हुआ है तो फिर लोग भूख से क्यों मर रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार को घेरा
ठेका कंपनी ने भी कभी सुध नहीं ली
[caption id="attachment_367441" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="311" /> खराब पड़ा सोलर जलमीनार.[/caption] [caption id="attachment_367442" align="aligncenter" width="300"]
alt="" width="300" height="225" /> कुआं जिसका पानी सूख चुका है.[/caption] सेल के ठेका कंपनी (NSPL) वर्षों से इसी गांव की सड़क से होकर चिरिया सुकरी माइंस से ट्रांसपोर्टिंग करती आ रही थी. गांव की समस्याओं की सेल के सीएसआर के द्वारा ही नहीं ठेका कंपनी द्वारा भी सुध नहीं ली गई. चिरिया माइंस से सेल को करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है. बावजूद यहां कि मूलभूत समस्या एवं युवाओं को रोजगार देने में सेल की अनदेखी से आज भी वर्तमान स्थिति जस का तस है. उल्लेखनीय है कि गेंडूम गांव नीचे टोला में चिरिया (सेल) सीएसआर द्वारा एकमात्र निर्मित चापाकल भी एक साल से बेकार पड़ा हुआ है.
नजूमदा नाला से चुआ खोदकर पानी पीने को मजबूर
[caption id="attachment_367439" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> नजूमदा नाला, इसी के भरोसे बुझती है ग्रामीणों की प्यास[/caption] पेयजल की विकट स्थिति को देखते हुए ग्रामीण गांव के समीप नजूमदा नाला से चुआ खोदकर पानी पीने को मजबूर हैं. जिससे स्थानीय लोगों में चिरिया सीएसआर (सेल) के प्रति भारी नाराज़गी देखी जा रही है. सारंडा बीहड़ से सटे ऊपर टोला व नीचे टोला अंतर्गत इस गेंडूम गांव में लगभग 150 घर एवं 1500 से 2000 लोगों की आबादी है. राज्य सरकार द्वारा डेड़ दर्जन सिंचाई व पेयजल कुआं एवं चापाकल हैं. दर्जन भर कुआं और चापाकल मरम्मत के अभाव में बेकार हैं.
चिकित्सा के नाम पर सिर्फ पारासिटामोल टेबलेट बांटना ही सेल की उपलब्धि: रामचंद्र हेम्ब्रोम
[caption id="attachment_367444" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="335" /> रामचंद्र हेम्ब्रोम, मुंडा, गेंडूम गांव.[/caption] “चिरिया (सेल) के द्वारा गेंडूम गांव को गोद लिए जाने के बावजूद सेल, सीएसआर द्वारा स्थानीय लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा नहीं करने एवं रोज़गार उपलब्ध नहीं कराने से समस्याएं जस का तस बनी हुईं हैं. सीएसआर द्वारा नीचे टोला में बना एक मात्र चापाकल भी एक साल से बेकार पड़ा हुआ है. चिकित्सा के नाम पर सिर्फ़ पारासिटामोल टेबलेट बांटना ही सेल की उपलब्धि है. यहां के ग्रामीण अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं.” इसे भी पढ़ें: चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-a-herd-of-elephants-roamed-from-house-to-house-in-jordiha-where-the-smell-was-found-the-grain-was-broken-by-the-wall-and-window/">चाकुलिया
: जोरडीहा में हाथियों का झुंड घर-घर घूमा, जहां मिली गंध वहीं दीवार व खिड़की तोड़ खा गए अनाज [wpse_comments_template]

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