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कोडरमा में जीत का अंतर कम होगा, चतरा व हजारीबाग में भाजपा का पलड़ा भारी

Praveen Kumar  Ranchi :   झारखंड की तीन लोकसभा सीटों चतरा, हजारीबाग और कोडरमा में सोमवार को मतदान संपन्न हो गया. तीनों सीटों का चुनाव जातीय ध्रुवीकरण, सांप्रदायिकता और आदिवासी अस्मिता के साथ-साथ रूठे कैडरों को मानाने के इर्द-गिर्द घूमता रहा. तीनों लोकसभा में मुकाबला भाजपा और इंडिया के बीच ही रहा. अब जीत किसकी होगी, यह चार जून को ही पता चलेगा.

चतरा लोस : ईसाई व मुस्लिम वोटों की गोलबंदी ने डाला असर

चतरा लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने सिमरिया, चतरा, लातेहार और पांकी में एकतरफा बढ़त हासिल की थी. मनिका में भी बढ़त मिली थी, लेकिन अंतर कम था. लेकिन इस बार पूरा समीकरण बदला नजर आया. भाजपा प्रत्याशी कालीचरण सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी केएन त्रिपाठी और वर्ष 1999 में चतरा से राजद की टिकट पर सांसद बने नागमणि बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है. चतरा लोकसभा में 28 फीसदी अनुसूचित जाति, 19 फीसदी आदिवासी और 13 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. इसके अलावा कुशवाहा और यादव जाति के वोटर भी बड़ी तादाद में हैं. कांग्रेस 19 फीसदी आदिवासी, 13 फीसदी मुस्लिम के साथ-साथ यादव व कुशवाहा मतों के जरिए जीत की राह देख रही है. वहीं भाजपा अपने पक्ष में भूमिहार, वैश्य जातियों के साथ पार्टी के कैडर वोट का एकजुट रहना सुखद मान रही है. वहीं अगड़ी जातियां ब्राह्मण व राजपूत का वोट कांग्रेस व भाजपा दोनों के पाले में जाने की बात कही जा रही है. चतरा लोकसभा के दो विधानसभा में भोक्ता जातियों की बहुलता है. हाल ही में इस जाति को जनजाति में शामिल किया गया है, जिसका लाभ भाजपा को मिलता नजर आ रहा है. जबकि चतरा सीट को लेकर इंडिया गठबंधन के घटक दलों में लंबे समय तक चली आ रही खटपट, उसे नुकसान पहुंचा सकती है.

कोडरमा लोस : जातिगत समीकरण टूटे, बिखरे कैडर वोटर

खूंटी के बाद कोडरमा को झारखंड का सबसे हॉट सीट माना जा रहा है. अन्नपूर्णा देवी राजद से आकर भाजपा की सांसद बनी. केंद्र में मंत्री का दर्जा मिला. लेकिन यहां से भाकपा माले के बगोदर विधायक विनोद कुमार सिंह के इंडिया गठबंधन प्रत्याशी बनने के बाद मुकाबला रोचक हो गया. मुकाबला एकतरफा नहीं रहा. इस बार जातिगत समीकरण भी टूटे हैं. भाजपा के कैडर वोट में भी बिखरवा होने की खबरें हैं. वहीं कुशवाहा जाति के वोटरों का भाजपा से बिदकना बड़ा सवाल खड़ा करता है. विधानसभावार बात करें तो कोडरमा की छह विधानसभा सीटों में से चार पर एनडीए और दो पर इंडिया गठबंधन का कब्जा है. कोडरमा में भाजपा के विधायक है. यादव बहुल विधानसभा में होने के बाद भी यादवों की वोटो में जबरदस्त बंटवारा होने की चर्चा है. बरकट्ठा में निर्दलीय विधायक अमित कुमार यादव है, लेकिन यहां भी यादव वोट बंटने की खबरें हैं. धनवार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का क्षेत्र है. चर्चा है कि यहां भूमिहार वोट भाजपा के पक्ष में एकजुट नहीं रह पाया. बगोदर से भाकपा माले के विनोद कुमार सिंह पार्टी का मजबूत कैडर वोट माले को बढ़त दिलाने में कामयाब हो सकता है. जमुआ से भाजपा के केदार हाजरा हैं, वहां भी भाजपा के कैडर वोटों में बिखराव देखा गया है. गांडेय विधानसभा में लोकसभा के साथ हुए उपचुनाव का लाभ माले को मिलता नजर आ रहा है.

हजारीबाग लोस : जेपी पटेल व मनीष को भितरघात का डर

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में हजारीबाग, बरही, बड़कागांव और मांडू में पिछली बार भाजपा को एकतरफा बढ़त मिली थी. लेकिन लोकसभा चुनाव के कुछ माह बाद हुए विधानसभा चुनाव में बरही, बड़कागांव और रामगढ़ में कांग्रेस की जीत हुई थी. जबकि हजारीबाग और मांडू में भाजपा प्रत्याशी जीते थे. बाद में ममता देवी को एक मामले में सजा होने पर आजसू ने रामगढ़ उपचुनाव जीत लिया था. इस चुनाव में भाजपा के टिकट से चुनाव जीते दोनों विधायक के बीच सीधा मुकाबला रहा. चुनाव में बड़कागांव विधानसभा में भाजपा को स्पष्ट बढ़त की बात लोगों के बीच चर्चा में है. वहीं रामगढ़ जिला के रामगढ़ और मांडू में कांटे की टक्कर दिखी. महिला वोट एक तरफ जाता दिखा तो आदिवासी और मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण कांग्रेस के पक्ष में देखा गया. इस बार ओबीसी वोटरों में कुर्मी और कोइरी वोट में भी बिखराव हुआ है. वहीं हजारीबाग और बरही में साइलेंट वोटिंग हुई है. शहरी क्षेत्र के वोटरों में उत्साह नहीं दिखा. वहीं ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया. कुल मिलाकर कहे तो चंद हजार वोट के अंतर से ही हार-जीत का फैसला होना है. देखा जाये तो हजारीबाग लोकसभा में भीतरघात, जातिगत ध्रुवीकरण, सांप्रदायिकता और आदिवासी अस्मिता जैसे मुद्दे चुनाव में हावी रहे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी को कितना वोट आता है, इस पर ही कांग्रेस की हार जीत निर्भर है. कुल मिलाकर भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा है. [wpse_comments_template]  

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