- लैपटाप मे 16,927 लोगों से 307.95 करोड़ रुपये की ठगी का ब्योरा मिले.
- झारखंड में ठगी के लिए जमशेदपुर में भी एक कार्यालय खोला गया था.
- कंपनी ने झारखंड के लोगों से कुल 21.73 करोड़ रुपये की ठगी की.
Ranchi : झारखंड में सक्रिय रही चिटफंड कंपनी Maxizone ने एक लाख रुपये निवेश करने वालों को जिंदगी भर 15 हजार रुपये देने का झांसा देकर लोगों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की. कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह के लैपटाप मे 16,927 लोगों से 307.95 करोड़ रुपये की ठगी का ब्योरा मिले. ठगी के शिकार इन लोगों में झारखंड के 436 लोग शामिल है. अपने लुभावने नारों के सहारे कंपनी ने झारखंड के लोगों से कुल 21.73 करोड़ रुपये की ठगी की.
प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने Maxizone चिटफंड घोटाले की जांच के बाद कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है. इस कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उसकी पत्नी प्रियंका सिंह है. कंपनी में शामिल दूसरे लोगों के नाम सिने कलाकारों के समान है. जैसे गोविंदा, शक्ति कपूर, चंकी पांडे, रजा मुराद वगैरह. फिलहाल ईडी को इस ठग गिरोह के इन सदस्यों की तलाश है. ईडी अब तक सिर्फ Maxizone चिटफंड घोटाले की जांच कर चंद्रभूषण सिंह और प्रियंका सिंह के खिलाफ पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश की आदालत मे Prosecution Complain दायर किया है. मामले में अभी आगे की जांच जारी है.

कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह की फाइल फोटो.
ईडी ने जांच में पाया कि Maxizone के पास लोगों से निवेश के नाम पर पैसा लेने की अनुमति नहीं थी. लेकिन कंपनी ने निवेश के नाम पर लोगों से पैसा लिया. निवेशकों को लुभाने के लिए लुभावने स्कीम की घोषणा की. इसके तहत कंपनी में एक लाख रुपये निवेश करने वालों के जिंदगी भर 15 हजार रुपये महीना देने का वायदा किया. इसके अलावा कंपनी में निवेश कर चुके लोगों द्वारा नया निवेशक बनाने पर उन्हें 2.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कमीशन देने की घोषणा की थी. कंपनी ने झारखंड में ठगी के लिए जमशेदपुर में भी एक कार्यालय खोला था.

कंपनी के निदेशक व चंद्रभूषण सिंह की पत्नी प्रियंका सिंह की फाइल फोटो.
कंपनी के लुभावने नारों में फंस कर झारखंड के 436 लोगों ने कुल 21.73 करोड़ रुपये निवेश किया. कंपनी ने जमशेदपुर के लोगों से 5.10 करोड़ और राज्य के दूसरे जिलों के लोगों से 16.63 करोड़ रुपये की ठगी की. कंपनी ने अपनी साख बनाने के लिए कुछ दिनों तक निवेशकों को एक लाख रुपये के निवेश पर 15 हजार रुपये प्रति माह की दर से भुगतान किया. इससे कंपनी की साख बढ़ी और लोगों को इस पर विश्वास हुआ. इससे निवेशकों की संख्या बढ़ती गयी.
कंपनी ने निवेशकों से लिये गये पैसों को कहीं निवेश नहीं किया. बल्कि लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए नये निवेशकों के पैसों को पुराने निवेशकों के बीच अपने स्कीम को हिसाब से बांटती रही. इसके बाद फरवरी 2022 में अचानक कार्यालय बंद कर कंपनी के निदेशक सहित अन्य लोग गायब हो गये. जमशेदपुर के थानों में इस कंपनी के खिलाफ ठगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज थी. इन मामलों की जांच के बाद पुलिस द्वारा चंद्रभूषण सिंह और प्रियंका सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया जा चुका है. न्यायालय द्वारा दोनों को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है. ठगी को अंजाम देने के बाद चंद्रभूषण नोएडा में नाम बदल कर रह रहा था. वर्ष 2025 में पति-पत्नी को झारखंड पुलिस ने नोएडा से गिरफ्तार किया था.

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