक व मंत्री बैद्यनाथ राम और समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह ने बताया कि साल 1974 में इस आयोजन का शुभारंभ किया गया था. तब से ले कर आज तक यहां किसी प्रकार का कोई तनाव या मतभेद नहीं हुआ है. दोनो समुदाय एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हुए अजान या मानस पाठ करते हैं. शुक्रवार को काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो इसका ख्याल महायज्ञ समिति के द्वारा रखा जाता है.मस्जिद के पास एक भी मुस्लिम परिवार नहीं
आम तौर पर देखा जाता है कि मस्जिदें मुस्लिम बहुल इलाके में ही हैं. लेकिन लातेहार में जिस स्थान पर जामा मस्जिद है, वहां आसपास के आधे किलोमीटर के दायरे में मुस्लिम समुदाय का एक भी परिवार नहीं है. बावजूद इसके प्रत्येक शुक्रवार को काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं. आज तक यहां किसी प्रकार की कोई छोटी सी भी अप्रिय घटना नहीं हुई है. कभी अगर ईद के मौके पर मानस पाठ हो रहा हो तो मानस महायज्ञ समिति के लोग आगे बढ़ कर मुस्लिम समाज के लोगों को ईद की मुबारकबाद देते है. मुस्लिम समाज के लोग भी इसकी प्रशंसा करते हैं. स्थायी लोक अदालत के सदस्य मो शकील अख्तर ने कहा कि लातेहार सांप्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल है. इसे भी पढ़ें - जम्मू-कश्मीर">https://lagatar.in/jammu-and-kashmir-terrorists-kidnapped-two-indian-army-soldiers-one-managed-to-escape/">जम्मू-कश्मीर: आतंकियों ने भारतीय सेना के दो जवानों का अपहरण किया, एक चंगुल से निकल भागने में कामयाब [wpse_comments_template]
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