विपक्ष ने मांग की, ना राज्यपाल ने निर्देश दिया, तो विस सत्र पर लाखों का खर्च क्यों : रघुवर
पाषाण रूपी ब्राह्मणी माता अपने भक्तों का कर रही कल्याण
[caption id="attachment_410212" align="aligncenter" width="1024"]alt="" width="1024" height="768" /> ब्राह्मणी माता की पूजा करते श्रद्धालु.[/caption] मान्यतानुसार त्रेता युग 325 वर्ष पूर्व ब्राह्मण परिवार की एक कुंवारी कन्या अपने सात भाइयों के साथ इस पावन स्थान पर रहती थी. कन्या हर दिन की भांति अपनी कुटिया में खाना पका रही थी. उनके सातों भाई जंगल में शिकार करने गए थे. उसी समय कुटिया के समीप से एक ऋषि गुजर रहे थे. ऋषि ने देखा कि कुटिया में अकेली कन्या खाना बना रही है. कन्या को वस्त्रविहीन अवस्था में देख ऋषि के मन में पाप आ गया और कन्या को कुटिया में अकेली पाकर उसके संग दुराचार करने लगा. कन्या असहाय होकर चीख पुकार करने लगी एवं ऋषि से बचने के लिए इधर-उधर भागने लगी. तभी कन्या के सात भाइयों ने यह हश्र देखकर ऋषि के ऊपर अस्त्र से वार कर दिया. अस्त्र का प्रहार ऋषि को लगने के वजाय बहन को लग गई. इससे वह मूर्छित होकर गिर गई. ऋषि ने कुपित होकर सातों भाइयों समेत कन्या को पाषाण बन जाने का श्राप दे दिया. इससे उस ऋषि के श्राप से पाषाण रूपी सातों भाइयों समेत बहन आज भी यहां अवस्थित हैं और कन्या ब्राह्मणी माता के रूप में अपने भक्तों का कल्याण करती आ रही हैं. भक्तों की यहां मन्नत पूरी होने पर हर वर्ष माता की भक्ति में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-people-took-out-public-anger-rally-in-bagbera-in-protest-against-ankitas-murder/">जमशेदपुर
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