Dhanbad: टुंडी प्रखंड के लोधारिया में शुक्रवार को 77वें वन महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने किया. इस दौरान करीब 300 स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने एक साथ पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया. इस मौके पर उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीएफओ विकास पालीवाल तथा उप विकास आयुक्त सन्नी राज मौजूद रहे.

पौधरोपण करते विधायक मथुरा महतो
टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण बेहद आवश्यक है. उन्होंने लोगों से अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने की अपील करते हुए कहा कि यह प्रकृति और मातृत्व, दोनों के प्रति सम्मान का प्रतीक है.
उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि इसे हर व्यक्ति की जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा.उन्होंने वन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और अच्छी वर्षा का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना समय की आवश्यकता है.
उन्होंने बताया कि चालू मानसून सत्र में जिला प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1 से 2 लाख पौधे लगाए और वितरित किए जाएंगे. साथ ही ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी.
उन्होंने यह भी कहा कि टुंडी की हरियाली पूरे धनबाद के लिए प्रेरणा है. झरिया और पुटकी जैसे खनन प्रभावित क्षेत्रों को भी हरित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा. उन्होंने बताया कि माइनिंग एडवाइजरी कमेटी के माध्यम से बंद पड़ी खदानों का पुनरुद्धार कर वहां मिट्टी भरने और पौधारोपण की योजना पर कार्य किया जाएगा.
उन्होंने वन रक्षाबंधन और वन देवी जैसी पारंपरिक अवधारणाओं की सराहना करते हुए कहा कि जंगलों के कुछ हिस्सों को जैव विविधता संरक्षण के लिए पूरी तरह सुरक्षित रखना जरूरी है ताकि वन्यजीवों और सूक्ष्म जीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके.
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चिंता जताते हुए उपायुक्त ने कहा कि हाथी अपने पारंपरिक मार्गों पर चलते हैं जबकि मानव उनके प्राकृतिक आवास और कॉरिडोर में अतिक्रमण कर रहा है. ऐसे में प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है.
स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी ही पर्यावरण की सबसे बड़ी संरक्षक है.यदि हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में 20 से 30 पौधे लगाकर उनका संरक्षण करे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सकता है.
कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त ने वन विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि मानसून सत्र के दौरान 3 से 4 और बड़े जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि अधिक से अधिक लोग वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान से जुड़ सकें.
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